राजस्थान के धौलपुर जिले के कोतवाली थाना इलाके के घंटाघर रोड स्थित निजी श्रीओम हॉस्पिटल में शनिवार को डिलीवरी के बाद एक प्रसूता की मौत से हड़कंप मच गया. महिला की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल स्टाफ मौके से फरार हो गया, जिससे परिजनों का गुस्सा भड़क उठा. मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया.
सूचना मिलते ही पुलिस, सीएमओ और जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया. अधिकारियों ने परिजनों को शांत कराते हुए मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया. निरीक्षण के दौरान अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को जिला अस्पताल में शिफ्ट कराया गया और अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया.
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जानकारी के अनुसार, बाड़ी उपखंड के बिजौली गांव निवासी ओमप्रकाश कुशवाहा ने अपनी 36 वर्षीय पत्नी अंगूरी को 13 मई को इस निजी अस्पताल में भर्ती कराया था. 15 मई की रात डॉक्टर अनुराग सिंह और नताशा ने महिला का ऑपरेशन कर प्रसव कराया, जिसके बाद उसने बच्चे को जन्म दिया. शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
अस्पताल पर लापरवाही के आरोप और कार्रवाई
प्रसूता की मौत के बाद परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल पर डॉक्टरों की लापरवाही का आरोप लगाया. घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की और पूरे मामले की जानकारी ली. जांच में सामने आया कि संबंधित अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित किया जा रहा था.
इस पर जिला प्रशासन ने तत्काल अस्पताल को सीज करने के आदेश दिए. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी धर्म सिंह मीणा ने दस्तावेजों की जांच कर अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को एमसीएच अस्पताल में शिफ्ट कराया. पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया.
सीएमएचओ ने बताया कि प्रसूता का हीमोग्लोबिन करीब चार था और उसे खून भी चढ़ाया गया था. इसके बाद ऑपरेशन किया गया, लेकिन जांच में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है. अस्पताल का रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द किया जा चुका था और पहले भी इसके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है.
बिना रजिस्ट्रेशन अस्पतालों पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल चोरी-छिपे संचालित किया जा रहा था. अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल के खिलाफ पहले भी निहालगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी और पुलिस चालान कर चुकी है. इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी था, जिसे घोर लापरवाही माना गया है.
धौलपुर का आगरा जिले के पास होना भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है. आरोप है कि आगरा के डॉक्टर यहां किराए पर भवन लेकर बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चला रहे हैं. इन अस्पतालों में स्टाफ तैनात कर डॉक्टर सप्ताह में दो बार ही राउंड करने आते हैं और गंभीर मामलों में बुलाए जाते हैं.
जिले में मानकों को ताक पर रखकर निजी अस्पताल और पैथोलॉजी संचालित होने के आरोप भी सामने आए हैं. कई मामलों में मरीजों की मौत के बाद उन्हें आगरा रेफर कर दिया जाता है. प्रशासन ने मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही है.