हर एक त्योहार और व्रत की तरह ही महाशिवरात्रि को लेकर भी कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है. तिथि के शुरू होने, इसके खत्म होने और व्रत के पारण को लेकर अलग-अलग विचार बन रहे है. ऐसे में महाशिवरात्रि कब है ये सवाल उठ रहा है. अभी तक अधिकांश लोगों का मानना है कि शिवरात्रि 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी.
महाशिवरात्रि का पर्व तिथि के अनुसार फाल्गुन महीने की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. शिवरात्रि का पर्व खास तौर पर रात का ही व्रत है, जिसके लिए दिन में ही संकल्प लिया जाता है. लेकिन रात में महादेव शिव का ध्यान और जागरण किया जाता है.
14, 15 और 16 फरवरी का कन्फ्यूजन
ऐसे में स्पष्ट है कि शिवरात्रि चतुर्दशी तिथि को ही मनाई जाती है, लेकिन भ्रम की स्थिति तिथि और तारीख के मिसमैच होने की वजह से है. क्योंकि 14 फरवरी शनिवार को द्वादशी तिथि है. तारीखों के अनुसार देखें तो 14 और 15 फरवरी के बीच एक तिथि और यानी त्रयोदशी तिथि होनी चाहिए थी. पंचांग में देखें तो त्रयोदशी तिथि उदया तिथि में 15 फरवरी को ही है. वहीं महा शिवरात्रि भी 15 फरवरी यानी रविवार के दिन है. यही कन्फ्यूजन का कारण है. आखिर उदया तिथि न होने के बाद भी महाशिवरात्रि 15 फरवरी को क्यों मनाई जा रही है.

असल में फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की महाशिवरात्रि (चतुर्दशी तिथि) 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी. यानी 15 फरवरी को शिवरात्रि के लिए उदया तिथि (सूर्य के उगने के साथ शुरू होने वाली तिथि) नहीं मिल रही है. साधारण तरीके से लोग किसी भी पर्व, व्रत या उत्सव के लिए उदया तिथि को ही जरूरी मानते हैं.
लेकिन, शिवरात्रि के लिए उदया तिथि के अलावा जो दूसरी सबसे जरूरी बात है वह है निशीथ काल का होना. निशीथ काल चतुर्दशी तिथि में रात भर होनी ही चाहिए. तभी शिवरात्रि (जैसा कि नाम से साफ स्पष्ट) के होने का मतलब है. निशिथ काल (मध्यरात्रि) की पूजा 15 फरवरी की रात को ही हो सकेगी, इसलिए मुख्य महाशिवरात्रि व्रत 15 फरवरी, रविवार को ही रखा जाएगा.
रविवार को पूरे दिन व्रत रखने के साथ 16 फरवरी को अगले दिन पारण किया जा सकता है. 16 फरवरी को शिवरात्रि व्रत पारण समय सुबह 06:59 AM से 03:24 PM तक किया जाएगा.
शिवरात्रि मनाने का शास्त्र सम्मत नियम
शिवरात्रि मनाने के शास्त्र सम्मत नियम भी हैं. इसी के आधार पर निर्धारण करके इस व्रत के उत्सव को मनाने की तिथि घोषित की जाती है. इसके अनुसार दिन के 24 घंटे आठ पहर में बंटे होते हैं. हर पहर तीन घंटे का होता है. शास्त्रों के अनुसार त्रयोदशी की तिथि में चतुर्दशी तिथि जिस रात को होती है उसी दिन महा शिवरात्रि मनाने का विधान है.
यानी कि दिन के हिस्से में भले ही त्रयोदशी तिथि हो, लेकिन अगर निशीथ काल में पूरे समय चतुर्दशी तिथि हो तो महाशिवरात्रि त्रयोदशी वाले दिन ही मनाई जाएगी और अगले दिन पारण होगा.

कब होगा शिवरात्रि का पारण?
इसके अलावा हर स्थिति में व्रत अगले ही दिन किया जाता है. इस बार 15 और 16 फरवरी को यही स्थिति बन रही है. 15 फरवरी को दिन भर त्रयोदशी तिथि है. शाम 5 बजकर 4 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग रही है. इसी समय से प्रदोष काल भी शुरू हो रहा है. इसके बाद रात भर चतुर्दशी तिथि है, जो कि शिवरात्रि के महत्व के लिए सबसे सही और फिट बैठती है. शिवरात्रि रात का ही पर्व और उत्सव है. यही निशीथकाल है, जिसका योग उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के साथ बन रहा है.
चतुर्दशी तिथि अगले दिन 16 फरवरी को पूरे दिन और शाम को सूर्यास्त के पहले तक है, लेकिन उसी समय प्रदोष काल खत्म हो रहा है और रात से फिर अमावस्या तिथि लग रही है. इसी के कुछ समय बाद से सूर्य ग्रहण भी लग रहा है.
इसलिए 15 फरवरी को उदया तिथि में न होने के बावजूद महाशिवरात्रि इसी तारीख को मनाई जाएगी. 16 फरवरी को निशीथ काल न होने के कारण भले ही उस दिन चतुर्दशी है, लेकिन शिवरात्रि का व्रत नहीं किया जाएगा. इस दिन दोपहर से पहले तक पारण कर लिया जाएगा.