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कामचलाऊ सिस्टम के शिकार क्यों हो रहे बेरोजगार? देखें दस्तक

कामचलाऊ सिस्टम के शिकार क्यों हो रहे बेरोजगार? देखें दस्तक

देश में सर्वोच्च जांच एंजेंसी सीबीआई के पास अपना नियमित निदेशक 2 फरवरी के बाद से नहीं है. नियमित निदेशक की जगह सीबीआई की जिम्मेदारी पिछले 62 दिन से अंतरिम निदेशक के भरोसे चल रही है. इसी के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा है कि सीबीआई प्रमुख के पद पर किसी को यूं ही अंतरिम तौर पर रखकर काम कराने की व्यवस्था नहीं चल पाएगी. यानी एक ऐसी व्यवस्था जो सिर्फ काम चलाने के नाम पर चलाई जाती है. वहीं कॉलेज में पढ़ाई करके रोजगार पाने के सपने देखते युवा हों या प्राइमरी स्कूलों में भविष्य की नींव तैयार करते बच्चे, उन सभी को कामचलाऊ सिस्टम के भरोसे रुलाने का काम अलग अलग राज्यों में हो रहा है, क्योंकि कॉलेज में लेक्चरर के पद खाली खाली पड़े हैं और स्कूलों में शिक्षकों के. राजस्थान में पिछले आठ साल से कॉलेज में किसी लेक्चरर की नियुक्ति नहीं की गई है. आखिर सिस्टम रोजगार देने के नाम पर इतना क्यों स्लो है, देखें दस्तक.

Be it the youths who dream of getting employment after studying in college, or children in primary schools who are going to be the foundation of the future, all of them are dependent on the lethargic system which is crawling in different states of India. Even the CBI, the supreme investigating agency in the country, does not have its regular director since February 2. The responsibility of the CBI has been going on with the interim director for the last 62 days. In this episode of Dastak, we show you the reality of our lethargic system, watch the video.

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