आजकल के घर में मॉड्यूलर किचन का चलन तेजी से बढ़ रहा है. कम जगह में ज्यादा सुविधाएं देने वाली आधुनिक रसोई में छुरी-कांटों को रखने के लिए अलग से रैक बनाए जा रहे हैं. दीवारों पर छुरी-चाकू टांगने के लिए भी अलग से खूंटीनुमा स्पेस दिया जाता है. हालांकि वास्तु शास्त्र के जानकार इसे सही नहीं मानते हैं. उनका कहना है कि रसोई में छुरी-चाकू जैसे धारदार उपकरणों को उल्टा या सीधा खड़ा करके रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है.
ज्योतिर्विद कमल नंदलाल कहते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, छुरी और अन्य धारदार उपकरण मंगल ग्रह का प्रतीक माने जाते हैं. जब इन्हें रसोई में गलत तरह से रखा जाता है तो यह मंगल की ऊर्जा को अस्थिर कर सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घर में तनाव, विवाद और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है. रिश्तों में तनाव बढ़ता है. खासतौर पर यदि रसोई की दक्षिण दिशा खुली हो या नुकीले-पैने उपकरण टंगे हों तो इसका प्रभाव ज्यादा बढ़ जाता है.
वास्तु शास्त्र में यह भी कहा गया है कि वायु का संबंध बुध ग्रह से होता है. ऐसे में खुली जगह या दीवार पर धारदार उपकरण टांगने या लटकाने से ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है. यही वजह है कि चाकू और छुरी जैसी चीजों को हमेशा छिपाकर रखने की सलाह दी जाती है. उन्हें दीवार पर उल्टा या सीधा लटकाकर कभी नहीं रखना चाहिए.
चाकू को दीवार पर उल्टा या सीधा न लटकाएं
विशेषज्ञों के मुताबिक, चाकू को कभी भी सीधा खड़ा करके या नोंक ऊपर-नीचे की तरफ करके नहीं रखना चाहिए. इन्हें हमेशा समतल स्थिति में किसी टोकरी या बॉक्स में रखना बेहतर माना गया है. इसके लिए लाल रंग की टोकरी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह मंगल तत्व को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती है.
चाकू और चकला-बेलन बिना धोए न छोड़ें
इसके अलावा, रात में इस्तेमाल किए गए चाकू, चकला-बेलन या अन्य रसोई उपकरणों को बिना धोए छोड़ना भी उचित नहीं माना जाता है. मान्यता है कि गंदे और बिखरे हुए किचन से नकारात्मकता बढ़ती है और जीवन में बाधाएं आने लगती हैं. वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नए चाकू या धारदार वस्तु को घर लाकर उस पर मौली बांधना शुभ होता है. इससे मंगल दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है.