Shani Gochar 2027: इस समय शनि देव मीन राशि में स्थित हैं, जिसकी वजह से कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. वहीं, सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या से चल रही है. लेकिन, यह स्थिति 2027 में बदलने वाली है, जब शनि राशि परिवर्तन करेंगे.
शनि का अगला गोचर कब होगा?
द्रिक पंचांग के अनुसार, शनिदेव इस समय मीन राशि में बैठे हुए हैं और 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषियों के अनुसार, शनिदेव लगभग 30 साल बाद मेष राशि में जा रहे हैं. मेष शनि की नीच राशि मानी जाती है, इसलिए यह गोचर कई राशियों के लिए खास बदलाव लेकर आएगा.
किन राशियों को मिलेगी राहत?
कुंभ राशि- शनि के मेष में प्रवेश करते ही कुंभ राशि वालों की साढ़ेसाती समाप्त हो जाएगी और आर्थिक दुखों से राहत मिलेगी.
सिंह और धनु राशि- इन दोनों राशियों को शनि ढैय्या से छुटकारा मिलेगा.
किन पर शुरू होगा नया प्रभाव?
वृषभ राशि- शनि के मेष राशि में प्रवेश करते ही 3 जून 2027 से वृषभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती शुरु हो जाएगी.
कन्या और मकर राशि- इन राशियों पर शनि ढैय्या शुरू हो जाएगी.
किन राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते?
ज्योतिषियों के अनुसार, कुंभ, सिंह और धनु राशि वालों के लिए 2027 राहत और प्रगति का साल साबित हो सकता है. लंबे समय से अटके काम पूरे होने लगेंगे. आय में सुधार होगा. करियर में नए मौके मिल सकते हैं. व्यापार से जुड़े लोगों को खास फायदा मिल सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. नए काम की शुरुआत के योग बनेंगे.
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से बचाव के उपाय
शनि का प्रभाव डरने के लिए नहीं, बल्कि संभलकर चलने का संकेत माना जाता है. इस दौरान धैर्य, अनुशासन और सही कर्म सबसे बड़ा उपाय होता है. फिर भी कुछ पारंपरिक तरीके हैं जिन्हें अपनाया जा सकता है-
- शनिवार को विशेष ध्यान
हर शनिवार शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल या उड़द का दान करना भी शुभ माना जाता है.
- हनुमान जी की उपासना
हनुमान चालीसा का पाठ या बजरंग बाण का पाठ शनिवार या मंगलवार को करना लाभकारी माना जाता है.
- पीपल वृक्ष की पूजा
शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना और जल अर्पित करना सकारात्मक ऊर्जा देता है.