राजस्थान के जयपुर में सेप्टिक टैंक में दम घुटने से चार मजदूरों की अकाल मौत हो गई. वही उन्हें बचाने आए दो मजदूर भी अचेत हो गए. उनकी भी हालात गंभीर बनी हुई है. घटना से पहले मजदूरों ने तेज गर्मी के चलते केमिकल युक्त पानी से जहरीली गैस फैलने का अंदेशा जताते हुए टैंक में उतरने से मना कर दिया था लेकिन उन पर दबाव बनाया गया. तब मजदूर सफाई के लिए सेप्टिक टैंक में तो उतरे लेकिन वापस जिंदा नहीं लौटे.
घटना सीतापुरा के जी-ब्लॉक स्थित अचल ज्वेलर्स की है, जहां सोमवार रात करीब 8 बजे मजदूर अमित और रोहित सबसे पहले टैंक में उतरे. कुछ देर बाद दोनों को बेहोशी छाने लगी तो वे चिल्लाने लगे. उन्हें बचाने के लिए मजदूर संजीव और मुकेश सहित 2 अन्य मजदूर उतरे लेकिन एक-एक कर सभी बेहोश हो गए, जिन्हें महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया. वहां चिकित्सकों ने 4 मजदूरों को मृत घोषित कर दिया. वही 2 मजदूरों का इलाज जारी है. घटना के एक घंटे बाद पुलिस को सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और एफएसएल की मदद से सबूत जुटाए.
चाकसू एसीपी सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि अचल ज्वैल्स में रिफाइन का काम करने वाले मजदूर ठेकेदार के जरिए लगे हुए थे.जहां फैक्ट्री में बनने वाली ज्वैलरी की सफाई का केमिकल युक्त पानी फैक्ट्री के टैंक में जमा होता है, जिसकी सफाई के लिए मजदूर सेप्टिक टैंक में उतरे थे. घटना में संजीव पाल, हिमांशु सिंह, रोहित पाल और अर्पित यादव की मौत हो गई. वही अजय चौहान और राजपाल का इलाज जारी है, बाकि दो अन्य अमित पाल व सूरजपाल को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई.
दरअसल फैक्ट्री में कारीगर जब गहने बनाते हैं, तब कटिंग, स्टोन सेंटिंग और निर्माण प्रक्रिया के दौरान सोने-चांदी के कण निकलकर गिरते हैं. छोटे कारीगर कार्यस्थल के कचरे को बाहर नहीं फेंकते और फैक्ट्री में से निकले गंदे पानी को भी एक जगह जमा कर उससे भी सोने-चांदी के वेस्टेज को रिकवर करते हैं. बड़ी फैक्ट्रियों में आभूषण बनाने के दौरान निकले रसायन युक्त पानी जो सेप्टिक टैंक में जाता है, उसमें ठोस कचरे के साथ सोने-चांदी के कण मिले होते हैं, जो गाद के रूप में टैंक में जमा होता है. इसे समय-समय पर निकाल कर सोना-चांदी रिकवर किया जाता है और सोमवार को भी इसी के लिए मजदूरों को उतारा गया था लेकिन अचल ज्वैल्स मैनेजमेंट के लालच ने चार मजदूरों की जीवन लीला छीन ली.