कनाडा के बाद अब अमेरिका ने भी भारत पर खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है. एक अमेरिकी अधिकारी ने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि "हम अमेरिकी धरती पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेंगे." हालांकि अभी भी अमेरिकी प्रेसिडेंट बाइडेन का बयान नहीं आया है. जिस तरह कनाडाई पीएम ट्रूडो लगातार भारत पर आरोप लगाते रहे हैं, बाइडेन अभी उस स्तर पर नहीं उतरे हैं. अभी तक बाइडेन ने भारत के खिलाफ अपने मुंह को बंद रखा है.
हालांकि भारत सरकार ने अमेरिका के इस तरह के आरोपों का खंडन किया है और जांच कराने का वादा किया है. पर सवाल यह उठता है कि जो शख्स भारत के खिलाफ लगातार आग उगल रहा हो, भारत में हुए कई आतंकी कार्रवाई में शामिल रहा हो, भारत के विमान को उड़ाने की धमकी दे रहा हो, भारत में हो रहे क्रिकेट विश्वकप के दौरान बम धमाके की बात कर रहा हो क्या भारत सरकार को उसकी आरती उतारनी चाहिए? अमेरिका क्यों नहीं समझ रहा है कि हो सकता है कि पतवंत पन्नू भी पाकिस्तानी अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली की तरह अमेरिका में बैठकर खतरनाक आतंकी हमले की प्लानिंग कर रहा हो? क्या जिस तरह अमेरिका कोलमैन हेडली के मुंबई हमलों के अंजाम देने के बाद हरकत में आया था वैसा ही गुरपतवंत सिंह पन्नू के साथ भी करेगा? क्या केवल अमेरिका को ही अपनी आतंरिक सुरक्षा के लिए किसी भी देश में एक्शन लेना का अधिकार है?
अमेरिका से पहले कनाडा ने भारत पर एक खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था. हरदीप सिंह निज्जर की सरे काउंटी में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड के महीनों बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में भारत पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था. मामला इतना बढ़ा कि दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया. बाद में भारत ने कनाडा के लिए वीजा सर्विस भी रोक दी थी और कनाडा के कई राजनयिकों को उनके देश का रास्ता दिखा दिया.
अमेरिका का लादेन को मारने पाकिस्तान में घुसना क्या था?
क्या अमेरिका और कनाडा किसी आतंकवादी की अपने घर में आरती उतारते रहे हैं, इसकी कोई नजीर है? 9/11 के दोषी ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने किस हैसियत से पाकिस्तान में घुसकर मारा था? क्या पाकिस्तान में ओसामा को मारने के लिए अमेरिकी एजेंसियों ने पाक सरकार से परमिशन ली थी? अगर एक आतंकवादी को ठिकाने लगाने के लिए एक देश को दूसरे देश से परमिशन लेना पड़ेगा तो आतंकवाद से किस तरह लड़ाई लड़ी जा सकेगी? अमेरिका शायद यह भूल गया है कि आतंकवाद को जब तक एक भी देश संरक्षण देगा इसे समूल नष्ट नहीं किया जा सकेगा. अमेरिका के दोहरे रवैये के चलते ही आज आतंकवाद दुनिया भर में जड़े जमा रहा है. यह अमेरिका की सुरक्षा के लिए भी ठीक नहीं है.
