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'मैं ही बेटा, मैं ही बेटी...' बग्घी पर सजधज कर सवार हुई दुल्हन मुस्कान, बेटों की तरह धूमधाम से निकली बिंदौरी

राजस्थान के टोंक में एक पिता ने अपनी इकलौती बेटी की बिंदौरी उसी शान से निकाली, जैसी आमतौर पर बेटों के लिए निकाली जाती है. सजी-धजी बग्घी पर बैठी दुल्हन ने लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ नृत्य किया, जबकि परिवार की महिलाओं ने जमकर जश्न मनाया. यह आयोजन बेटियों के सम्मान और बदलती सामाजिक सोच की मिसाल बन गया.

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बग्गी पर सवार हुई दुल्हन. शहर में निकली बिंदौरी. (Photo: ITG)
बग्गी पर सवार हुई दुल्हन. शहर में निकली बिंदौरी. (Photo: ITG)

राजस्थान के टोंक जिले में एक परिवार ने अनोखा संदेश देते हुए अपनी इकलौती बेटी की बिंदौरी उसी शान से निकाली, जैसी आमतौर पर बेटों के लिए निकाली जाती है. सोनी परिवार ने अपनी ग्रेजुएट बेटी मुस्कान सोनी को बग्घी पर बैठाकर मुख्य बाजार में बिंदौरी निकाली. इस दौरान परिवार की महिलाओं ने राजस्थानी और फिल्मी गीतों पर डांस किया, वहीं खुद दुल्हन भी खुशी से झूमती नजर आई.

मुस्कान सोनी का विवाह 19 फरवरी को टोंक के ही एक प्रतिष्ठित ज्वेलर परिवार में होना है. आमतौर पर यह परंपरा बेटों के लिए निभाई जाती रही है, लेकिन मुस्कान के पिता महावीर सोनी ने अपनी बेटी की इच्छा का सम्मान करते हुए उसे बेटे के समान मानकर यह आयोजन किया.

यहां देखें Video...

बिंदौरी के दौरान मुस्कान सजी-धजी बग्घी पर सवार नजर आईं. आतिशबाजी के बीच जुलूस निकाला गया और परिवारजन खुशी से झूमते रहे. मुस्कान ने बग्घी पर बैठने से पहले सजी हुई थाली में रखी भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ की प्रतिमा के साथ नृत्य किया और कुछ देर तक प्रतिमा को गोद में लेकर बग्घी में सवारी भी की.

tonk father treats only daughter as son takes out bindori on buggy

परिवार कृष्ण भक्त है और नियमित रूप से लड्डू गोपाल की सेवा-पूजा करता है. ऐसे में इस धार्मिक आस्था की झलक भी बिंदौरी में साफ दिखाई दी. पूरा कार्यक्रम पारंपरिक रीति-रिवाजों और उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ.

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यह भी पढ़ें: ...जब राजस्थान में एक IPS दूल्हे को पुलिस सुरक्षा में निकालनी पड़ी बिंदौरी, जानिए क्या है पूरा मामला

दुल्हन मुस्कान सोनी ने कहा कि मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं. मेरे लिए मैं ही उनका बेटा हूं और मैं ही बेटी. पापा ने मेरे लिए वही सब किया, जो आमतौर पर बेटे के लिए किया जाता है. यह मेरे जीवन का बेहद खास और भावुक पल है.

पिता महावीर सोनी, जो पेशे से ज्वेलर हैं, कहते हैं कि उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को बेटे के समान ही माना है. उनकी इच्छा थी कि जिस तरह समाज में बेटों के लिए बिंदौरी निकाली जाती है, वैसा ही सम्मान बेटी को भी मिले. उन्होंने कहा कि आज बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं और समाज को अपनी सोच बदलनी होगी.

tonk father treats only daughter as son takes out bindori on buggy

इस आयोजन में ससुराल पक्ष के लोग भी शामिल हुए और पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया. बग्घी के साथ निकली यह बिंदौरी जब मुख्य बाजार से गुजरी तो लोग देखने के लिए रुक गए. कई लोगों ने इसे बेटियों के सम्मान की दिशा में सकारात्मक पहल बताया.

टोंक में आयोजित यह अनोखी बिंदौरी सिर्फ एक पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आई, जहां कभी बेटियों के जन्म पर मायूसी छा जाती थी, वहीं अब बेटियों को समान अधिकार और सम्मान देने की पहल खुलकर सामने आ रही है.

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