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एमपी पुलिस ने मान ली 'मूंछ' की महिमा....और बच गया राणा का 'रौब'

हिंदुस्तान के साथ ही दुनियाभर में मूंछों को आन बान शान से जोड़ा जाता रहा है. मूंछें हमेशा मर्दों की पहचान रही हैं. बीते दिनों मध्य प्रदेश में मूंछों की वजह से एक पुलिस कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया तो खबर सुर्खियों में आ गई. मामला मूंछों का था तो हवा और तेज हो गई. अंतत: कांस्टेबल को बहाल कर दिया गया.

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पुलिस कांस्टेबल राकेश राणा, जिन्हें कर दिया गया था सस्पेंड. पुलिस कांस्टेबल राकेश राणा, जिन्हें कर दिया गया था सस्पेंड.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एमपी पुलिस का कांस्टेबल मूंछों के चलते सस्पेंड
  • मूंछें रही हैं आन-बान और शान की प्रतीक

मूंछ (Mustache) नहीं तो कुछ नहीं, मूंछ की पूछ बाकी छूंछ, मूंछ का बाल, मूंछें मुड़ाना, मूंछों पर ताव देना, मूंछों की लड़ाई. हिंदी के ये सारे मुहावरे सिर्फ इसलिए गढ़े गए, क्योंकि मूंछों का एक विस्तारिक महत्व है. हर मुहावरे के पीछे एक कहानी है. देशज समाज का खुला आकाश है मूंछ. कहीं इसे आन बान और शान का प्रतीक माना जाता है तो कहीं रौब गालिब करने में मूंछों का बड़ा योगदान होता है.

जो सम्मान मूंछों को मिला वो किसी और को कहां

पुरुषों के शरीर में वैसे तो अलग अलग जगह बाल आते हैं, मगर जो सम्मान मूंछों को मिला हुआ है वो किसी और को कहां नसीब हुआ है. अक्सर आपने सुना होगा कि अमुक बात सुनकर फलाने की बांछें खिल गईं, तो बांछें अगर कहीं होती होंगी तो यकीनन वो मूंछों का ही अनगढ़ रूप होंगी. मतलब मूंछों को ही बांछें कह दिया गया हो तो इसे अतिशयोक्ति न समझा जाए.

हमने फिल्मों में देखा है या कहानियों में पढ़ा है कि ठाकुर साहब ने कह दिया कि उनकी मूंछ के बराबर भी सामने वाला नहीं है, या मूंछों पर ताव देकर जमींदार ने अपनी खुद्दारी का लोहा मनवा दिया, या लाला के पास मूंछ गिरवीं रखवा के क्या हासिल हुआ. मतलब मूंछ तब आपके चरित्र की परिचायक थी.

मूंछ के लिए मामा के राज में सस्पेंड हुआ कांस्टेबल

मूंछों की महिमा का जिक्र यहां इसलिए क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस के एक कांस्टेबल राकेश राणा बड़ी शानदार मूंछ रखते हैं. उनके अधिकारी ने उनसे मूंछ कटवाने के लिए कहा, मगर राकेश राणा ने ये कहकर मूंछ कटाने से इनकार कर दिया कि वो राजपूत हैं. और ये उनकी शान के खिलाफ है. उन्होंने अधिकारी की बात नहीं मानी. अब अधिकारी तो ठहरा अधिकारी, उसने राकेश राणा को सस्पेंड कर दिया. अब मूंछ के लिए मामा के राज में कांस्टेबल सस्पेंड हुआ तो खबरनवीसों ने खबरें बनाईं.

यह भी पढ़ें: MP: लंबी मूंछ रखने पर हुए थे निलंबित, PHQ ने कांस्टेबल को फिर किया बहाल

मूंछ के नाम पर ट्विटर वाली चिड़िया उड़ी तो और खबरें छपीं. मध्य प्रदेश पुलिस को इससे मूंछ का महत्व समझ आ गया. जब मूंछ का महत्व समझ आया तो पुलिस मुख्यालय ने राकेश राणा का सस्पेंशन रद्द कर दिया.

काफी डिमांड में रही थी वर्धमान कट मूंछ

यूं समझिए कि उत्तर प्रदेश के मौजूदा एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार अगर मामा के मध्य प्रदेश में नियुक्त होते तो बहुत संभव था कि उनकी भी दिक्कत बढ़ जाती. बाहरहाल आपको वीर अभिनंदन वर्धमान याद होंगे, वो पाकिस्तान से लौटे तो उनकी वीरता के साथ साथ उनकी मूंछ की बहुत चर्चा हुई. वर्धमान कट मूंछ काफी डिमांड में रही. सेना में जाने वाले युवाओं को वैसी ही मूंछ के साथ देखा गया. केशकर्तकों ने अपनी दुकानों की दीवारें वर्धमान कट मूंछों वाले पोस्टरों से पाट दीं.

