जयपुर पुलिस ने एक ऐसे ठग का पर्दाफाश किया है, जिसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है. जो शख्स कुछ समय पहले तक गाय और भैंसों की देखरेख करता था और दूध बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाता था, वही अब पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को स्पेशल टीम का थानेदार बताने लगा. खाकी वर्दी का रौब, सख्त आवाज और आत्मविश्वास भरी चाल के दम पर वह बेरोजगार युवाओं को नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये ठग चुका था.
यह मामला जयपुर के सिंधी कैंप इलाके से सामने आया, जहां पुलिस ने इस फर्जी थानेदार को रंगे हाथों पकड़ लिया. आरोपी की पहचान जितेन्द्र कुमार शर्मा उर्फ रमन शर्मा के रूप में हुई है. वह करौली जिले के टोडाभीम का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से जयपुर में रहकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था.
दूध बेचने वाले से फर्जी थानेदार बनने तक की कहानी
सिंधी कैंप थाने के थानेदार माधोसिंह ने बताया कि पुलिस को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं. इन शिकायतों में बताया गया था कि रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों में एक व्यक्ति खुद को पुलिस की स्पेशल टीम का थानेदार बताकर घूम रहा है. वह लोगों से नौकरी लगवाने, सरकारी विभागों में भर्ती कराने और कुछ मामलों में केस से नाम हटवाने का भरोसा दिलाता था.
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने आरोपी पर नजर रखना शुरू किया. संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और सही मौके पर उसे पकड़ लिया. जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसकी बातें और हावभाव संदेह को और पुख्ता करने लगे. इसके बाद उसकी तलाशी ली गई.
स्पेशल टीम का अधिकारी बनकर युवाओं को फंसाता था आरोपी
तलाशी के दौरान पुलिस को जो सामान मिला, उसने सभी को चौंका दिया. आरोपी के पास से कांस्टेबल रैंक का फर्जी पुलिस पहचान पत्र बरामद हुआ. इसके अलावा सब इंस्पेक्टर की वर्दी, पुलिस कैप, बेल्ट और ठगी से जुड़े कई दस्तावेज भी मिले. इन सभी चीजों से साफ हो गया कि आरोपी पूरी तैयारी के साथ लोगों को गुमराह कर रहा था.
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी का मुख्य निशाना वे बेरोजगार युवक होते थे, जो नौकरी की तलाश में जयपुर आते थे. खासतौर पर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे इलाकों में वह आसानी से ऐसे युवाओं को पहचान लेता था. खुद को पुलिस की स्पेशल टीम का अधिकारी बताकर वह पहले उनका भरोसा जीतता था. इसके बाद वह सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देता था.
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड बने ठगी की शिकायतकर्ता
आरोपी युवाओं को पुलिस विभाग और वन विभाग में भर्ती का झांसा देता था. एक युवक को उसने वनपाल की नौकरी लगाने का भरोसा दिलाया था. पुलिस की वर्दी और थानेदार होने के दावे ने युवक को पूरी तरह विश्वास में ले लिया. इसी भरोसे के चलते युवक ने आरोपी को लाखों रुपये एडवांस दे दिए. समय बीतने के बाद भी जब न तो नौकरी मिली और न ही पैसे वापस हुए, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ.
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि जितेन्द्र शर्मा बेहद शातिर तरीके से ठगी करता था. वह अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग लोगों से संपर्क करता था और कैश लेने के बाद गायब हो जाता था. उसका असली पेशा दूध की डेयरी चलाना था. वह गाय और भैंस खरीद-बेचकर जीवन यापन करता था. लेकिन जल्दी अमीर बनने की चाहत ने उसे अपराध की राह पर धकेल दिया.
तलाशी में फर्जी आईडी, वर्दी और ठगी के दस्तावेज बरामद
आरोपी ने बाजार से पुलिस की वर्दी और उससे जुड़ा सामान खरीदा और खाकी की इज्जत को अपना हथियार बना लिया. फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी से कितनी रकम वसूली. मामले की जांच जारी है.