पश्चिम बंगाल में सत्ता बदल गई है, लेकिन चुनाव के मायने नहीं बदले. आज भी वहां चुनावी दौर का मतलब हमले, हत्या और और हिंसा ही है. और अब इसका शिकार बने हैं 41 साल के चंद्रनाथ रथ. उनका कसूर सिर्फ ये था कि वो शुभेंदु अधिकारी के पीए थे. चंद्रनाथ रथ ने भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर ममता बनर्जी की मौजूदगी में भी डटकर मोर्चा संभाला था. लेकिन बीती रात, कोलकाता से महज 21 किलोमीटर दूर मध्यग्राम में, बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार को घेरकर उन्हें गोलियों से भून दिया. हैरानी की बात ये है कि इस हत्या में जिस Glock पिस्टल का इस्तेमाल हुआ है वो एक ऐसी ऑस्ट्रिया मेड पिस्टल है जो भारत में बैन है और ये भारत के पंजाब में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये तस्करी से आती है. सवाल ये है कि बंगाल तक ये प्रतिबंधित हथियार कैसे पहुंचा? क्या बंगाल की राजनीतिक रंजिश में अब सीमा पार की साजिश भी शामिल हो चुकी है? आज आपको उस कड़वाहट की कहानी भी बताएंगे, जिसने ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी को 'दोस्त' से 'कट्टर दुश्मन' बना दिया. एक दौर था जब नंदीग्राम की ज़मीन पर ममता के लिए शुभेंदु ने अपना खून-पसीना बहाया था. लेकिन वक्त ऐसा बदला कि शुभेंदु ने ममता को उखाड़ फेंकने की कसम खा ली. और पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया. जिस ज़मीन पर कभी उन्होंने ममता का साम्राज्य खड़ा किया था, उसी ज़मीन पर आज वो टीएमसी के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गए.