Hanuman Jayanti 2026: आज पूरे देश में हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. हनुमान जयंती, जिसे हनुमान जन्मोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. यह हिंदू धर्म के सबसे प्रिय और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है. हर वर्ष यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बजरंगबली का जन्म हुआ था. कहते हैं कि हनुमान जयंती के दिन संकटमोचन की पूजा-उपासना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. हनुमान जी को लेकर एक ओर मान्यता है कि अगर इस दिन राम नाम का जाप किया जाए तो भी हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. लेकिन, क्या आपको पता है कि हनुमान जी को अष्ट यानी आठ सिद्धियां प्राप्त थीं. तो आइए जानते हैं कि उन 8 सिद्धियों के बारे में और उनका महत्व.
अष्ट सिद्धियां
हनुमान चालीसा की 31वीं और 32 वीं चौपाई हैं-
चौपाई: अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
भावार्थ: इस चौपाई का अर्थ है कि माता जानकी ने आपको ऐसा वरदान दिया है कि आप अष्ट सिद्धि (अणिमा, महिमा आदि) और नौ निधि (पद्म, महापद्म आदि) किसी को भी प्रदान कर सकते हैं और उनके पास राम नाम की दिव्य औषधि है.
1. लघिमा सिद्धि
लघिमा का मतलब है खुद को बेहद हल्का बना लेना. इसी शक्ति के कारण हनुमान जी आकाश में उड़ सके और समुद्र पार कर गए. इसका यह मतलब है कि जब इंसान मन के बोझ जैसे डर, गुस्सा और अहंकार, को छोड़ देता है, तो उसके लिए आगे बढ़ना आसान हो जाता है.
2. अणिमा सिद्धि
अणिमा शक्ति से हनुमान जी खुद को बहुत छोटा बना सकते थे. लंका में प्रवेश करते समय उन्होंने यही रूप लिया था. यह हमें सिखाता है कि कई बार सफलता पाने के लिए विनम्र और सरल बनना जरूरी होता है.
3. महिमा सिद्धि
इस सिद्धि के जरिए हनुमान जी अपना आकार बहुत बड़ा कर सकते थे. लंका दहन के समय उनका विशाल रूप देखने को मिला. इसका अर्थ है कि आत्मविश्वास और साहस बढ़ने पर इंसान का प्रभाव भी बढ़ जाता है.
4. गरिमा सिद्धि
गरिमा का अर्थ है खुद को इतना भारी बना लेना कि कोई हिला न सके. यह केवल शरीर की ताकत नहीं, बल्कि मन की मजबूती का प्रतीक है. जो व्यक्ति अपने फैसलों पर अडिग रहता है, उसे कोई परिस्थिति कमजोर नहीं कर सकती है.
5. प्राप्ति सिद्धि
प्राप्ति का मतलब है किसी भी चीज को हासिल करने की क्षमता. हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर यह सिद्ध किया था. इससे सीख मिलती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं.
6. प्राकाम्य सिद्धि
यह सिद्धि इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति देती है. लेकिन इसका असली अर्थ है सही और अच्छे उद्देश्यों का चयन करना. हनुमान जी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल हमेशा धर्म और सेवा के लिए किया.
7. वशित्व सिद्धि
वशित्व का मतलब दूसरों को अपने वश में करना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और प्रेम से लोगों का दिल जीतना. हनुमान जी की भक्ति और विनम्रता ने सभी को उनका प्रशंसक बना दिया.
8. ईशित्व सिद्धि
ईशित्व सबसे उच्च सिद्धि मानी जाती है, जिसमें व्यक्ति खुद पर पूरा नियंत्रण पा लेता है. जब इंसान अपने विचारों और भावनाओं का मालिक बन जाता है, तब वह अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है.