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Sakat Chauth 2026: सकट चौथ कल, जानें इस दिन क्यों काटा जाता है 'बकरा', मुहूर्त भी नोट करें

सकट चौथ पर भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है. लेकिन इस दिन 'बकरे' की बलि देने का भी विधान है. दरअसल, इस दिन पूजा स्थल पर तिल और गुड़ से बकरे का प्रतीकात्मक चित्र बनाया जाता है और फिर दूब की मदद से उसे काटा जाता है.

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सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, संकटी चौथ, संकष्टी चतुर्थी और माही चौथ भी कहा जाता है. (Photo: Pexels)
सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, संकटी चौथ, संकष्टी चतुर्थी और माही चौथ भी कहा जाता है. (Photo: Pexels)

Sakat Chauth 2026: सनातन धर्म में सकट चौथ के त्योहार का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान गणेश और माता सकट की विधिवत पूजा का विधान बताया गया है. इस साल सकट चौथ का त्योहार 6 जनवरी दिन मंगलवार यानी कल मनाया जाएगा. सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, संकटी चौथ, संकष्टी चतुर्थी और माही चौथ भी कहा जाता है. इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं. यह व्रत संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्ध की कामना के लिए रखा जाता है.

सकट चौथ के दिन 'बकरा' काटने की एक खास परंपरा भी निभाई जाती है. दरअसल, इस दिन पूजा स्थल पर तिल और गुड़ से बकरे का प्रतीकात्मक चित्र बनाया जाता है और फिर दूब की मदद से उसे काटा जाता है. दरअसल, प्राचीन समय में संकटों से मुक्ति पाने के लिए बकरे या किसी पशु की बलि देने की प्रथा थी. लेकिन वक्त के साथ ऐसी प्रथाओं का पतन हो गया. इसकी जगह अब तिल और गुड़ से बकरे का प्रतीकात्मक चित्र बनाया जाता है. फिर दूब घास को तलवार समझकर बकरे की गर्दन काटी जाती है. तिल और गुड़ की बलि से भगवान प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों का उद्धार करते हैं.

सकट चौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 08:01 बजे शुरू होगी. फिर अगले दिन 7 जनवरी को सुबह 06:52 बजे इसका समापन होगा. ऐसे में सकट चौथ का व्रत-पूजन 6 जनवरी 2026 दिन मंगलवार को ही मान्य है.

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सकट चौथ की पूजन विधि
सकट चौथे पर दिनभर कठोर उपवास रखकर संध्या काल में भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है. इस दिन प्रातःकाल में स्नान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें. उनके मंत्रों का जाप करें.  इसके बाद शाम के समय चंद्रोदय के समय मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं या फिर उनका चित्र, प्रतिमा स्थापित करें. आप चाहें तो गणपति जी के साथ देवी दुर्गा की तस्वीर भी रख सकते हैं.

इसके बाद भगवान को धूप, दीप, अगरबत्ती और पुष्प अर्पित करें. केले और नारियल के प्रसाद का भोग लगाएं. भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय  हैं तो आप इसका भोग भी उन्हें लगा सकते हैं. गुड़ और तिल से बने मोदक का भोग लगाएंगे तो और भी अच्छा होगा. पूजा के दौरान गणेश जी की कथा का सुनें. उनकी आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें

इसके बाद चंद्र देव की पूजा का भी विधान है. शाम के समय चंद्रमा को जल अर्पित करें. उन्हें फूल, अक्षत, चंदन चढ़ाएं. इसके बाद पूजा का प्रसाद परिवार के अन्य सदस्यों में बांट दें. पूजा संपन्न होने के बाद व्रत खोला जा सकता है. इस दिन जरूरतमंदों का दान देने का भी विशेष महत्व है. आप तिल, गुड़, गर्म कपड़े, खाने की सामग्री या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान कर सकते हैं.

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