'ऑपरेशन सिंदूर' में 9 आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले पूर्व सैनिकों ने मोदी सरकार की सराहना की. पूर्व सैनिकों ने कहा कि वे फिर से सीमा पर लड़ने को तैयार हैं.
1971 के युद्ध में हिस्सा ले चुके जैसलमेर के पूर्व सैनिक रामसिंह ने कहा, ''1971 में सरकार ने हमें हथियार दिए थे और हमने दुश्मन का मुकाबला किया. इस बार भी सरकार हथियार दे, हम तैयार हैं.''
श्रीगंगानगर के एक अन्य पूर्व सैनिक बलदेव सिंह ने बताया, ''1971 में सायरन बजते ही बत्तियां बंद कर बंकरों में चले जाते थे. पाकिस्तान ने हमारे इलाके में बमबारी की थी, लेकिन हम 100 किमी अंदर तक घुसे थे.''
सीमावर्ती गांवों में जोश चरम पर है. स्थानीय लोग और पूर्व सैनिक मानते हैं कि इस बार आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 1971 में सिविलियनों ने सेना के साथ मिलकर जीत दिलाई थी और अब भी वे किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार हैं.