बीती रात भारत और पाकिस्तान के बीच हुए T20 वर्ल्ड कप में फिर वही कहानी दोहराई गई. सूर्य कुमार यादव की कप्तानी. इशान किशन का क्लास. फिर गेंदबाजों का जादू. स्कोरबोर्ड पर भारत ने 175 रन लगाए थे, जिसके जवाब में पाकिस्तान 114 रनों पर ढेर हो गया. पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल पाया. कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में आए भारतीय टीम के इस तूफान को 45 करोड़ लोग लाइव देख रहे थे. लेकिन जश्न के बीच एक कड़वाहट पूरे सोशल मीडिया पर छाई रही. नो हैंडशेक वाली. खिलाड़ी मैदान पर तो लड़े. लेकिन, मैच से पहले और बाद में हाथ नहीं मिलाया. पूर्व खिलाड़ी. पत्रकार. कार्टूनिस्ट. सब अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. इस कंट्रोवर्सी ने जीत का स्वाद ही बिगाड़ दिया. आलोचक कह रहे हैं कि ICC और बोर्ड्स ने दिन-रात एक कर दिए इस मैच को करवाने के लिए. लेकिन खिलाड़ी आपस में हाथ ही नहीं मिला रहे. एक तरफ तो मैच करवाओ. दूसरी तरफ बॉयकॉट का ड्रामा. ये दोहरा चरित्र. लगता है जैसे खेलभावना का मजाक उड़ा रहे हों.
संजय मांजरेकर ने की बहस की शुरुआत
बहस की शुरुआत की थी संजय मांजरेकर ने. पूर्व भारतीय बल्लेबाज और कमेंटेटर ने X पर लिखा. ‘This ‘no shaking hands’ is such a silly thing that India has started. It’s unbecoming of a nation like ours. Either play properly within the spirit of the game or don’t play at all.‘ मतलब, ये नो हैंडशेक वाली हरकत बेवकूफी है. भारत जैसे देश को शोभा नहीं देती. या तो खेलो. खेल भावना के साथ. या न खेलो ही. संजय भाई साफ कह रहे. ये आधी-अधूरी बात है. मैच खेल लिया. लेकिन हाथ न मिलाना. ये क्या संदेश दे रहा. लाखों लोगों ने उनकी पोस्ट पर बहस छेड़ दी. कोई बोला, संजय सड़क पर आ गए. कोई बोला, खिलाड़ियों को आतंकियों से हाथ मिलाना चाहिए क्या? लेकिन संजय का पॉइंट सॉलिड था. जीत का जश्न तो पूरा होना चाहिए. इस छोटी सी बात ने सबको बांट दिया.
फिर आया पूर्व भारतीय ऑलराउंडर अजय जडेजा का जवाब. उन्होंने संजय की पोस्ट को कोट करते हुए एक फोटो शेयर की. जिसमें पाकिस्तानी खिलाड़ी फहीम अशरफ का पोस्टर था. कथित रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान का. लिखा, ‘संजय, दिखाओ एक भी मौजूदा भारतीय खिलाड़ी जिसने ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पाकिस्तान का मजाक उड़ाया हो. नहीं मिलेगा. यही फर्क है. और हाथ मिलाना जरूरी नहीं. पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर महजबी इमेज यूज की. वॉर वाली. भारतीयों ने ऐसा कुछ नहीं. तो हाथ क्यों मिलाएं. ये पोस्ट वायरल हो गई. 25 हजार लाइक्स. हजारों कमेंट्स. कोई बोला, बॉयकॉट कर दो मैच. कोई बोला, नेशनलिज्म पहले. लेकिन जडेजा का तर्क मजबूत. नो हैंडशेक ने पाकिस्तान को आईना दिखाया.
वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने जडेजा की पोस्ट को क्वोट किया और लिखा, ‘पाकिस्तानी खिलाड़ी अक्सर बेवकूफी करते हैं. धार्मिक या जंग वाली इमेज यूज करते. उनका टीवी और सोशल मीडिया हमसे भी बुरा है. लेकिन क्या ये फोटो रियल है. या AI जनरेटेड. शुरुआती चेक से लगता AI लगाया गया. इस फैक्ट चेक के बाद से बहस और भड़क गई. कोई बोला, ये रियल है. फहीम अशरफ ने इंस्टा पर शेयर किया था. मई 2025 में. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान. कोई बोला, AI हो या न हो. इरादा गंदा था.
