अमेरिका ने ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया है. अमेरिका के चार बी-2 बम वर्षक विमानों ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 2000 पाउंड वजन वाले दर्जनों बंकर-बर्स्टर्स बम गिराए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड एक बयान में कहा, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत कार्रवाई के दौरान अमेरिका के तीन सैनिक मारे गए हैं, जबकि पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. कई अन्य कर्मियों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के बाद ड्यूटी पर लौटाया जा रहा है.' अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने बताया कि बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान जारी हैं और जवाबी कार्रवाई अब भी चल रही है. जिस वक्त अमेरिका और इज़रायल अयातुल्ला खामेनेई की मौत का जश्न मना रहे हैं, तब उसी दौरान दुनिया के कई देशों में खामेनेई की मौत का मातम भी मनाया जा रहा है और इसके ज़रिए दुनिया के 15 प्रतिशत शिया मुसलमानों की धार्मिक लामबंदी की जा रही है. खामेनेई की हत्या कराने के पीछे सऊदी अरब और उसके क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ हो सकता है, ये दावा Washington Post की एक नई रिपोर्ट में किया गया है. इसमें बताया गया है कि अमेरिका शुरुआत में ईरान पर हमला करने के पक्ष में नहीं था. इसका कारण ये था कि अमेरिका की खुफिया एजेंसियों को ऐसा लगता था कि अगले एक दशक के बाद भी ईरान अमेरिका के लिए खतरा बनने की सम्भावना नहीं रखता. ये बात राष्ट्रपति ट्रम्प को भी बताई गई थी. इसके अलावा International Atomic Energy Agency ने खुद अमेरिका को ये बताया था कि ऐसा कोई प्रमाण या सबूत मौजूद नहीं है, जिससे ये साबित हो सके कि ईरान पिछले साल हुए हवाई हमले के बाद फिर से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है.