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हार गई मासूम जिंदगी... उज्जैन में बोरवेल से 20 घंटे बाद बाहर निकाला गया भागीरथ, मौत

उज्जैन के बड़नगर में 20 घंटे तक चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार मासूम भागीरथ को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. प्रशासन और कई जिलों की टीमों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, पर ढाई साल के मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी.

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बोरवेल से निकले बच्चे को एंबुलेंस में ले जाया गया अस्पताल.(Photo:Screengrab)
बोरवेल से निकले बच्चे को एंबुलेंस में ले जाया गया अस्पताल.(Photo:Screengrab)

MP News: उज्जैन जिले के बड़नगर स्थित झालरिया गांव से शुक्रवार शाम एक विचलित करने वाली खबर आई. गुरुवार रात 8 बजे से बोरवेल में फंसे ढाई साल के भागीरथ देवासी का शव रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला. करीब 20 घंटे तक चले इस युद्ध स्तर के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब बच्चे का शरीर बाहर आया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

घटना गुरुवार रात 8 बजे की है जब भागीरथ खेलते समय खुले पड़े बोरवेल में गिर गया था. बच्चा करीब 70 फीट की गहराई पर जाकर फंसा था.

सूचना मिलते ही भोपाल से NDRF के साथ-साथ हरदा, इंदौर और उज्जैन की SDERF की टीमें जॉइंट ऑपरेशन में जुटी थीं.  रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले बोरवेल के अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था की थी ताकि मासूम सांस ले सके.

दो बार फेल हुई 'रोप रिंग' तकनीक
रेस्क्यू के दौरान बचाव दल ने बच्चे के हाथों में 'रेस्क्यू रोप रिंग' फंसाकर उसे ऊपर खींचने की कोशिश की. टीम बच्चे को 30 फीट ऊपर खींचने में सफल भी रही, लेकिन बच्चा 40 फीट की गहराई पर जाकर फिर अटक गया. 

इसके बाद प्रशासन ने करीब आधा दर्जन पोकलेन मशीनों की मदद से समानांतर गड्ढा और सुरंग बनाना शुरू किया, लेकिन समय की कमी और तकनीकी बाधाओं के कारण मासूम को जीवित नहीं बचाया जा सका. देखें VIDEO:- 

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परिजनों का टूटा पहाड़
रेस्क्यू के दौरान भागीरथ के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था. वे बार-बार बोरवेल की ओर टकटकी लगाए इस उम्मीद में बैठे थे कि उनका लाडला सही-सलामत बाहर आएगा.

जैसे ही बच्चे की बॉडी रिकवर हुई, पूरे गांव में कोहराम मच गया. शव को जांच और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल ले जाया गया है.

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