मशहूर क्रिकेट कॉमेंटेटर और जर्नलिस्ट अयाज मेमन ने मैच के बाद लिखा. ‘45 करोड़ ने लाइव देखा. ये राइवलरी नंबर वन ब्लॉकबस्टर है. लेकिन टॉक्सिसिटी ने खेल को खराब किया. मैदान पर भारत आगे. चाहे वो एप्टीट्यूड, महत्वाकांक्षा या मेंटल टफनेस हो. पाकिस्तान पिछड़ता जा रहा है. अयाज ने साफ कहा, जीत शानदार है लेकिन ये नो हैंडशेक वाली टॉक्सिसिटी खेल को दागदार कर रही. दूसरी, ओर एक यूजर दीपक नेगी ने कॉमेंट्री बाक्स का फोटो शेयर करते हुए लिखा. ‘ICC टूर्नामेंट में नो हैंडशेक पॉलिसी. लेकिन कमेंट्री बॉक्स में हमारे खिलाड़ी पाकिस्तानियों के साथ बैठे रहे. मुस्कुराते. चैट करते. शायद हाथ भी मिलाते. ये दोहरा मापदंड. खुला पाखंड है. शर्मनाक. वरिष्ठ कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य ने रोहित शर्मा और वसीम अकरम का गले लगते हुए एक वीडियो शेयर करते हुए तंज किया कि पाकिस्तान से खेलेंगे. लेकिन हाथ नहीं मिलाएंगे. ये बेवकूफी वाला आईडिया पता नहीं किसके दिमाग की उपज है.
नो हैंडशेक कंट्रोवर्सी का दूसरा पहलू भी
इंडिया टुडे के स्पोर्टस जर्नलिस्ट विक्रांत गुप्ता का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब शेयर हुआ, जिसमें विक्रांत ने पाकिस्तान पर तीखा कमेंट किया. वे बोले, पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाकर ठीक किया. विक्रांत कहते हैं कि पाकिस्तान के मैच हार जाने के बाद और कल सुबह भी यह हेडलाइन नहीं होती कि पाकिस्तान मैच हार गया. बल्कि, अपने दर्शकों को यह बताया जाता कि पीसीबी ने इंडिया को झुका दिया. उनको हाथ मिलाने पर मजबूर कर दिया. अब बताइये कि यदि कोई आपसे हाथ मिलाना नहीं चाह रहा है तो इस बात पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है.
अथरटन की नजर में भारत-पाक मुकाबला हुआ जहरीला
इंग्लैंड के पूर्व इंटरनेशल खिलाड़ी और कमेंटेटर माइक अथरटन ने मैच से पहले ‘द टाइम्स‘ में एक आर्टिकल लिखा है. उनके मुताबिक भारत-पाकिस्तान मैच अब एक दयनीय, जहरीला नजारा बन गया है. राजनीतिक पॉइंट-स्कोरिंग का प्रॉक्सी. स्पोर्ट्समैनशिप से दूर. क्रिकेट सिस्टम की फाइनेंशियल निर्भरता इसे 'too big to fail' बनाती है, लेकिन टॉक्सिक नेशनलिज्म ने इसे बिगाड़ दिया है. अथरटन कहते हैं, वो नेपाल-इटली जैसे मैच कवर करना पसंद करेंगे. कंट्रोवर्सी ने मैच को यादगार बनाया. लेकिन नेगेटिव तरीके से.
वेस्टर्न वर्ल्ड ने बनाया खेल मैदान को जंगी अखाड़ा
हालांकि, अथरटन को याद दिलाया जा रहा है कि ये सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है. खेल में राजनीति का नजारा देखना हो तो वेस्टर्न वर्ल्ड के अतीत को देखो. जो ओलंपिक जैसे मंच को अपनी जियो-पॉलिटिक्स के लिए यूज करते रहे हैं. रूस-यूक्रेन वॉर. 2022 में रूस को बैन. IOC ने कहा, एथलीट्स को अलग रखो. न्यूट्रल फ्लैग से खेलो. लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन ने दबाव डाला. रूस को पूरी तरह बाहर किया गया. क्योंकि यही NATO की राजनीति है. वेस्ट ने जंग का हथियार बना दिया. 2024 पेरिस ओलंपिक में इजराइल और फिलिस्तीन के एथलीट आए. फिर प्रोटेस्ट हुआ. फिलिस्तीन समर्थकों ने हूट किया. लेकिन IOC ने चुप्पी साधे रखी.
चीन-ताइवान मामले में भी ऐसा ही हुआ. ओलंपिक में ताइवान को अलग नाम दिया गया. सिर्फ चीन खुश करने के लिए. वेस्ट चुप. ये सब जियो-पॉलिटिक्स है. खेल को हथियार बनाया गया. रूस को सजा. लेकिन सऊदी को नहीं. ऑयल की खातिर. वेस्टर्न हिपोक्रिसी. भारत-पाक मामले में भी वैसा ही है. ICC न्यूट्रल है लेकिन दबाव में भी है. मैच खेला, लेकिन हैंडशेक नहीं. जैसे हर पॉलिटिकल मुद्दे पर दुनिया बंट जाती है, हैंडशेक कंट्रोवर्सी में भी बंटी हुई है. किसी के लिए क्रिकेट मैच स्पोर्टसमैन स्पिरिट का मामला है तो किसी के लिए जंगी हिसाब बराबर करने का मंच भी. सबके अपने अपने तर्क है, और अपने अपने पक्ष. कोई हाथ मिलाने के लिए तैयार नहीं, बीच का कोई रास्ता नहीं.