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क्या चुनावी Corona भूलने वाली नेतागीरी का नतीजा है Nanded की हिंसा? देखें दस्तक

क्या चुनावी Corona भूलने वाली नेतागीरी का नतीजा है Nanded की हिंसा? देखें दस्तक

1 अप्रैल से देश में 45 साल के ज्यादा उम्र के नागरिकों को कोरोना की वैक्सीन लगेगी. आम आदमी के मुद्दे को वोट लेकर भुला देने वाले राजनीतिक संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन कब इजाद होगी. क्या कोरोना के संकट काल में नेताओं चुनावी लापरवाही आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोक देती है? वहीं बात उस इलाके की भी होगी, जहां पति की जिंदगी से ज्यादा कीमती महिलाएं पानी को मानती हैं. उत्तर प्रदेश में ऐसे 62 गांवों की कहानी जहां पानी के लिए पैर में फफोले झेलने पड़ते हैं. महाराष्ट्र का नांदेड़ उन जिलों में से एक है, जहां कोरोना के कारण हालात गंभीर हैं. इसीलिए 25 मार्च से 4 अप्रैल के लिए पूरी तरह लॉकडाउन लगाया गया. फिर होली मनाने के लिए नांदेड़ में क्यों तलवारें निकल पड़ीं? देखें दस्तक, रोहित सरदाना के साथ.

Assembly elections are being held in four states of India. The country is also facing the second wave of Coronavirus. However central and state government have imposed COVID restrictions everywhere to bring down the spike of corona cases. But it's the policymakers who are conducting mega rallies with thousands of people in election-bound states. In this episode of Dastak, we will try to find out that is the incident of Nanded is a result of selective regulation by politicians.

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