अमेरिका समझे ले तो नहीं तो बहुत देर हो जाएगी
अमेरिकी अटॉर्नी डेमियन विलियम्स ने कहा, "अभियुक्त ने भारत से यहीं न्यूयॉर्क शहर में भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रची, जिसने सार्वजनिक रूप से सिखों के लिए एक संप्रभु राज्य की स्थापना की वकालत की है." विलियम्स को इतना पता है कि पन्नू भारत के अंदर एक संप्रभू राज्य की स्थापना करना चाहता है. क्या अमेरिकी अटार्नी को यह नहीं पता है कि भारत में करीब डेढ़ दर्जन आतंकी मामलों में वह इन्वॉल्व है. अमेरिका जल्दी समझ ले तो ठीक है वर्ना भारत भी 2 दशक पुराना वाला देश नहीं है. जब आतंकवाद ने देश के लोगों का जीना मुहाल किया हुआ था. भारत आज अमेरिकी एजेंडे पर नहीं चलने वाला है. भारत अपने फैसले स्वयं लेता है . चीन के खिलाफ भारत अमेरिका के साथ क्वाड को मजबूत करने में दिन रात लगा हुआ है. अमेरिका सोच ले कि उसे क्वाड में साथ चाहिए या नहीं? हिंद महासागर क्षेत्र में उसे भारत का सहयोग चाहिए या नहीं?
आतंकवाद पर कुछ देशों के दोहरे रवैये पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कुछ दिनों पहले दिया गया बयान गौर करने लायक था. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा- आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर एक्शन राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से नहीं हो सकता. क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप भी अपनी सहूलियत के हिसाब से नहीं हो सकता. जयशंकर ने विश्व की बड़ी शक्तियों को आईना दिखाते हुए कहा था कि जब कुछ देश एजेंडा तय करते थे और यह अपेक्षा करते हैं कि अन्य सभी देश उसका अनुसरण करें. पर अब ऐसा नहीं होने वाला है.
मुंबई हमले तक डेविड कोलमैन को पालपोस रहा था अमेरिका
मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड पाकिस्तानी अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली भारत के खिलाफ मुंबई हमलों की साजिश रचता रहा पर अमेरिका उसे पालता पोसता रहा . बिल्कुल उसी तरह आज खालिस्तानी आतंकी पतवंत पन्नू को पाल रहा है. हेडली के बारे में अमेरिका की एजेंसियों को सब पता था पर जब तक मुंबई हमला नहीं हो गया तब तक उसके बारे में कोई सुराग अमेरिका ने भारत को नहीं दिया. हो सकता है कि पतवंत पन्नू भी ऐसी हो कोई साजिश रच रहा हो भारत के खिलाफ. पन्नू तो खुलेआम धमकी भी कई बार दे चुका है. पन्नू ने अभी हाल ही में सिखों को सलाह दी थी कि भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती वाले दिन वे एयर इंडिया से यात्रा न करें. ये सलाह इसलिए थी कि उस दिन एयर इंडिया के किसी भी विमान में विस्फोट हो सकता है. जैसा कि 1985 में एयर इंडिया के ही विमान कनिष्क को कनाडा के ही खालिस्तानी आतंकवादियों ने मार गिराया था. जिसमें करीब 360 भारतीय मारे गए थे. इस विमान को मार गिराने वालों पर कनाडा सरकार ने जो रहम दिखाया उसके चलते आरोपियों को आज तक सजा नहीं मिल पायी. पतवंत ने अभी हाल ही में भारत में हो रहे क्रिकेट विश्वकप के दौरान भी विस्फोट करने की धमकी दी थी.
अमेरिका के दोहरे चरित्र के कुछ और उदाहरण
अमेरिका ने अफगानिस्तान में क्यों अपनी सेना पहुंचा दी? अमेरिका को अफगानिस्तान में तालिबान के नाम से चिढ़ थी इसलिए अफगानिस्तान में सेना उतार दी, कई सालों तक युद्ध चला. हजारों अफगानी मारे गए. क्या अमेरिका इराक भूल गया है. जहां केवल केमिकल बम के संदेह के चलते अमेरिका ने इराक पर हमला कर दिया.केवल अपनी पूंजीवादी विचारधारा के विरोधी विचारधारा वाली सरकारें बनने के चलते अमेरिका ने 1950 के दशक में वियतनाम सहित कई देशों को तहस नहस कर दिया.दुनिया भर में सीआईए का काम ही यही रहा कि जिस देश की सरकार अमेरिकी हितों के खिलाफ जा रही हो उसकी सरकार गिरा दो.