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'ऐप पर मेरी ऑनलाइन बोली लग रही थी, तस्वीर देखकर डर गई थी', Sulli Deals पीड़िता का दर्द

मुझे नहीं पता “sulli” का क्या मतलब है. मुझे इतना पता था कि यह कुछ गंदा है. मैंने अपने एक दोस्त से पूछा. उसने बताया कि यह मुस्लिम महिलाओं को दी जाने वाली गाली है. मैंने यह सिर्फ जानकारी के लिए पूछा था, लेकिन अब डर के साये में जी रही थी.

 हना ने बताया कि इस तरह चार बार महिलाओं को निशाना बनाया गया हना ने बताया कि इस तरह चार बार महिलाओं को निशाना बनाया गया

सोचिए, सामान्य सा दिन है. आप सुबह उठें और आपके दोस्त आपको 'हना क्या तुम्हारा नाम भी इसमें है?' का मेसेज करें और साथ में भेजें एक ट्विटर का लिंक, जिसमें एक लिस्ट हो और हों कई सारे नाम. जिसमें ऐसी महिलाएं भी शामिल हों जिसमें से कुछ आपकी दोस्त भी हैं और आप यही सोचती रहें कि आपको इसमें क्यों टैग किया गया है.

आप लिंक पर क्लिक करें तो एक जाना-पहचाना सा ऐप खुल जाए. यह ठीक वैसा है जिसे हम फेसबुक पर पहले बिना मतलब के इस्तेमाल करते थे. जो बताता था कि पिछले जन्म में आप क्या थे, आपकी जिंदगी कैसी थी. आप किस तरह की राजकुमारी थी आदि.

ऐप का टाइटल “Sulli deals” था. आगे लिखा था कि 'आज के दिन की अपनी सुल्ली को तलाश करें.' आगे एक भगवा सा बटन था जिसपर लिखा था “find me a sulli”. इसपर क्लिक करने के बाद जिज्ञासा होती है कि आगे अब क्या होगा?

तब महिला की तस्वीर सामने आती है. वहां लिखा साफ पढ़ नहीं पाएंगे तो आप फिर से क्लिक करेंगे. फिर एक बार दोबारा क्लिक करेंगे. फिर आपके दिमाग की घंटी बजने लगती है. मुसीबत को भांपने का जो भी प्रशिक्षण आपने लिया होता है वह काम करने लगता है. आपके शरीर को यह मालूम पड़ जाता है कि यह भयावह है. फिर जब आप दोबारा क्लिक करें और आपको अपनी एक तस्वीर दिखाई दे जाए तो फिर जो सामने है वह बताया ना जा सकने वाला डर है.

Bulli Bai app: मुस्लिम महिलाओं के अपमान की मास्टरमाइंड निकली उत्तराखंड की महिला, गिरफ्तार

मुझे नहीं पता “sulli” का क्या मतलब है. मुझे इतना पता था कि यह कुछ गंदा है. मैंने अपने एक दोस्त से पूछा. उसने बताया कि यह मुस्लिम महिलाओं को दी जाने वाली गाली है. मैंने यह सिर्फ जानकारी के लिए पूछा था, लेकिन अब डर के साये में जी रही थी.

मैं पेशे से पायलट हूं. कुछ सालों तक मीडिया में भी काम किया, जिसकी वजह से सोशल मीडिया और राजनीतिक लोगों के बीच चर्चा में रही. लेकिन मैं राजनीति से जुड़ी नहीं हूं. मैं राजनीति पर लिखती तक नहीं. मुझे ना कभी इस वजह से ट्रोल किया गया था. फिर मुझे धीरे-धीरे यह अहसास हो गया कि मैं सिर्फ अपनी मुस्लिम पहचान की वजह से निशाने पर हूं. इस बात ने मुझे डरा दिया था. इस देश में क्या हो रहा है वह मुझे भी दिख रहा है. देश के राजनीतिक माहौल, समुदाय और देश के सामने क्या चुनौतियां हैं मुझे भी दिखता है.

लेकिन आपको कभी नहीं पता होता कि निशाना आप बन जाओगे. आप सुरक्षा की झूठी भावना के साथ जी रहे हो. मुझे इस बात का अहसास हो गया था कि निशाने पर आना कितना आसान है.

मैं और अन्य 83 महिलाओं को सिर्फ मुस्लिम होने और खुलकर आवाज उठाने की वजह से टारगेट किया गया था. महिलाओं के पक्ष में आवाज उठाने वाली मुस्लिम महिलाएं समाज की रिवायत में फिट नहीं बैठतीं, जिसमें ये महिलाएं विनम्र, अशिक्षित, उत्पीड़ित होती हैं. यह बात निरंतर कही जाती रही है कि मुस्लिम महिला को 'सुरक्षा' की जरूरत है. ऐसे में आवाज उठाने वाली महिलाओं को चुप कराने की कोशिश जरूर होती रही हैं.