चार्ली चैपलिन के अभिनय के साथ ही मूंछों का भी महत्व

आगे बढ़िए, और देखिए. चार्ली चैपलिन को देखते ही आपके भीतर गुदगुदी का संचार होता है. एक आदमी बगैर कुछ बोले आपको इतना हंसा देता है कि आपका दिन बन जाता है. मगर चार्ली के अभिनय के साथ ही चार्ली की मूंछ को भी आप कभी भूल सकते हैं क्या? दक्षिण भारत का कुख्यात चंदन तस्कर, कूज मुनिस्वामी वीरप्पन अपने अपराध के लिए जिस हद तक बदनाम था, अपनी मूंछ के लिए उससे कहीं ज्यादा चर्चित था. बड़ी मूंछें रखने वालों को अक्सर कहा जाता था कि वीरप्पन कट मूंछ रखे हुए हैं. रूप चंद्र शास्त्री ऐसे ही नहीं कहते हैं कि..
आभूषण है बदन का 
रखो मूंछ संवार 
बिना मूंछ के मर्द का 
जीवन है बेकार...
 
वैसे शास्त्री जी को मालूम होना चाहिए कि आज की तारीख में मूंछें तो विलुप्त होने वाली शै बनकर रह गई हैं. हां ये अलग बात है कि वीरता के लिए विख्यात राजपूत राजाओं के काल में मूंछों पर जमकर ताव दिया गया, तब के कवि लिखते थे...
जाहि प्रान प्रिया लागिन सौ बैठेलिज धाम
जो काया पर मूंछ, वाई सो कर हैं संग्राम
मतलब मूंछ है तो मान के चलिए विजय आपकी...

'पुलिस को मूंछें रखने के लिए दिया जाता है भत्ता'

राजपूतों में खासकर मूंछों की अपनी महिमा है, और मध्य प्रदेश के राकेश राणा भी राजपूत हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के जिन अधिकारियों ने राकेश राणा को मूंछ हटाने के लिए कहा वो पता नहीं कितना जानते हैं. मगर हमारे ही देश के कई राज्यों में पुलिस को मूंछें रखने के लिए भत्ता दिया जाता है, और उत्तर प्रदेश में तो 2019 में मूंछों के लिए भत्ते को बढ़ाने की अर्जी लगाई गई थी. पुलिस के अधिकारियों ने ही माना था कि पुलिस वालों की मूंछ से कानून का रौब ज्यादा पड़ता है. इसलिए मूंछ के लिए मिलने वाला भत्ता 50 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पुलिसकर्मियों को मूंछ रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

'भगत सिंह टाइप मूंछ आज भी फेमस' 

फिल्मों में भी राउडी राठौड़, सिंघम, दबंग और सिंबा टाइप के पुलिसवाले कड़क मूंछ रखते हैं. माना जाता है कि पुलिसवालों की पर्सनैलिटी में मूंछ चार चांद लगा देती है. इसीलिए हर दौर में मूंछों के अलग अलग प्रकार रहे हैं. भगत सिंह टाइप मूंछ आज भी नौजवानों की फेवरेट है. चंद्रशेखर आजाद टाइप मूंछ भी कुछ क्रांतिकारी टाइप के लड़के रखते हैं. अभिनंदन वाली मूंछ के बारे में तो बात हो ही चुकी है. इसके अलावा भी कुछ गलमुच्छा रखते हैं. कुछ घुमावदार, कुछ ऐंठी हुई और कुछ बैठी हुई मूंछें भी प्रचलित हैं.

'मूंछें हों तो नत्थू लाल जैसी...'

मूंछों की महिमा पर बात चल निकली है तो याद कीजिए 1964 में आई प्रकाश मेहरा की फिल्म शराबी. इस फिल्म में तीन चीजों ने गजब की शोहरत हासिल की. अमिताभ बच्चन की अदाकारी ने लोगों का दिल जीता. मुझे नौलखा मंगा दे रे ओ सैंया दीवाने के दीवानों की लाइन लग गई और तीसरी और सबसे अहम चीज जिसे कभी नहीं बिसारा जा सकता, वो थी नत्थू लाल की मूंछ. तो भई मूंछें हों तो नत्थू लाल जैसी.

साल 2000 में नत्थूलाल गुजर गए, मगर उनकी मूंछ आज भी जिंदा है. तो सौ की सीधी बात ये रही कि मूंछ की अपनी एक मर्यादा है. मूंछ पर हाथ उठाने से पहले हजार दफा सोच लेना चाहिए कि ये मूंछ है, कोई पूंछ नहीं, जिसे आप बगैर सोचे समझे पकड़ लेंगे. अलबत्ता राकेश राणा को बधाई...मूंछ भी बची है, मूंछ का महत्व भी बचा है.

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