राजस्थान के जोधपुर में चर्चित कथा वाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को दो हफ्ते होने को हैं, लेकिन सवाल अब भी हैं कि क्या यह स्वाभाविक मृत्यु थी या इसके पीछे कोई साजिश है? जांच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के हाथ में है, और हर दिन नए बयान, नए दावे और नई कड़ियां सामने आ रही हैं. इसी बीच एक अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं भोमाराम... वह शख्स जिसने साध्वी प्रेम बाईसा के इंस्टाग्राम अकाउंट से आखिरी पोस्ट किया था.
अस्पताल से आश्रम तक क्या-क्या हुआ, किसके कहने पर पोस्ट डाली गई और उसके बाद कैसे माहौल बदला... इस खुलासे ने जांच को नई दिशा दे दी है.
आजतक से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में भोमाराम ने उस रात की पूरी कहानी बताई...फोन कॉल से लेकर अस्पताल पहुंचने तक, इंस्टाग्राम पोस्ट से लेकर आश्रम में जुटती भीड़ और न्याय की मांग तक. उनका बयान जांच की दिशा को नई परत देता नजर आता है. भोमाराम के मुताबिक, 28 जनवरी की शाम 6 बजकर 52 मिनट पर उन्हें वीरमनाथ (साध्वी प्रेम बाईसा के पिता) का फोन आया. कॉल पर कहा गया था- बाईसा की तबीयत खराब है, तुरंत अस्पताल पहुंचो.
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भोमाराम बताते हैं कि वे उस समय बाहर निकलने की तैयारी में थे. कॉल मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम छोड़ा और सीधे अस्पताल के लिए रवाना हुए. शाम 7 बजकर 31 मिनट पर वे अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. उनके शब्दों में, जब मैं पहुंचा, तब तक बाईसा का देहांत हो चुका था. शरीर ढका हुआ था. माहौल गंभीर था. वीरमनाथ जी खुद कांप रहे थे और बोलने की हालत में नहीं थे.
अस्पताल से आश्रम तक... फोन पर फोन, मैसेज पर मैसेज
भोमाराम के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद उन्होंने गुरुजी और अन्य संतों को फोन करना शुरू किया. वीरमनाथ ने भी कई धार्मिक और सामाजिक हस्तियों को कॉल किए.

रास्ते में कई संतों और परिचितों को सूचना दी गई. निर्णय यह हुआ कि आगे की प्रक्रिया संत समाज की मौजूदगी में ही तय होगी, जिसमें पोस्टमार्टम भी शामिल है या नहीं, यह भी उसी सलाह से होगा. अस्पताल से लगभग साढ़े आठ बजे वे लोग निकले और आरती नगर मोड़ पर करीब 15-20 मिनट रुके, जहां अन्य संत और कथा वाचक भी पहुंचने लगे.
इंस्टाग्राम की वह आखिरी पोस्ट
पूरे घटनाक्रम की सबसे चर्चित कड़ी रही साध्वी प्रेम बाईसा के इंस्टाग्राम अकाउंट से की गई 'न्याय' वाली पोस्ट. यही पोस्ट बाद में विवाद और सवालों का केंद्र बन गई.

