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पीएम मोदी का मिशन, दिल्ली और दिल की दूरी को मिटाना

प्रधानमंत्री ने न केवल सभी नेताओं को सुना, बल्कि बैठक के बाद उनमें से प्रत्येक के पास भी गए और उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी की. बैठक में केंद्र ने जो संदेश दिया, उसमें भविष्य में जम्मू-कश्मीर में विकास पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया गया.

पीएम मोदी की जम्मू-कश्मीर पर बैठक (तस्वीर- आजतक) पीएम मोदी की जम्मू-कश्मीर पर बैठक (तस्वीर- आजतक)

देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए वहां के 14 नेताओं के साथ एक अहम बैठक की. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के बाद यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली मीटिंग थी. 5 अगस्त 2019, आर्टिकल 370 हटने के बाद यह बैठक केंद्र और जम्मू-कश्मीर के नेताओं के बीच एक आइसब्रेक मीटिंग यानी कि आपस के मतभेदों को कम करने के लिए की गयी बैठक के रूप में देखी जा रही है. 

पिछले एक हफ्ते में इस बात की काफी आशंका थी कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का बंटवारा हो सकता है. लेकिन इसी बीच केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से संपर्क साधा और उनके मन की बात जान कर  आगे की रणनीति पर विचारों को साझा करने का मन बना लिया. दिल्ली में हुई मीटिंग में जम्मू-कश्मीर के 14 नेता शामिल हुए. जिनमें चार पूर्व मुख्यमंत्रियों और उप मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे. इस दौरान पीएम ने जम्मू-कश्मीर से आए नेताओं से कहा कि वो 'दिल की दूरी' और 'दिल्ली की दूरी' को ख़त्म करना चाहते हैं. 

इस बैठक का मुख्य केंद्र जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना था. बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि हम जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलतापूर्वक संपन्न हुए डीडीसी चुनाव की तरह ही विधानसभा चुनाव कराना हमारी प्राथमिकता है.
 



बैठक के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत, एक मेज पर अलग अलग लोगों के विचारों का आदान-प्रदान करने की क्षमता ही है. उन्होंने कहा कि मैंने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा है कि लोगों को, खासकर युवाओं को जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक नेतृत्व देना है और यह सुनिश्चित करना है कि उनकी आकांक्षाएं पूरी हों.

माना जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर, प्रधानमंत्री के दिल के बेहद करीब है. ऐसे में 5 अगस्त, 2019 की कार्रवाई न केवल बीजेपी के घोषणापत्र की पूर्ति थी, बल्कि एक निशान, एक विधान और एक प्रधान (एक झंडा, एक संविधान और एक प्रधान) इसकी मूल विचारधारा थी. दिल्ली में हुई बैठक का 'एक देश में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान होगा' सबटेक्स्ट ख़ास रहा. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 68वीं पुण्यतिथि पर उनके सपने का समर्थन भी किया.

इस बैठक से पहले, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने सीमाओं और भीतरी इलाकों में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों को सुरक्षित करने के लिए जमकर काम किया. ऐसी कई बैठकें हुईं जिनमें लेफ्टिनेंट गवर्नर और खुफिया एजेंसियों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों ने जमीनी स्थिति का आकलन किया. 
 



वहीं प्रधानमंत्री ने न केवल सभी नेताओं को सुना, बल्कि बैठक के बाद उनमें से प्रत्येक के पास भी गए और उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी की. बैठक में केंद्र ने जो संदेश दिया, उसमें भविष्य में जम्मू-कश्मीर में विकास पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया गया. केंद्र ने राजनीतिक दलों से परिसीमन प्रक्रिया में भाग लेने का आग्रह किया है और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने का आश्वासन दिया है. हालांकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला इस प्रक्रिया में आरक्षण के बारे में एकदम साफ़ थे.

पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला का कहना था कि अगर आर्टिकल 370 हटाने का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ना था तो परिसीमन केवल जम्मू-कश्मीर में ही क्यों किया जा रहा था. ऐसे में जहां एक तरफ घाटी की पार्टियां इस सब के बाद अपनी संख्यात्मक श्रेष्ठता खोने को लेकर आशंकित हैं. वहीं दूसरी ओर जम्मू को उम्मीद है कि परिसीमन की कवायद एक ऐतिहासिक गलती को सही कर देगी.

उमर अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्ण राज्य का मतलब आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) के लिए जम्मू और कश्मीर कैडर रहेगा और केंद्र शासित प्रदेश कैडर में विलय नहीं किया जाएगा जो कि वर्तमान स्थिति है.

वहीं कांग्रेस नेता व पूर्व  मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने बैठक में केंद्र के सामने पांच मांगें रखी हैं. जिनमें कश्मीर को राज्य का दर्जा, फिर से लोकतंत्र स्थापित करने के लिए विधानसभा चुनाव,कश्मीरी पंडितों का जम्मू कश्मीर में पुनर्वास, सभी राजनैतिक कैदियों की रिहाई,डोमिसाइल जमीन की गारंटी शामिल है. 

 



इसके अलावा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने की बात भी कही, जोकि कहीं न कहीं उनका पाक राग अलापने की ओर चर्चा को हवा दे गया. बात इतनी ही नहीं रही, बैठक में जम्मू-कश्मीर से आए सभी नेताओं ने अनुच्छेद 370 और 35ए को बहाल करने की अपनी मांग भी दोहरा डाली.

परिसीमन की चर्चा से लेकर से विकास पथ की बात के अलावा प्रधान मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के सभी नेताओं को सुना और भविष्य के जम्मू और कश्मीर के लिए उनके दृष्टिकोण के बारे में चर्चा हुई. 

माना जा रहा है कि 5 अगस्त, 2019 के फैसले के बाद केंद्र अब जम्मू-कश्मीर के मामले में शांति व्यवस्था पर सुलह करना चाहता है और परिसीमन के जरिये एक सहभागी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से जम्मू और कश्मीर के लोगों के लिए विकास की नई राह की तैयारी भी कर रहा है. हालांकि अब किसी भो प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गेंद, जम्मू-कश्मीर के नेताओं के पाले में है.

पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि वो 'दिल की दूरी' और 'दिल्ली की दूरी' को खत्म करना चाहते हैं. लेकिन इस पर उमर अब्दुल्ला ने अपने विचार रखते हुए साफ़ किया कि एक बैठक में न तो 'दिल और न ही दिल्ली की दूरी' खत्म होगी. क्योंकि कथनी और करनी में काफी फर्क होता है. कहना जितना आसान है करना उतना ही मुश्किल. ऐसे में माना जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच की तकरार अभी बरकार है.

गौरव सावंत इंडिया टुडे टीवी के सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं और इंडिया टुडे पर 10 बजे आने वाले 'इंडिया फर्स्ट शो' वीकनाइट्स और तेज चैनल पर आठ बजे आने वाले 'देश का गौरव' वीकनाइट्स' के एंकर हैं.

(व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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