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धर्म

अनगिनत मठों के लिए मशहूर है लद्दाख की धरती, ये 5 हैं सबसे खास

अनगिनत मठों के लिए मशहूर है लद्दाख की धरती, ये 5 हैं सबसे खास
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31 अक्टूबर से जम्मू कश्मीर और लद्दाख अलग होकर नए केंद्रीय शासित प्रदेश बनने जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हमेशा से ही अलग-अलग तरह की धार्मिक परंपराएं और रीति-रिवाज देखने को मिली हैं. लद्दाख के उबड़-खाबड़ इलाके में अनगिनत मठ इस बात के सबूत हैं. आइए  जानते हैं लद्दाख के कुछ खास मठों के बारे में.
अनगिनत मठों के लिए मशहूर है लद्दाख की धरती, ये 5 हैं सबसे खास
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मुलबेख मठ-
श्रीनगर-लेह हाइवे से जाते हुए करगिल के बाद पहला स्टॉप मुलबेख मठ है. यह मठ हाइवे के ठीक किनारे एकखड़ी चट्टान पर बना हुआ है.
अनगिनत मठों के लिए मशहूर है लद्दाख की धरती, ये 5 हैं सबसे खास
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थिकसे मठ-
यह विशाल संरचना तिब्बत के पोटाला पैलेस के आधार पर बनाई गई है. इसे पहाड़ी की चोटी पर बनाया गया है जो करीब 12 मंजिल का है और लेह से करीब 19 किलोमीटर दूर है. यहां मैत्रेय की 49 फीट ऊंची मूर्ति लगी है जो लद्दाख में सबसे बड़ी है इसके अलावा बौद्ध अवशेष जैसे प्राचीन थंगका, टोपी, बड़ी तलवारें, पुराने स्तूप और भी बहुत कुछ यहां मौजूद है.
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हेमिस मठ-
हेमिस मठ को लद्दाख में सबसे बड़े बौद्धिक संस्थान के रुप में जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इसका अस्तित्व 11वीं सदी से पहले से है. यह जगह प्रसिद्ध हेमिस त्योहार की जगह भी है जो हर साल जून में मनाया जाता है.
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लामायुरु मठ-
श्रीनगर-लेह हाइवे से लद्दाख की तरफ जा रहे पर्यटकों को लामायुरु मठ जरूर देखना चाहिए. यह लद्दाख के सबसे पुराने और सबसे बड़े मठ में से एक है.
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फुकताल मठ-
लद्दाख की ऊंची-नीची पहाड़ियों में स्थित फुकताल मठ दूर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते जैसी लगती है. गुफाओं में छिपे इस मठ का इतिहास 2500 साल पुराना है. समुद्रतल से 4800 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित इस मठ में करीब 200 बौद्ध भिक्षु रहते हैं.
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