भोमाराम ने कहा- वह पोस्ट मैंने लिखी थी, लेकिन शब्द मेरे नहीं थे. जैसा वीरमनाथ जी ने बोला, वैसा ही मैंने टाइप करके पोस्ट किया. उनके अनुसार, रात करीब 9 बजकर 38 मिनट पर यह पोस्ट डाली गई.
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पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गईं और आश्रम में भीड़ जुटनी शुरू हो गई. भोमाराम बताते हैं कि पोस्ट का भाव यह था कि साध्वी प्रेम बाईसा ने 25 साल ब्रह्मचर्य का जीवन जिया, लेकिन उन्हें बदनाम करने की कोशिश हुई.
उनके अनुसार, वीरमनाथ रास्ते में बता रहे थे कि बाईसा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य को पत्र भी लिखा था और अग्नि परीक्षा देने की बात कही थी. अब जब वह नहीं रहीं, तो न्याय कौन दिलाएगा... इसी भाव से पोस्ट लिखवाई गई.
आश्रम में भीड़, नारे और हंगामा
पोस्ट वायरल होते ही आश्रम में लोगों का आना शुरू हो गया. भोमाराम के मुताबिक, पहले कुछ गाड़ियां थीं, फिर संख्या बढ़ती चली गई. इसी दौरान कुछ युवकों ने हंगामा भी किया. न्याय दो, न्याय दो के नारे लगे. आरोप है कि कुछ लोगों ने वाहन के साथ तोड़फोड़ की कोशिश की, हैंडल तोड़ा, कांच फोड़ने की कोशिश की और टायर की हवा निकाल दी. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस मौके पर पहुंची और हालात काबू में किए गए.

भोमाराम के बयान के मुताबिक, वीरमनाथ शुरू से कह रहे थे कि पोस्टमार्टम कराया जाएगा, लेकिन संतों की मौजूदगी और सलाह के बाद. उन्होंने कहा कि संत समाज में सामान्यतः पोस्टमार्टम नहीं होता, लेकिन बाईसा की लोकप्रियता और फॉलोइंग को देखते हुए कहा गया कि अगर जरूरत है तो कराया जाए. अंतिम निर्णय संतों के आने के बाद होना था.
SIT की जांच और भोमाराम का बयान
अब इस पूरे मामले की जांच SIT कर रही है. भोमाराम को एक बार बयान के लिए बुलाया जा चुका है. वे कहते हैं, पुलिस ने मुझसे टाइमलाइन पूछी... कब कॉल आया, कब अस्पताल पहुंचा, पोस्ट कब की. अस्पताल के कैमरे भी चेक किए गए कि मैं कब अंदर गया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे साध्वी प्रेम बाईसा के सोशल मीडिया अकाउंट नियमित रूप से नहीं चलाते थे. उनका फोन और सोशल मीडिया एक्सेस स्टाफ के पास रहता था. उस दिन फोन गाड़ी में था, वहीं से पोस्ट की गई.

भोमाराम का दावा है कि उनका साध्वी प्रेम बाईसा और आश्रम से जुड़ाव नया नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है. वे बताते हैं कि मैं जन्म से ही जुड़ा हुआ हूं. साल 2011-12 में आश्रम में रहा, फिर गांव चला गया. साल 2017-2020 तक फिर उनके साथ रहा. बाद में अलग होकर दुकान शुरू कर दी. उनके अनुसार, साध्वी को सामान्य खांसी-जुकाम के अलावा कोई बड़ी बीमारी नहीं थी, हां, ठंड के मौसम में सांस लेने में दिक्कत होने पर भाप लेती थीं.
इलाज और इंजेक्शन पर सवाल
इंजेक्शन और इलाज की बात पर भोमाराम ने कहा कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तब तक साध्वी का निधन हो चुका था, इसलिए इलाज की प्रक्रिया या दवाओं की जानकारी उन्हें नहीं है. डॉक्टर ने क्या दिया, कौन सा इंजेक्शन लगा, मैं उस समय मौजूद नहीं था.
मौत या हत्या? संशय कायम
मामले का सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है... क्या यह प्राकृतिक मृत्यु थी या कुछ और? अभी तक जांच एजेंसियों ने किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है. SIT लगातार करीबी लोगों, स्टाफ, सेवादारों और परिवार से जुड़े लोगों के बयान दर्ज कर रही है. डिजिटल सबूत, मेडिकल रिपोर्ट और कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है.
बातचीत के दौरान भोमाराम ने एक बात दोहराई कि बाईसा को न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने जैसा जीवन जिया, वैसा कम लोग जी पाते हैं. अगर उनके साथ गलत हुआ है तो सच सामने आना चाहिए. फिलहाल इस केस में कई दावे हैं, कई भावनाएं हैं, और कई सवाल भी. सच क्या है- यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा.