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VISA Temple Hyderabad: भारत का वो अनोखा मंदिर, जहां भगवान 'अप्रूव' करते हैं वीजा!

हैदराबाद के चिलकुर गांव स्थित 'चिलकुर बालाजी मंदिर' भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है. इसे ‘वीजा मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाले भक्तों की पढ़ाई, नौकरी या यात्रा से जुड़ी वीजा संबंधी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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इस मंदिर में जो भी भक्त वीजा संबंधी मनोकामना के लिए आता है, वो मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर 11 परिक्रमा करता है.
इस मंदिर में जो भी भक्त वीजा संबंधी मनोकामना के लिए आता है, वो मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर 11 परिक्रमा करता है.

VISA Temple Hyderabad: हैदराबाद की यात्रा एक छोटे से गांव चिलकुर के बिना बिल्कुल अधूरी है. यहां मौजूद चिलकुर बालाजी मंदिर के दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं. उस्मान सागर झील और विकाराबाद रोड के पास स्थित यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर का पवित्र धाम माना जाता है. इस मंदिर को 'वीजा मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं, उनकी वीजा संबंधी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. फिर चाहे वो पढ़ाई-नौकरी या घूमने का वीजा ही क्यों न हो.

मंदिर से जुड़ी कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, इस मंदिर की कहानी 16वीं या 17वीं शताब्दी से जुड़ी बताई जाती है. कहते हैं कि भगवान तिरुपति बालाजी का एक बड़ा ही सच्चा भक्त था. लेकिन एक बार वो बहुत बीमार पड़ गया और दर्शन, पूजा करने मंदिर नहीं जा सका. अपने भक्त की ऐसी हालत देखकर भगवान तिरुपति बालाजी को बहुत दया आई और उन्होंने उसी क्षण उसे दर्शन दे दिए. कहते हैं कि जिस जगह भगवान ने अपने भक्त को दर्शन दिए थे, चिलकुर बालाजी मंदिर उसी स्थान पर बना है. आज इस मंदिर को लेकर भक्तों के बीच बड़ी आस्था है.

ऐसी मान्यताएं हैं कि यहां आकर भगवान के दर्शन करने से वीजा संबंधी परेशानियां खत्म हो जाती हैं. कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं और बताया है कि उन्हें वीजा मिलने बड़ी दिक्कत हो रही थी. लेकिन इस मंदिर में आकर उन्होंने प्रार्थना की और फिर उनके वीजा को मंजूरी मिल गई. तभी से इस मंदिर को 'वीजा मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है.

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वीजा के लिए अनोखी परंपरा
मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त वीजा संबंधी मनोकामना के लिए आता है वो मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर 11 परिक्रमा करता है. यह परिक्रमा करते वक्त भक्त अपने हाथ में कागज और पेन रखते हैं. जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तब वो दोबारा भगवान के दर्शन करने आते हैं और 108 बार परिक्रमा करते हैं.

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