धुंधी की कहानी-
भविष्यपुराण में वर्णन मिलता है कि सतयुग में राजा रघु के राज्य में माली नामक दैत्य की पुत्री ढोंढा या धुंधी थी. उसने शिव की उग्र तपस्या की. शिव ने प्रसन्न होकर वर मांगने के लिए कहा. उसने शिव से वर मांगा कि देवता, दैत्य, मनुष्य आदि मुझे मार ना सकें तथा अस्त्र-शस्त्र से भी मेरा वध ना हो. साथ ही दिन में, रात्रि में, शीतकाल में, उष्णकाल में, वर्षा काल में, भीतर-ूबाहर मुझे किसी से भय ना हो. शिव ने वरदान दे दिया लेकिन एक चेतावनी दी कि तुम्हें उन्मुक्त बालकों से भय रहेगा. ढोंढा नामक राक्षसी सबको पीड़ित करने लगी. ऐसी मान्यता है कि होली के दिन ही सभी बालकों ने एकजुट होकर चिल्लाते औऱ शरारत करते हुए धुंधी को गांव से बाहर धकेला था.