इजरायल और हमास के बीच पिछले महीने 7 अक्टूबर के बाद से ही जंग जारी है. इजरायल गाजा में जबरदस्त बमबारी कर रहा है जिसमें अब तक 8800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. नई दिल्ली में इजरायली दूतावास की माने तो हमास के लड़ाकों ने करीब 200 से अधिक निर्दोष नागरिकों का अपहरण कर बंधक बनाए हुए हैं. इन्हें छुड़ाने के नाम पर इजरायल जबरदस्त अटैक कर रहा है. फिलहाल 28 दिन होने जा रहे हैं पर इजरायल की सेना जिसके साथ अमेरिका और पूरा वेस्ट कदम से कदम मिलाकर चलता है ये पता लगाने में कामयाब नहीं हो सका है कि हमास ने बंधकों को कहां छुपा कर रखा है.
गाजा में सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर गाजा में ऐसा क्या है जिसकी वजह से इजरायल की सेना अब तक खाली हाथ है, क्यों उन्हें अगवा किए गए एक भी शख्स का कुछ पता नहीं चल पाया है. यहां हम जानने की कोशिश करेंगे इस देरी की असली वजह क्या है?
1-हमास के खिलाफ पहले के तीन अभियान भी रहे हैं असफल
गाजा में इजरायल जमीनी हमले शुरू करके हमास स्थायी रूप से नेस्तनाबूद करने की घोषणा की है. पर यह पहली बार नहीं है जब इजराइल ऐसी बातें कर रहा है. 2005 में गाजा से हटने के बाद से इजरायल हमास से तीन बार टकराया है. 2008, 2014 और 2021 में गाजा में इज़रायली सेनाएं घुसीं.हर बार इजरायल के गाजा में घुसने के बाद हमास और मजबूत होकर उभारा है. इज़रायल ने 1982 के लेबनान युद्ध के बाद से इस बार बड़े स्तर बख्तरबंद गाड़ियां जिसमें 1,000 से अधिक टैंक और 3,70,000 रिजर्व सैनिकों के साथ चल रहा जमीनी आक्रमण में शामिल है. फिर भी अभी दूर-दूर तक बंधकों की रिहाई की उम्मीद नहीं दिख रही है. इजरायली वायु सेना भी गाजा पर कहर बरपा रही है. इसके बावजूद इज़रायली सरकार कह रही है कि ऑपरेशन में तीन महीने तक का समय लग सकता है. इसका मलतब साफ दिख रहा है कि इजरायली सेना को बंधकों के लोकेशन का कोई अंदाजा नहीं लग सका है. इसके साथ ही उत्तरी गाजा को खाली करने के लिए गाजावासियों को दी गई चेतावनी के बावजूद जमीनी हमले में काफी फिलिस्तीनी मारे जाएंगे.ऐसा होने पर अरब देशों की ओर से प्रतिकूल प्रतिक्रिया होना निश्चित है.
2-गाजा की जटिलता
गाजा की स्थिति बहुत ही जटिल है. दरअसल यह दुनिया का सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में से है. इजरायल के दक्षिण पश्चिम में 45 किलोमीटर लंबा और 6-10 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में करीब 20 लाख लोग रहते है. हालांकि विकीपिडिया यहां की आबादी 6 लाख ही बताई गई है. इसके तीन ओर इजरायल का नियंत्रण है तो दक्षिण में मिस्र है.पश्चिम में भूमध्य सागर में इसकी जलीय सीमा भी इजरायल नियंत्रित करता है. पूरी संभावना है कि इजराइल के पास जबरदस्त मारक क्षमता होने के बावजूद, चल रहा जमीनी आक्रमण हमास के पक्ष में होगा. गाजा में बड़े पैमाने पर कंस्ट्रक्शन हुआ हैं,इजरायली वायु सेना के हमलों के चलते बहुत बड़े खंडहर बन चुके है. ऐसे इलाक़े हमलावरों से बचने के लिए मुफीद होते हैं. ये छुपने और पल भर में गायब होने की क्षमता प्रदान करते है. हमास लड़ाकों को इलाके के बारे में पता है, जबकि इजरायली सेना तकनीक के सहारे है. सैनिकों को चेतावनी देने के लिए ड्रोन और रोबोट सहित कई तरह के वीपंस सैनिकों की मदद के लिए हैं. खार्किव में रूसी ऑपरेशन और मोसुल और बगदाद में अमेरिकी ऑपरेशन इसके उदाहरण हैं. यह भी सभी जानते हैं कि ऐसे इलाको में आतंकियों के बारूदी सुरंगों से निपटना मुश्किव होता है. हमास के पास आत्मघाती हमलावर भी हैं, जो इजरायली सैनिकों पर भारी पड़ने वाले हैं.
3-सुरंगों में फंसने का डर
कहा जा रहा है कि हमास ने गाजा में करीब 500 किलोमीटर से अधिक लंबी सुरंगों का निर्माण किया हुआ है. हमास के लड़ाके इजरायली सैनिकों पर हमला करने और गायब होने में सक्षम हैं. समझा जाता है कि इन सुरंगों में ही कहीं बंधकों को भी रखा गया है.अपने इलाके भेड़िया शेर से ज्यादा खतरनाक हो जाता है. इजरायल ने गाजा में इन सुरंगों को बेकार बनाने के लिए ईंधन की सप्लाई रोक दी है.दरअसल ये सुरंगें वेंटिलेशन और प्रकाश के लिए तेल और बिजली पर निर्भर हैं.इजरायल को उम्मीद थी कि वेंटिलेशन की कमी से लड़ाके सुरंगों से बाहर निकलेंगे. पर शायद लगता है कि इजरायली सेना का यह आंकलन भी गलत साबित हो रहा है. इसके अलावा, हमास के पास अभी भी रॉकेटों की भारी मात्रा है जिससे हमास कभी भी हमला कर सकता है.
4-जितना देर होगा वैश्विक स्तर पर विरोध झेलना मुश्किल होता जाएगा
यदि इजरायल जल्दी ही हमास को नियंत्रित करने में सफल नहीं हो जाता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी विरोध का सामना करना पड़ सकता है.इस स्थिति में हमास की वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा बढ़ेगी. चूंकि इजरायली सेना पहले ही गाजा में प्रवेश कर चुकी है, इसलिए चाहे उसकी सेना को कितनी भी भारी क्षति और देरी का सामना करना पड़े, इजरायल को जंग जारी रखना होगा.यह भी संभव है कि इजरायल अपनी पूरी ताकत गाजा में लगा दे दूसरी ओर हमास उसके नागरिकों ठिकानों पर हमले करने लगे.हमास यही चाहता है क्योंकि उसके लिए नागरिक हताहतों का कोई महत्व नहीं है. जबकि बाकी दुनिया के लिए यह मायने रखता है.
5-अफगानिस्तान -इराक और वियेतनाम का उदाहरण
दुनिया की बड़ी से बड़ी सेना के लिए दूसरे दुश्मन देश में युद्ध करना बहुत मुश्किल काम रहा है. रूस अपनी पूरी ताकत लगाकर यूक्रेन को जीत नहीं सका है. अफगानिस्तान से अमेरिका को वापस लौटना पड़ा है. जिसे मिटाने आए थे उसे ही सत्ता सौंपकर निकले. इराक और विएतनाम युद्ध भी कभी अमेरिका जीत नहीं सका.