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पिछली बार घर के 5 बच्चों का MBBS में एक साथ सिलेक्शन, इस बार बेटे के लिए 10 लाख में खरीदा NEET का पेपर

राजस्थान के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में अब परिवार और कोचिंग नेटवर्क की परतें खुलती नजर आ रही हैं. पिछले साल जिस परिवार के कई बच्चों का MBBS में चयन हुआ था, उसी परिवार के सदस्यों पर इस बार पेपर खरीदने और आगे बेचने के आरोप लगे हैं. CBI और SOG की जांच में जयपुर, सीकर, गुरुग्राम और महाराष्ट्र कनेक्शन सामने आने के बाद शिक्षा माफिया में हड़कंप मचा है.

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दिनेश बिवाल से इस रैकेट का खुलासा होने की संभावला है (Photo: ITG)
दिनेश बिवाल से इस रैकेट का खुलासा होने की संभावला है (Photo: ITG)

राजस्थान से सामने आया NEET पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे खुलासे हो रहे हैं जिन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस परिवार के पांच बच्चों का पिछले साल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS के लिए चयन हुआ था, अब उसी परिवार के लोग इस बार पेपर खरीदकर अपने बेटे को परीक्षा पास कराने के आरोप में जांच एजेंसियों के रडार पर हैं.

सीबीआई और राजस्थान एसओजी की जांच में सामने आया है कि जमवारामगढ़ का बिवाल परिवार पिछले कई सालों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है. यही वजह है कि अब जांच सिर्फ इस साल के पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पिछले वर्षों के चयन और नेटवर्क को भी खंगाला जा रहा है.

5 बच्चों के MBBS चयन के बाद बढ़ा था परिवार का नाम

6 नवंबर 2025 की एक सोशल मीडिया पोस्ट अब जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सुराग बन गई है. इस पोस्ट में आरोपी दिनेश बिवाल अपने परिवार के पांच बच्चों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयन होने पर खुशी जाहिर कर रहा था. पोस्ट में परिवार के बच्चों को डॉक्टर बनने पर बधाई दी गई थी. उस समय इलाके में इस परिवार की काफी चर्चा हुई थी. लोग इसे मेहनत और सफलता की कहानी बता रहे थे. लेकिन अब वही पोस्ट जांच एजेंसियों के सामने नए सवाल खड़े कर रही है. एसओजी सूत्रों के मुताबिक परिवार के तीन लोग अब NEET 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं. इनमें मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और MBBS छात्र विकास बिवाल शामिल हैं. तीनों को सीबीआई दिल्ली लेकर गई है.

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बेटे के लिए खरीदा गया था पेपर

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस बार दिनेश बिवाल का बेटा ऋषि बिवाल NEET परीक्षा दे रहा था. आरोप है कि उसके लिए करीब 30 लाख रुपये में पेपर खरीदा गया. सूत्रों के अनुसार गुरुग्राम से पेपर लाया गया था. बाद में यही पेपर सीकर में दूसरे छात्रों तक पहुंचाया गया. जांच में सामने आया है कि ऋषि बिवाल कथित तौर पर दूसरे छात्रों को भी 10-10 लाख रुपये में पेपर बेचने लगा था. बताया जा रहा है कि एसओजी की भनक लगते ही ऋषि फरार हो गया. फिलहाल उसकी तलाश की जा रही है.

राजस्थान के 150 छात्रों की सूची जांच एजेंसियों के पास

सूत्रों के मुताबिक राजस्थान के करीब 150 ऐसे छात्रों की सूची एसओजी ने सीबीआई को सौंपी है, जिन पर पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े होने का शक है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर प्रश्नपत्र किन-किन छात्रों तक पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे. इसी मामले में देहरादून से पकड़े गए सीकर के काउंसिलर राकेश कुमार मंडवारिया का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि वह टेलीग्राम के जरिए छात्रों को कथित “गेस पेपर” के नाम पर अभ्यास करवा रहा था. सूत्रों के मुताबिक उसके टेलीग्राम चैनल से करीब 700 छात्र जुड़े हुए थे. हालांकि उसकी गिरफ्तारी को लेकर अभी आधिकारिक स्थिति साफ नहीं की गई है.

