Hanuman Ji Name Mythological Story: भगवान हनुमान को कलयुग का सबसे जागृत और शक्तिशाली देवता माना जाता है. मान्यता है कि वे आकाश, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. उनका नाम लेने मात्र से भय, संकट और परेशानियां दूर हो जाती हैं. जो भक्त सच्चे मन से भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं, उनके जीवन में साहस, शक्ति और सफलता आती है. हनुमान जी को बजरंगबली, पवनपुत्र, अंजनीसुत और रामभक्त जैसे कई नामों से जाना जाता है, लेकिन “हनुमान” नाम कैसे पड़ा, इसकी कथा बेहद रोचक है.
बाल्यकाल में था नाम मारुति
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बचपन में हनुमान जी का नाम मारुति था. एक दिन वे नींद से जागे और उन्हें बहुत तेज भूख लगी. तभी उनकी नजर आकाश में चमकते लाल रंग के गोलाकार पर पड़ी, जिसे उन्होंने पका हुआ फल समझ लिया. असल में वह सूर्यदेव थे, लेकिन बालक मारुति उसे फल समझकर उसे खाने के लिए आकाश की ओर उछल पड़े.
सूर्य को निगलने की घटना
उसी समय अमावस्या का दिन था, राहु सूर्य को ग्रहण लगाने के लिए आगे बढ़ रहे थे. लेकिन उससे पहले ही मारुति ने सूर्य को अपने मुख में ले लिया. यह दृश्य देखकर राहु घबरा गए. उन्होंने देवराज इंद्र से सहायता मांगी.
इंद्र का वज्र और मारुति का गिरना
इंद्र ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन जब बालक मारुति ने सूर्य को नहीं छोड़ा, तो इंद्र ने अपने वज्र से उन पर प्रहार कर दिया. वज्र के आघात से सूर्य मुक्त हो गए, लेकिन मारुति बेहोश होकर धरती पर गिर पड़े. इस चोट से उनकी ठोड़ी (हनु) टेढ़ी हो गई.
पवन देव का क्रोध और देवताओं का हस्तक्षेप
जब पवन देव को यह पता चला, तो वे क्रोधित हो उठे, उन्होंने पूरे संसार में वायु का प्रवाह रोक दिया. इससे जीव-जंतुओं में हाहाकार मच गया. तब सभी देवता पवन देव को शांत करने पहुंचे. उन्होंने बालक मारुति को स्वस्थ किया. उन्हें अनेक दिव्य वरदान दिए.
‘हनुमान’ नाम कैसे पड़ा
कहा जाता है कि ठोड़ी (हनु) के विकृत होने के कारण ही उनका नाम “हनुमान” पड़ा. इसके बाद वे और भी अधिक शक्तिशाली बन गए और हमेशा अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहने लगे.