इंडिया टुडे कॉन्क्लेव सिर्फ विचारों को आदान-प्रदान ही नहीं करता, बल्कि दो तीखे विचारों को आमने-सामने खड़ा करने का मौका भी देता है. शनिवार को ऐसा ही एक नजारा ट्रंप लॉयलिस्ट लॉरा लूमर के सेशन में देखने को मिला.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अमेरिका से हिस्सा लेने आईं लॉरा लूमर की दुनिया में पहचान ट्रंप लॉयलिस्ट के रूप में है. अमेरिका फर्स्ट और इस्लामिक टेरर पर उनके विचार बेबाक रहे. इतने कि वे इस्लाम को कैंसर तक कह गईं.
उनके भारत विरोधी ट्वीट भी चर्चा का हिस्सा बने. लेकिन कॉन्क्लेव में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लूमर को एक सवाल के जरिए टोकते हुए उनके विचारों को दो शब्दों में समेट दिया - ‘रेसिस्ट’ और ‘इस्लामोफोब’. पूरे सेशन में हर तीखे सवाल का बड़े ही बेबाक और धैर्य के साथ जवाब देती रहीं लॉरा ने यहां भी संयम बनाए रखा.
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लॉरा से कहा- ‘आप जिस तरह से कमला हैरिस के बारे में बात कर रही हैं, और यह बताना चाहती हैं कि अमेरिका को सिर्फ व्हाइट यूरोपियंस ने बनाया है, तो मेरी नजर में आपको खेद जताना चाहिए लेकिन आप साफतौर पर रेसिस्ट और इस्लामोफोब नजर आ रही हैं. और माफ कीजिए, मैं यह तब कह रहा हूं जब हमारे देश में मेहमान के लिए अतिथि देवो भव कहा जाता है.’
लॉरा ने राजदीप की कमेंट को पूरी गंभीरता से लिया और कहा कि फोबिया आमतौर पर ऐसे डर के लिए इस्तेमाल होता है जिसके पीछे तर्क न हो. लेकिन, मैं ऐसी आइडियोलॉजी के बारे में बात कर रही हूं जो स्पष्ट रूप से नॉन मुस्लिम को मारने के बारे में बात करती है. तो मैं भारत इसीलिए आई हूं कि मैं बता सकूं कि मैं अमेरिका में अपनी आवाज कैसे लोगों को इस खतरे को लेकर अलर्ट रहने के लिए यूज कर रही हूं. जो आपको भी कभी खत्म कर सकती है. और जो भी नॉन-मुस्लिम हैं, ईमानदारी से उन्हें इस बारे में डरना चाहिए. क्योंकि, वो आपके इस दुनिया से खात्मे की बात करते हैं. इसलिए, यदि आप सर्वाइव करना चाहते हैं तो इस आइडियोलॉजी से डरना परफेक्टली नॉर्मल होना चाहिए.
लॉरा और राजदीप के बीच हुए संवाद को लॉरा समर्थकों ने भी हाथोंहाथ लिया. ट्विटर कम्युनिटी Laura Unleashed द्वारा एक यूजर केशव महेश्वरी को पोस्ट शेयर किया गया. जो लॉरा की तरह ही खुद को ट्रंप समर्थक बताते हैं.
लॉरा के भारत आने से पहले ही उनकी डिलीट की जा चुकी पुरानी ट्विटर पोस्ट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे. जिसमें उन्होंने भारत विरोधी बातें कहीं थीं. कॉन्क्लेव में उन पोस्ट पर उन्होंने इतना ही कहा कि अपनी भारत-विरोधी बातों को लेकर वे माफी मांगती हैं. लेकिन, कमला हैरिस और H1B पासपोर्ट लेकर अमेरिका जाने वाले भारतीयों से जुड़े विचारों को लेकर वे शर्मिंदा नहीं हैं. कमला हैरिस ने चुनाव जीतने के लिए खुद को ब्लैक कहा, जो कि अमेरिका में मुद्दा भी बना. उन्हें स्पष्ट रहना चाहिए था कि वे भारतीय हैं या ब्लैक. जबकि, H1B पासपोर्ट लेकर अमेरिका जाने वालों के बारे में इतना कहूंगी कि मैं दोहरी लॉयल्टी के खिलाफ हूं. जैसे इल्हान उमर अमेरिका में रहती हैं, लेकिन अपने भाषणों में कहती हैं कि मेरी लॉयल्टी सोमालिया के प्रति है. लॉरा ने अपने सेशन में ज्यादा वक्त इस्लामिक कट्टरपंथ, शरिया, दुनिया में ऊंचे पदों पर बैठ रहे मुसलमानों के एजेंडे पर फोकस रखा.
सेशन के आखिर में एक स्पीच के जरिए लॉरा ने अपने विचारों को पूरी तरह समेटा. और यही कहा कि वे भारत-विरोधी अपने ट्वीट के लिए माफी मांगती हैं. लेकिन, कमला हैरिस और अमेरिका जाने वाले H1B भारतीयों के बारे में उनकी बातें ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी को आगे बढ़ाने वाली हैं. इसके बाद वे भारत ही नहीं, दुनिया में हुई आतंकी घटनाओं के पीछे इस्लामिक टेरर के सिलसिला को गिनाती चली गईं. यह प्रूव करने के लिए कि इस खतरे से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता.