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जहां आज भी रास रचाने आते हैं श्रीकृष्‍ण

जहां आज भी रास रचाने आते हैं श्रीकृष्‍ण

कहते हैं कि जब विज्ञान और तर्क की सीमा खत्म होती है, तब जन्म होता है आस्था और श्रद्धा का. शायद यही वजह है कि वृंदावन में लोग आज भी मानते हैं कि मुरलीधर कृष्ण द्वारिका से यहां राधा और गोपियों संग हर शाम रास रचाने आते हैं. वो जगह है निधिवन, जहां छिपा है महारास का रहस्य.

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