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मुझे फैसले दिमाग से लेने चाहिए या दिल से?

दिल ने कभी कोई विचार या इरादा पैदा नहीं किया. दिल सिर्फ दो आवाज करता है - ‘लुब डुब।’ जब बात इसकी आती है कि आप क्या करना चाहते हैं, फैसला कैसे करें, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप स्पष्टता से सोचें. आपके जीवन के अंत में, अगर आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आप आज जो कर रहे हैं, उस पर क्या आपको गर्व होगा या आपको शर्मिंदगी होगी?

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दिल या दिमाग किसकी सुनें? पढ़ें सद्गुरु के विचार दिल या दिमाग किसकी सुनें? पढ़ें सद्गुरु के विचार

यह विचार कि कुछ चीजें दिल से आती हैं और कुछ चीजें दिमाग से आती हैं, अलंकारिक तरीका है. लेकिन दुर्भाग्य से, तमाम लोग इसे शाब्दिक रूप में ले रहे हैं.

एक ऐसा समय था जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में, मेडिकल समुदाय मानता था कि खून को लिवर पंप करता है क्योंकि लिवर दिल से कहीं ज्यादा जटिल अंग है. दिल एक साधारण पंप है. खून पंप करने और आपको जिंदा रखने के अलावा इसे और ज्यादा जिम्मेदारियां मत दीजिए.

दिल ने कभी कोई विचार या इरादा पैदा नहीं किया. जब आप किसी को देखते हैं, तो दिल तेजी से धड़क सकता है. आपको ज्यादा खून चाहिए, तो यह थोड़ा ज्यादा पंप कर रहा है. ऐसा तब भी होगा अगर आप दौड़कर सीढ़ियां चढ़ते हैं. तमाम लोगों के साथ डर भी वही चीज करता है. दिल कभी कुछ कहने की कोशिश नहीं कर रहा है; वह बस यह पक्का कर रहा है कि शरीर का हर अंग खून के संचार का पोषण प्राप्त करे. तो, यह आपका दिमाग है, जो विभिन्न जुबानों में बोल रहा है. दिल सिर्फ दो आवाज करता है - ‘लुब डुब।’ बाकी का शोर पूरा आपके सिर से आ रहा है.

हो सकता है कि आप सोचें कि दिल कह रहा है या दिमाग कह रहा है. मुख्यतया, विचार होता है और भावना होती है. लोग सोचते हैं कि ये दोनों अलग-अलग बातें कह रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. जैसा आप सोचते हैं, वैसी ही भावना आपमें आती है. अभी, अगर मैं सोचूं, ‘अरे, वह धरती पर सबसे शानदार इंसान है,’तब उसके प्रति मेरी भावनाएं मधुर बन जाती हैं. 

अगर मैं सोचूं, ‘वह धरती पर सबसे घटिया जीव है,’तब मेरी भावनाएं बुरी बन जाती हैं. कोई इंसान घटिया है, ऐसा सोचकर मैं उसके प्रति माधुर भावनाएं नहीं रख सकता. और न ही मैं किसी इंसान को शानदार मानकर उसके प्रति खराब भावनाएं रख सकता हूं. लेकिन मान लीजिए, आप सोचते हैं कि वह सबसे शानदार इंसान है और आपकी मधुरता बह रही है. तब अचानक, कल वह कुछ ऐसा करती है, जो आपको पसंद नहीं है; आप सोचेंगे कि वह घटिया इंसान है. 

विचार चपल होता है. वह अपनी दिशा यूं ही बदल देता है. भावना थोड़ी मंथर होती है, इसे पलटने में समय लगता है. उस दौरान, आप संघर्ष करते हैं क्योंकि विचार एक चीज कह रहा है, लेकिन भावना अभी भी मधुर है. भावना को अप्रिय बनने में समय लगता है, लेकिन वह कुछ समय बाद साथ आ जाती है, शायद एक सप्ताह, दस दिन, या दो महीने के बाद, यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं. तो वो अलग भाषाएं नहीं बोल रहे हैं- एक चपल है, दूसरा थोड़ा सुस्त है.

जब बात इसकी आती है कि आप क्या करना चाहते हैं, फैसला कैसे करें, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप स्पष्टता से सोचें. स्पष्टता से सोचने का मतलब है- सवाल यह नहीं होना चाहिए, ‘किससे मुझे यह मिलेगा, किससे मुझे वह मिलेगा?’ इसे होना चाहिए, ‘क्या मेरा जीवन मेरे लिए कीमती है?’ 

इससे पहले कि आप अपना जीवन किसी चीज में निवेश करें, आपको खुद से पूछना चाहिए, ‘अगर मैं अपना जीवन इसमें निवेश करता हूं, तो पच्चीस साल के बाद, पचास साल के बाद, क्या तब भी मेरे लिए इसके बहुत मायने होंगे?’

आपके जीवन के अंत में, अगर आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आप आज जो कर रहे हैं, उस पर क्या आपको गर्व होगा या आपको शर्मिंदगी होगी? इससे फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे क्या कहते हैं, लेकिन आपको कुछ ऐसा नहीं करना चाहिए, जिससे आप शर्म महसूस करें. अगर आप कुछ ऐसा करते हैं, जिससे आप शर्म महसूस करेंगे, तब आप खुद के खिलाफ जा रहे हैं. अगर कोई चीज आपके खिलाफ जाती है, तो आप उन्हें छोड़कर कहीं और जा सकते हैं. अगर आप खुद के खिलाफ हो जाते हैं, तो आपको हमेशा उसके साथ जीना होगा.

किसी चीज से आपको पैसा मिलेगा, किसी चीज से आपको सुख-सुविधा मिलेगी - बात वो नहीं है. आप जो करना चुनते हैं, क्या वह आपको जीवन देता है या आप बस जीवन चलाते हैं? यही महत्वपूर्ण है. जीवन चलाना कोई मुद्दा नहीं है. एक कीड़ा, कीट, चिड़िया, जानवर सभी जीवन चला रहे हैं. तो, इतने बड़े मस्तिष्क के साथ जीवन चलाना मुद्दा नहीं है. एकमात्र समस्या है कि आप किसी दूसरे की तरह जीना चाहते हैं. यह एक अंतहीन समस्या है.

इससे पहले कि आप अपने जीवन में बड़े निर्णय लें, आप अपने साथियों, शिक्षकों, माता-पिता के - हर किसी के दबाव से खुद को अलग करें. खुद के साथ तीन दिन से एक सप्ताह तक अकेले बिताएं और इस पर गौर करें कि वह क्या है जो आप वाकई करना चाहते हैं, और बस वहीं करें!

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