सोना, चांदी, शराब और गांजे की तस्करी तो आपने कई बार देखी होगी, लेकिन चम्बल की बजरी की तस्करी का यह तरीका हर किसी को चौंकाने वाला है. राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से गुजरने वाली चम्बल नदी क्षेत्र में प्रतिबंधित बजरी को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए तस्कर बेहद शातिर तरीके अपना रहे थे. ट्रक और डंपरों में चम्बल बजरी भरकर उनकी बॉडी को पूरी तरह तिरपाल से पैक कर दिया जाता था. कई मामलों में बजरी के ऊपर गिट्टी या डस्ट डाल दी जाती थी, ताकि देखने में गाड़ी सामान्य माल से भरी लगे.
इतना ही नहीं, बजरी से भरे वाहनों के आगे एस्कॉर्ट गाड़ियां भी चलाई जा रही थीं. अगर रास्ते में पुलिस की चेकिंग दिखती, तो एस्कॉर्ट गाड़ी चालक पीछे से आ रही बजरी वाली गाड़ियों को रोक देता था. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा आज तक चैनल की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद हुआ, जिसके बाद धौलपुर पुलिस एक्शन मोड में नजर आई.
बजरी की तस्करी का हैरान कर देने वाला तरीका
एसपी विकास सांगवान के निर्देश पर एनएच-44 पर सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने वाच टॉवर बनवाया गया और दोनों ओर बड़े पत्थर के बोल्डर लगाए गए. चम्बल नदी के तटवर्ती गांव भूरा खेड़ा की मुख्य सड़क पर अस्थायी पुलिस चौकी बनाई गई, जहां एक एएसआई और चार आरएसी जवान हथियारों के साथ तैनात किए गए. इसी रास्ते से रोजाना सौ से अधिक बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियां निकलती थीं, जिस पर अब रोक लग गई है.
पुलिस की सख्ती के बावजूद बजरी माफिया नए नए तरीके अपना रहे थे. नंबर प्लेट बदलना, तिरपाल से ढकना और ऊपर डस्ट डालकर ले जाना आम हो गया था. हालांकि पुलिस की सतर्क नजरों से यह बच नहीं सका. अब तक आधा दर्जन ट्रक डंपर और करीब दो दर्जन वाहन जब्त किए जा चुके हैं.
बजरी माफियाओं का आतंक
बता दें, 8 जनवरी की रात सरमथुरा के झिरी गांव में बजरी माफियाओं ने वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को ट्रैक्टर ट्रॉली से कुचल दिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई थी. इस घटना के बाद पुलिस और ज्यादा सख्त हुई है. एसपी विकास सांगवान ने साफ कहा है कि अवैध खनन और बजरी तस्करी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी.