NEET 2026 पेपर लीक मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. पूछताछ में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी मांगीलाल और दिनेश सिर्फ इस साल नहीं, बल्कि पहले भी नीट का पेपर लीक कर बेच चुके थे. जांच एजेंसियों को शक है कि यह कई सालों से चल रहा एक बड़ा संगठित नेटवर्क है, जिसमें कोचिंग माफिया, कई राज्यों के संपर्क और करोड़ों का खेल शामिल हो सकता है. अब सवाल यह है कि क्या हर साल इसी तरह नीट परीक्षा से पहले पेपर बाहर पहुंच रहा था?
सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी मांगीलाल और दिनेश से पूछताछ में सामने आया है कि वे पहले भी नीट परीक्षा के पेपर लीक कर अभ्यर्थियों तक पहुंचा चुके हैं. जांच में यह भी सामने आया कि बीते साल आयोजित नीट 2025 परीक्षा में बिवाल परिवार के पांच बच्चों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया गया था. इस खुलासे ने एजेंसियों को हैरान कर दिया है, क्योंकि इससे पता चलता है कि पेपर लीक का नेटवर्क लंबे समय से व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था.
मामले में एक और अहम नाम विकास बिवाल का सामने आया है, जो सवाई माधौपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस का स्टूडेंट बताया जा रहा है. वह मुख्य आरोपी मांगीलाल का बेटा है और जांच एजेंसियों के अनुसार, वह भी इस नेटवर्क में शामिल रहा था. आरोप है कि विकास बिवाल ने आगे से प्रश्नपत्र हासिल कर उन्हें बेचने के लिए करीब 65 लाख रुपये का भुगतान किया था. माना जा रहा है कि यह रकम नेटवर्क के ऊपरी स्तर तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की गई.
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जांच में हरियाणा के एक छात्र यश यादव का नाम भी सामने आया है. बताया गया कि यश सीकर में रहकर पढ़ाई कर रहा था. इसी दौरान मांगीलाल के परिवार के संपर्क में आया. एजेंसियों को शक है कि इसी संपर्क के माध्यम से कई छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाए गए. सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क का कनेक्शन महाराष्ट्र तक है. वहीं से पेपर लाने की व्यवस्था की जाती थी. अब जांच एजेंसियां इस पूरे इंटर-स्टेट नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं.
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों का काम नहीं, बल्कि इसके पीछे बड़ा कोचिंग माफिया सक्रिय है. पकड़े गए आरोपी नेटवर्क के सिर्फ एक हिस्से के तौर पर देखे जा रहे हैं. एजेंसियां अब सीकर के कई कोचिंग संस्थानों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं. माना जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोग पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को चला रहे थे, जबकि बिवाल परिवार जैसे लोग फ्रंटलाइन में काम कर रहे थे.
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सूत्रों का कहना है कि नीट 2026 पेपर लीक का मामला सामान्य लीक की घटना नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चल रही साजिश का हिस्सा हो सकता है. जांच में सामने आया है कि नेटवर्क के एक सदस्य ने तय भूमिका से हटकर काम किया, जिसके चलते पूरी साजिश उजागर हो गई. इसके अलावा सीकर के कोचिंग संस्थानों के बीच कंपटीशन ने भी इस मामले को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई.
बताया जा रहा है कि दिनेश के बेटे ऋषि के जरिए प्रश्नपत्र बांटे जाने से पूरे नेटवर्क की पोल खुल गई. सूत्रों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में एक संस्थान ने एक पीजी संचालक के साथ मिलकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को शिकायत भेजी थी. इसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे पेपर लीक का यह जाल खुलता चला गया.
पिछले साल 4 बच्चों का चयन, इस साल भी एक ने दी परीक्षा
पेपर लीक मामले में जयपुर के जमवारामगढ़ का बिवाल परिवार जांच एजेंसियों के केंद्र में है. पूछताछ में सामने आया है कि मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल का नाम सिर्फ इस साल के कथित लीक से नहीं, बल्कि पिछले वर्षों से जुड़े नेटवर्क से भी जुड़ रहा है. 2025 में इसी परिवार के चार बच्चों का नीट में चयन हुआ था, जबकि इस साल परिवार के एक और सदस्य ने परीक्षा दी.
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दिनेश बिवाल ने अपने बेटे के लिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये देकर पेपर खरीदा था, लेकिन परीक्षा में वह बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सका. टेलीग्राम पीडीएफ, वॉट्सएप चैट, सीकर के एक फ्लैट और 150 से अधिक संदिग्ध छात्रों के कनेक्शन ने इस मामले को एक नेटवर्क में खड़ा कर दिया है.
फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल थे, किन छात्रों को प्रश्नपत्र बेचे गए और इस पूरे खेल से किसे आर्थिक फायदा पहुंच रहा था. मामले के सामने आने के बाद राजस्थान सहित कई राज्यों में हड़कंप मचा हुआ है.