2014 लोकसभा चुनाव में सहारनपुर से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी की 'बोटी-बोटी' कर देने की धमकी दी थी. इतना ही नहीं वे धमका रहे थे कि गुजरात में तो 4 फीसदी मुसलमान हैं, यूपी में 42 फीसदी हैं. हम जान से मार देंगे. आज वही इमरान मसूद बसपा से होते हुए दस साल बाद फिर कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस उन्हें फिर से लोकसभा का टिकट देगी. टिकट की बात को पीछे छोड़ते हैं, सवाल तो पहले यह उठता है कि राहुल गांधी इमरान की कांग्रेस में एंट्री कैसे होने दे रहे हैं? संसद में बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने जब दानिश अली और उनकी धार्मिक पहचान लेकर जब अपशब्द कहे तो इसके विरोध में राहुल गांधी ने दानिश अली के घर जाकर अपनी संवेदना जाहिर की. जाहिर है कि वे संदेश देना चाहते थे कि उन्हें किसी भी तरह की बदजुबानी पसंद नहीं है. किसी को धार्मिक आधार पर बुरा कहना तो हरगिज़ कबूल नहीं है. लेकिन, इमरान मसूद की 'बदजुबानी' को अनदेखा करके राहुल गांधी और उनकी पार्टी शायद एक संदेश और देना चाहती है. यदि किसी भाजपा नेता को कुछ बुरा-भला कहा गया है तो वह बुरा नहीं माना जाना चाहिए. दस साल में इमरान मसूद की कांग्रेस में 'घर-वापसी' तो यही इशारा कर रही है.
इमरान मसूद की जुबान उनको जब तब धोखा देती रही है
बात तब की है जब समाजवादी पार्टी में 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों के लिए टिकट बंटवारा चल रहा था. 18 सेकंड का एक वीडियो वायरल हुआ था "दुआ करो अल्लाह से. बहुत मना लिया. अबे दूसरों के पैर पकड़वा रहे हो, तुम मुसलमान-मुसलमान सीधे हो जाए, मेरे से क्यों पैर पकड़वा रहे हो, तो सारे मेरे पकड़ते फिरेंगे. मुझे पैर पकड़वा दिए, मेरा कुत्ता बना दिया. कुत्ता बना दिया कुत्ता."
11 जनवरी 2022 को इमरान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में जाने का फ़ैसला लिया था पर 17 जनवरी को ये वीडियो सामने आ गया.इस वीडियो का मतलब यह निकाला गया कि इमरान मसूद को समाजवादी पार्टी नज़रअंदाज़ और पार्टी से उनकी बात बिगड़ चुकी है. लेकिन बाद में इमरान मसूद ने कहा कि वे समाजवादी पार्टी के सिपाही हैं और वो टिकट लेने के लिए समाजवादी पार्टी में नहीं आए थे.बीएसपी से भी इमरान मसूद बड़े बेआबरू होकर केवल इसलिए निकाले गए थे क्योंकि उनकी जुबान ने एक इंटरव्यू में राहुल और प्रियंका गांधी की तारीफ कर दी थी. हालांकि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव रहे इमरान मसूद ने सहारनपुर ज़िले में अपना जनाधार तैयार किया है. 2017 चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को 2 सीटें दिलाकर यह साबित भी किया था. कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ा और 6 सीटें जीत सकी थी. इमरान मसूद खुद नकुड़ विधानसभा से मात्र चार हज़ार वोटों से हार गए थे.
इमरान मसूद का कांग्रेस में क्या काम है?
राजनीतिक विश्वलेषकों का मानना रहा है कि मसूद जैसे नेताओं की बहकी जुबान माहौल को सांप्रदायिक बना देती है जिससे वोटों का ध्रुवीकरण होता है. राजनीति में यह काम कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजेपी सभी करते रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि अगर बिधूड़ी पर एक्शन बीजेपी नहीं लेती है तो मसूद जैसों का कांग्रेस में स्वागत होता है. एक बात और है कि ऐसे लोगों का ऐसे ही बोल वचनों के चलते राजनीतिक जनाधार तैयार हो जाता है. समाजवादी पार्टी हो या बीएसपी इसी तरह के ध्रुवीकरण के चलते इमरान मसूद अपने पार्टी में ले गई थी.कांग्रेस को लगता है कि इस बार यूपी में वो कुछ अच्छा कर सकती है.इसलिए पहले वेस्ट यूपी के ही नेता इमरान प्रतापगढी को राज्य सभा में भेजा, अब अपने पुराने साथी इमरान मसूद की घर वापसी भी करवा रही है. दरअसल इंडिया गठबंधन में कांग्रेस यूपी में अखिलेश यादव से अच्छी खासी सीट डिमांड कर सकती है. इसके लिए कद्दावर नेताओं की जरूरत होगी . इमरान मसूद मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण कराने में उस्ताद रहे हैं.
इमरान की घर वापसी करवाकर कांग्रेस ने रमेश विधूड़ी पर दबाव कम कर दिया
इसी साल 21 सितंबर को लोकसभा के स्पेशल सत्र के दौरान चंद्रयान की उपलब्धि पर चर्चा हो रही थी. लोकसभा सांसद रमेश बिधूड़ी अपना भाषण पढ़ रहे थे कि यूपी के अमरोहा से आने वाले बसपा सांसद कुंवर दानिश अली की आवाज तेज आवाज से डिस्टर्ब कर रहे थे. इसके बाद रमेश बिधूड़ी ने दानिश अली पर अपमानजनक शब्दों की बौंछार कर दी. बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने बिधूड़ी के बयान को सदन की कार्यवाही से हटा दिया. भाजपा ने रमेश बिधूड़ी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया.इसके कुछ दिन बाद रमेश बिधूड़ी को राजस्थान में चुनाव संबंधी एक जिम्मेदारी सौंप दी गई. बिधूड़ी के इस परमोशन पर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष बीजेपी पर हमलावर हो गया था. अब सवाल उठता है कि अब कांग्रेस किस मुंह से रमेश बिधूड़ी के प्रमोशन पर बीजेपी को घेर पाएगी. मसूद को कांग्रेस में वापस लेकर रमेश बिधूड़ी के पाप तो उसने खुद धो दिए हैं.