साथ ही हमको सॉफ्ट टारगेट भी समझा जाता है. जैसे पुराने वक्त में होता था. जब भी किसी राज्य को अपने अधीन करना होता था जो महिलाओं पर सबसे पहले अत्याचार होता था और अपने ही विकृत दिमाग में इन लोगों को लगता था कि वे इससे सफल हो जाएंगे.

Sulli deals app जुलाई में सामने आया था. लेकिन इससे पहले मई की ईद पर, कोरोना की दूसरी लहर से पहले मुस्लिम महिलाएं, बहुत सी दोस्तों को यूट्यूब पर टारगेट किया गया था. उनकी एक-एक रुपये में बोली लगी थी. उनके शरीर के अंगों के लिए बहुत गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. FIR दर्ज कराई गईं, इसपर विवाद हुआ. लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ. वे यूट्यूब पेज अबतक मौजूद हैं. उस पेज के मालिक को सब लोग जानते हैं. उस पेज का कंटेंट अबतक शेयर हो रहा है, लाइक हो रहा है.

Sulli deals के बाद महिलाओं को क्लबहाउस में निशाने पर लिया गया. इस बार निशाने पर हिंदू महिलाएं थीं, जिन्होंने Sulli deals घटनाक्रम के दौरान मुस्लिम महिलाओं को सपोर्ट किया था. इसमें एक लाइव पेज पर शख्स आता है और महिलाओं के अंगों का जिक्र कर उनकी बोली लगवाता है.

अब चौथा सुनियोजित हमला bulli bai app से किया गया. यह नए साल पर गिफ्ट की तरह हमारे सामने आया है. bulli bai app में भी मुस्लिम महिलाओं को निशाने पर लिया गया है. मैं और मेरे साथ कई महिलाओं ने sulli deals के वक्त FIR दर्ज कराई थी. इसके अलावा हर संभावित मंच पर आवाज उठाई, जिससे किसी का तो ध्यान इस तरफ जाए और एक्शन हो सके.

आखिरकार मामला महिलाओं की ऑनलाइन बोली लगाने का था. उनकी मर्यादा को छीनने का था. हमें इसके सिए सपोर्ट मिलना ही चाहिए था. लेकिन छह महीने बीत गए कोई प्रगति नहीं हुई. कोई एक्शन नहीं हुआ, उन घटिया इंसानों को पकड़ने की कोशिश नहीं हुई जो इसके पीछे थे. ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं दिखा. यह मेरे लिए माफी न करने योग्य चीज है.

अगर मई में जब यूट्यूब पर महिलाओं की बोली लगी थी, तभी एक्शन हो जाता तो यह एक उदाहरण होता. जो बताता कि महिलाओं के प्रति इस तरह की हरकत करने वाले सजा जरूर पाएंगे. ऐसा हो जाता तो करीब 150 महिलाओं ने जो अनावश्यक आघात झेला वह नहीं सहना पड़ता. अपने लिए और उन महिलाओं के लिए मैं क्रोधित हूं.

यह गुस्सा अबतक बना हुआ है, यह मुझे नहीं छोड़ रहा और शायद कभी छोड़ेगा भी नहीं. इस बात का अब कोई अर्थ नहीं रह गया है कि इस देश में महिलाओं को पूजनीय माना जाता है.

मुझे आशंका है कि अगर दोषियों के खिलाफ एक्शन नहीं हुआ तो यह सब रुकेगा नहीं. यह सिर्फ मुस्लिम महिलाओं तक नहीं रुकेगा. जो महिलाएं किसी विचारधारा, एक निश्चित मानसिकता का समर्थन नहीं करेंगी या फिर दूसरा मत देंगी उनको आसानी से निशाना बनाया जाएगा. वे तुम्हारे लिए आएंगे. शायद थोड़े वक्त बाद. लेकिन ऐसा होगा.

हालांकि, ताजा घटनाक्रम ने मुझे थोड़ी उम्मीद दी है. मुंबई पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा है. मुझे आशा है कि इससे कुछ तार्किक निष्कर्ष निकले और अपराधियों को पकड़कर जेल में डाला जाए, जिससे पिछले छह महीने में जो कुछ झेला गया है उसपर लगाम लगे.

(हना एक पायलट और पूर्व पत्रकार हैं. वह Sulli Deals केस की पीड़ित महिलाओं में से एक हैं)

 

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