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Video: खुद को घिरता देख टाइगर ने जिप्सियों के पीछे लगाई दौड़, पर्यटकों की फूल गईं सांसें

Ranthambore national park: सवाई माधोपुर के रणथंभौर नेशनल पार्क में लगातार लापरवाही सामने आ रही हैं. आज एक टाइगर का वीडियो सामने आया है जिसमें वह पर्यटकों की जिप्सियों के पीछे दौड़ता नजर आ रहा है तो वहीं आज ही एक बाघिन की संदिग्ध हालात में मौत हो गई.

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जिप्सियों के पीछे दौड़ता टाइगर. जिप्सियों के पीछे दौड़ता टाइगर.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रणथंभौर पार्क में यात्रियों ने बनाया वीडियो
  • जिप्सियों के पीछे टाइगर ने लगाई दौड़

राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर में पर्यटक भ्रमण के दौरान अनियमितताएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है. रणथंभौर के जोन नंबर तीन में मलिक तालाब के पास टाइगर T-120 को देखने के लिए पर्यटकों से भरी जिप्सियों का मजमा लग गया. इस दौरान टाइगर जिप्सियों को देखकर साइड से निकलने लगा तो ड्राइवरों ने जिप्सी नहीं हटाई, ऐसे में बाघ ने अपने आप को घिरा देख जिप्सियों के पीछे दौड़ लगा दी. रास्ता नहीं मिलने पर इस जानवर ने कुछ दूरी तक जिप्सियों का पीछा भी किया. हालांकि बाद में टाइगर जिप्सियों से अलग हटकर दूसरी ओर चला गया. 

गनीमत यह रही कि टाइगर ने जिप्सियों पर हमला नहीं किया. वरना कोई बड़ी दुर्घटना भी घटित हो सकती थी. जिप्सियों के पीछे दौड़ लगते टाइगर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. मामले को लेकर सीसीएफ सेडूराम यादव का कहना है कि पर्यटक भ्रमण के दौरान नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. देखें Video:

बाघिन T-61 की मौत 

उधर, रणथंभौर के जोन नंबर-7 के जामोदा वन क्षेत्र में बाघिन का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया.  सूचना पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बाघिन के शव को कब्जे में कर राजबाग नाका वन चौकी पहुंचाया गया, जहां वन और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया गया और फिर उसका अंतिम संस्कार किया गया.

वनाधिकारियों के अनुसार, बाघिन टी 61 की मौत प्रथम दृष्टया किसी ऊंची चट्टान से गिरने की वजह से हुई है. हालांकि, बाघिन की मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा.  जानकारी के अनुसार, बाघिन टी-61 को जन्म के बाद पहली बार 2011 में देखा गया था. ये बाघिन टी-8 (लाडली) और बाघ टी-34 (कुम्भा) की वंशज थी. इसकी टेरेटरी जोन 7 और 8 ही रहे हैं. बाघिन लगभग 12 साल की थी. हाल ही में बाघ T-58 के साथ में रहती थी.  

(सवाई माधोपुर से सुनील जोशी का इनपुट)

 

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