Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती का हिंदुओं में बड़ा धार्मिक महत्व है. इस दिन को भगवान हनुमान की जयंती के रूप में मनाया जाता है क्योंकि उनका जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था. द्रिक पंचांग के अनुसार, आज हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. हनुमान जयंती का पावन पर्व हमें बजरंगबली की शक्ति, भक्ति और अद्भुत पराक्रम की याद दिलाता है. इस खास मौके पर रामायण के सुंदरकांड में वर्णित हनुमान जी की लंका यात्रा व लीला का महत्व और भी बढ़ जाता है. ये लीलाएं सिर्फ कथा नहीं, बल्कि साहस, बुद्धि और अटूट विश्वास का भी जीवंत उदाहरण मानी जाती हैं. तो आइए हनुमान जयंती के इस खास मौके पर हनुमान जी द्वारा की गई प्रमुख लंका लीलाओं व घटनाओं के बारे में जानते हैं.
1. सुरसा की परीक्षा
लंका जाते वक्त रास्ते में नागमाता सुरसा ने हनुमान जी का रास्ता रोक लिया और उन्हें निगलने की कोशिश की थी. हनुमान जी ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया. पहले उन्होंने अपना आकार बड़ा किया और जैसे ही सुरसा ने मुंह फैलाया, वे छोटा रूप लेकर मुंह के अंदर जाकर तुरंत बाहर निकल आए. इससे सुरसा खुश हो गईं और उन्हें आशीर्वाद दिया कि वह हर कार्य में सफल हों.
2. सिंहिका का अंत
जब हनुमान जी लंका जा रहे थे तो समुद्र के बीच में एक राक्षसी रहती थी, जो उड़ने वालों की परछाईं पकड़कर उन्हें रोक लेती थी. उसने भी हनुमान जी को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने तुरंत उसे मारकर आगे का रास्ता साफ कर लिया.
3. विभीषण से मुलाकात
सीता माता की खोज में लंका पहुंचने के बाद हनुमान जी को एक ऐसे स्थान पर 'राम' नाम लिखा दिखाई दिया. इससे उन्हें समझ आ गया था कि यहां कोई श्रीराम का भक्त रहता है. यहीं उनकी मुलाकात विभीषण से हुई. दोनों के बीच बातचीत हुई और हनुमान जी ने उन्हें श्रीराम से मिलाने का भरोसा दिया था.
4. माता सीता से भेंट
काफी खोज के बाद हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचे, जहां माता सीता उन्हें दुखी बैठी दिखीं थीं. उसके बाद माता सीता ने हनुमान जी को श्रीराम की अंगूठी दी और उनका संदेश सुनाया. इससे माता सीता को उम्मीद मिली कि जल्द ही उन्हें रावण से मुक्ति मिलेगी.
5. अशोक वाटिका में उत्पात
माता सीता से मिलने के बाद हनुमान जी ने वहां के पेड़-पौधे तोड़ दिए और राक्षसों को पराजित किया. इससे रावण के दरबार में हलचल मच गई़ थी.
6. अक्षय कुमार का वध
रावण ने अपने बेटे अक्षय कुमार को सेना के साथ भेजा था. लेकिन हनुमान जी ने उसे और उसकी सेना को हरा दिया था. उनकी ताकत देखकर पूरी लंका डर गई.
7. मेघनाद से सामना
इसके बाद मेघनाद ने हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र चलाया. हनुमान जी चाहते तो बच सकते थे, लेकिन उन्होंने उस अस्त्र का सम्मान करते हुए खुद को बंधने दिया. जिसके बाद हनुमान जी रावण के दरबार में पहुंचे थे. वहां उन्होंने रावण को अपनी मर्यादा और श्रीराम की शरण में जाने की चेतावनी दी.
8. लंका दहन
जब रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया. तो उसके बाद हनुमान जी ने उसी आग से पूरी लंका में आग लगा दी थी. सिर्फ विभीषण का घर सुरक्षित छोड़ा. इससे रावण की शक्ति पर बड़ा असर पड़ा.
9. श्रीराम को संदेश देना
इसके बाद हनुमान जी वापस लौटे और माता सीता की चूड़ामणि श्रीराम को दी. उन्होंने पूरी घटना बताई, जिसे सुनकर श्रीराम भावुक हो गए और उन्हें गले लगा लिया.