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मेडिकल कॉलेजों में चयनित हुए थे परिवार के बच्चे

जांच में सामने आया है कि पिछले साल परिवार के कई बच्चों का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयन हुआ था. मांगीलाल बिवाल के बेटे विकास बिवाल को सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला था, जबकि बेटी प्रगति को दौसा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला. वहीं दूसरे भाई घनश्याम बिवाल की बेटी पलक का चयन जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में हुआ था. दूसरी बेटी सानिया को मुंबई के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला. अब जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या इन चयन प्रक्रियाओं में भी किसी नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं.

मामले में सीकर की चर्चित CLC कोचिंग का नाम भी सामने आया है. CLC के डायरेक्टर श्रवण चौधरी ने कहा कि संबंधित छात्रों ने सिर्फ टेस्ट सीरीज जॉइन की थी. उन्होंने बताया कि MBBS में चयन के बाद संस्थान ने कई बार छात्रों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा कि इस बार परीक्षा दे रहा ऋषि बिवाल पहले संस्थान में पढ़ता था, लेकिन बाद में उसने नाम कटवा लिया था.

दिल्ली ले जाए गए पांच आरोपी

सीबीआई अब इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क से जोड़कर देख रही है. इसी वजह से पांच प्रमुख आरोपियों को दिल्ली ले जाया गया है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ राजस्थान तक सीमित गिरोह नहीं है, बल्कि कई राज्यों में फैला पुराना नेटवर्क हो सकता है. सीबीआई और एसओजी को शक है कि इस बार पेपर लीक का मुख्य कनेक्शन महाराष्ट्र और बिहार नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है. सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को शक है कि NEET पेपर की हार्ड कॉपी पुणे से बाहर निकाली गई. इसी वजह से महाराष्ट्र नेटवर्क की अलग से जांच की जा रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर परीक्षा से पहले पेपर बाहर कैसे आया. सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां NTA के कुछ सिस्टम और अंदरूनी सूचनाओं की भी पड़ताल कर रही हैं.

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पुराना नेटवर्क अब भी एक्टिव

सीबीआई और एसओजी का मानना है कि यह वही पुराना नेटवर्क हो सकता है, जिसकी चर्चा पिछले साल बिहार पेपर लीक मामले में हुई थी. जांच एजेंसियों को शक है कि पटना गैंग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था और उसी नेटवर्क के कुछ लोग अब भी सक्रिय हैं. यही वजह है कि इस बार जांच सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रखी जा रही, बल्कि पुराने मामलों को भी दोबारा खंगाला जा रहा है. देर शाम हिरासत में लिए गए आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जयपुर में न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार शर्मा के आवास पर पेश किया गया. सीबीआई की टीम आरोपियों को सीधे एसओजी मुख्यालय से गांधीनगर इलाके में लेकर पहुंची. इस दौरान सभी आरोपी मीडिया कैमरों से बचते नजर आए. जांच एजेंसियों के मुताबिक जयपुर से तीन आरोपी पकड़े गए हैं, जबकि एक आरोपी गुरुग्राम और एक नासिक से गिरफ्तार हुआ.

कोचिंग नेटवर्क भी जांच के घेरे में

सीकर लंबे समय से देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है. ऐसे में जांच एजेंसियों की नजर अब कोचिंग नेटवर्क पर भी है. सूत्रों के मुताबिक कुछ एजेंट और कोचिंग से जुड़े लोग छात्रों तक पेपर पहुंचाने की कड़ी हो सकते हैं. हालांकि अभी तक किसी बड़े कोचिंग संस्थान की आधिकारिक भूमिका सामने नहीं आई है, लेकिन एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही हैं.

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राज्यपाल ने भी जताई चिंता

इस पूरे मामले पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का बयान भी चर्चा में आ गया है. कोटा में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अगर समाज में नैतिकता होती तो NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा का पेपर लीक नहीं होता. उन्होंने कहा कि रामराज्य का मतलब सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि न्याय और नैतिक मूल्यों वाला समाज है. राज्यपाल ने कहा कि आज देश में सबसे ज्यादा जरूरत नैतिकता और पारदर्शिता की है.

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