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Happy Ugadi 2022: श्री वेंकटेश्वर मंदिर में उगादी पर्व का भव्य आयोजन, देखें तस्वीरें

उगादी या युगदी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के लोगों द्वारा नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. दक्षिण भारत के लोग इस फर्व को नई फसल के आगमन की खुशी में मनाते हैं.यह पर्व तैत्र माह की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है.

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Tirumala Tirupati ugadi festival
Tirumala Tirupati ugadi festival
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दक्षिण भारत में इस पर्व को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है
  • श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जा रहा है

चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि के दिन दक्षिण भारत में उगादी का त्योहार मनाया जाता है. दक्षिण भारत में इस पर्व को नववर्ष भी करते हैं. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेंलगाना में यह एक बड़ा त्योहार माना जाता है. उगादी या युगादि, जिसे संवत्सरादि के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के अनुसार नए साल का दिन होता है. उगादी को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा कहते हैं. उगादी और गुड़ी पड़वा दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं.

इस मौके पर आंध्र प्रदेश के तिरुपति में तिरुमला की पहाड़ियों पर बने श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. बता दें कि तिरुपति भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है. यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है. श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर समुद्र तट से 3200 फीट की ऊंचाई में स्थित है. 

ugadi festival

उगादी के पर्व का स्वागत करने के लिए श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों आदि से सजाया गया. मंदिर की सजावट का सारा काम पहले ही कर लिया गया था. त्योहार के मौके पर श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर के मुख्य द्वार को नारियल और केले के पंडाल के साथ सजाया गया है. इसके साथ ही मुख्य द्वार को सजाने के लिए गन्ने, कच्चे आम और अलग-अलग तरह के फूलों का इस्तेमाल भी किया गया है. मंदिर के बाहर श्री भु वराह स्वामी और हनुमान स्वामी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं जो तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हई हैं. इस दौरान मंदिर के दर्शन करने के लिए भक्त भारी संख्या में यहां पहुंचें. मंदिर की खूबसूरती ने सभी का दिल जीत लिया.

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Tirumala Tirupati temple
andhra pradesh

क्यों मनाया जाता है उगादी पर्व

उगादी का त्योहार मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं. माना जाता है कि  इसी दिन ब्रह्मा जी ने इस दुनिया की रचना की थी. वहीं, एक और मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था. इसके अलावा यह भी माना जाता है कि इस दिन प्रभु राम और युधिष्ठर का राज्याभिषेक हुआ था. बता दें कि उगादी को नई शुरुआत और आने वाली खुशियों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस त्योहार को वसंत की शुरुआत के जश्न के रूप में भी मनाया जाता है. 

कैसे मनाया जाता है उगादी का त्योहार

उगादी के त्योहार की शुरुआत तेल स्नान से होती है फिर उसके बाद पूजा की जाती है. इस दिन तेल स्नान और नीम की पत्तियां खाने का रिवाज होता है. उत्तर भारत में उगादी का पर्व नहीं मनाया जाता, लेकिन उगादी के दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरू हो जाते हैं. इस दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन मिश्री के साथ नीम खाने का भी रिवाज है.

 

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