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43 डिग्री तापमान, कड़ी धूप में आग के घेरे में बैठी रशियन लड़की, चर्चा में 21 दिन की अग्नि तपस्या

राजस्थान के पुष्कर में भीषण गर्मी के बीच रूस की एक महिला साध्वी 9 धूनियों के बीच बैठकर कठोर अग्नि तप कर रही हैं. 43 डिग्री तापमान में चल रही यह 21 दिवसीय तपस्या लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. नाथ संप्रदाय से जुड़ी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ की साधना अब देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चा का विषय बन गई है.

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कड़ी धूप में आग के घेरे में बैठी रशियन लड़की की तपस्या (Photo: itg)
कड़ी धूप में आग के घेरे में बैठी रशियन लड़की की तपस्या (Photo: itg)

आपने साधु संतों को भीषण गर्मी के मौसम में अग्नि तप करते हुए देखा होगा. लेकिन राजस्थान के पुष्कर में पहली बार 43 डिग्री तापमान में रूस की महिला 9 धूनी अग्नि तप कर रही है. ये नाथ संप्रदाय की एक अत्यंत प्राचीन और कठोर हठ योग साधना है, जिसमें साधक चारों तरफ धधकती आग (9 धूनियों) के बीच बैठकर तपस्या करते हैं.  3 मई से शुरू हुई महिला की यह अग्नि तपस्या 25 मई तक चलेगी. महिला की यह तपस्या देश ही नहीं पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. दूर-दूर से लोग विदेशी महिला की तपस्या को देखने के लिए पुष्कर पहुंच रहे हैं. रूस की महिला ने 10 साल पहले नाथ संप्रदाय अपनाया था. उसके बाद से वो लगातार नाथ संप्रदाय के रीति रिवाज से अपना जीवन यापन कर रही हैं.

9 धूनियों के बीच बैठकर 21 दिन की अग्नि तपस्या

मूल रूप से रूस की रहने वाली राधिका योगिनी अन्नपूर्णा नाथ देश ही नहीं पूरे दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. राजस्थान की तपती हुई गर्मी में अजमेर के रेगिस्तान पुष्कर में छोटी बस्ती स्थित शमशान भूमि में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम पर राधिका योगिनी 9 धूनियों के बीच बैठकर 21 दिवसीय अग्नि तपस्या कर रही हैं. उनकी यह तपस्या 25 मई तक चलेगी. 

इस साधना के दौरान योगिनी प्रतिदिन लगभग 3:15 घंटे तक धड़कती अग्नि के बीच बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप कर रही है. तपस्या के साथ प्रतिदिन हवन पूजन और आरती का आयोजन भी किया जाता है. 25 मई को साधना की पूर्ण आहुति के साथ संत भंडारे का आयोजन होगा. यह तपस्या वो अपने गुरु बाल योगी दीपक नाथ रमते राम के सानिध्य में कर रही हैं. अन्नपूर्णा नाथ की यह पहली अग्नि तपस्या है. जबकि उनके गुरु पहले भी चार बार ऐसी अग्नि तपस्या कर चुके हैं.

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धीरे-धीरे बढ़ाई जा रहे आग के कंडे

प्रतिदिन विधि विधान से यह तपस्या शुरू होती है. यह साधना अन्य साधनों की तुलना में कठिन होती है. दोनों गुरु और शिष्य साधना शुरू करने से पहले भस्म लेप करते हैं और उसके बाद सुबह 11 से दोपहर 2:15 तक अग्नि की धूनियो के बीच योग मुद्रा में बैठते हैं. धुनियों को गोबर के कंडो से प्रज्वलित किया जाता है. इसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है. अंतिम दिन 108 कंडो का प्रयोग किया जाएगा. रूस की महिला की साधना राजस्थान व देश ही नहीं अब विदेशों में चर्चा का विषय बनी हुई है.

महिला को देखने में उनका आशीर्वाद लेने के लिए लोग दूर-दूर से पुष्कर आने लगे हैं. 17 साल पहले भारत आई अन्नपूर्णा ने भारतीय संस्कृति योग और सनातन परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से बदल लिया. 10 साल पहले उन्होंने नाथ संप्रदाय के योगियों से दीक्षा ली और सांसारिक जीवन त्याग कर साधना का मार्ग अपना लिया. अब उनका जीवन पूरी तरह से शिव भक्ति योग और सेवा को समर्पित है. फिलहाल उनके पास रूसी नागरिकता है और वो टूरिस्ट वीजा पर भारत में रहती हैं.

35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुकी है महिला

इस कठिन तपस्या के दौरान उनके पैरों में सूजन आ गई है. उन्होंने हाल ही में नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन किए थे और इसके अलावा वो इस समय 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर हैं. अब तक 35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं. हालांकि पाकिस्तान , बांग्लादेश और श्रीलंका में स्थित कुछ शक्तिपीठ में अभी वो नहीं पहुंच सकी हैं. लेकिन उनकी तपस्या और उनकी भावना की चर्चा अब देश ही नहीं विदेशों में होने लगी है और सोशल मीडिया पर वो तेजी से वायरल हो रही हैं. उनकी तपस्या के वीडियो तेजी से लोग शेयर कर रहे हैं.

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