हमारे हिन्दू धर्म में कई ऐसे पवित्र और महत्वपुर्ण चिन्ह है जिन्हें पूजा से पहले इस्तेमाल करते हैं. जैसे "ॐ" या स्वस्तिक चिन्ह. स्वस्तिक चिन्ह के इस्तेमाल से घर का वास्तु दोष दूर हो सकता है.
किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है.
मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल होता है. स्वास्तिक शब्द में ‘सु’का अर्थ है शुभ और ‘अस्ति’से तात्पर्य है होना.
स्वस्तिक चिन्ह, जिसे न केवल भारत में बल्कि दूसरे देशों में भी इस्तेमाल किया जाता है. हिन्दू धर्म के अलावा बौद्ध और जैन धर्म में भी इसका महत्व है.
अगर आपके घर की दिशा ठीक नहीं है या आपके घर पर बार-बार नजर लगती है तो पीतल के बने हुए दो स्वस्तिक चिन्ह लाल कपड़े में बांधकर energise करें और सुबह राहु काल का समय देख कर अपने मेन गेट की चौखट के दोनों तरफ लगा दें.
अगर व्ययसाय ठीक नहीं चल रहा है या आर्थिक तंगी रहती है तो अपनी तिजोरी या बहीखाते पर लाल रोली से स्वस्तिक चिन्ह बनाएं और उत्तर पूर्व में रखें
अगर घर में बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता तो सफेद कागज पर लाल रोली से स्वस्तिक चिन्ह बनाएं. फिर सरस्वती मंत्र लिखें और पढ़ने के स्थान पर रख दें.
अगर बिना रुकावट के कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं तो काम की जगह पर स्वस्तिक pyramids energise करके उस जगह के बाहर की दीवार पर लगाएं.