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MP के डिफेंस संस्थानों में गूंजी हड़ताल: 25 हजार कर्मचारी एक घंटा देर से पहुंचे काम पर; सरकार को दी चेतावनी

मध्य प्रदेश के 25 हजार डिफेंस कर्मचारियों ने ट्रेड यूनियन की देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में एक घंटे की सांकेतिक हड़ताल की. कर्मचारी सुबह 9 बजे काम पर पहुंचे और चार लेबर कोड सहित नए रोजगार मिशन का विरोध किया.

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दिल्ली में CITU के बैनर तले कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करते हुए.(Photo:PTI)
दिल्ली में CITU के बैनर तले कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करते हुए.(Photo:PTI)

केंद्र सरकार की 'मजदूर और किसान विरोधी' नीतियों के खिलाफ देशव्यापी ट्रेड यूनियन हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के रक्षा संस्थानों में भी देखने को मिला. राज्य की 6 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों सहित सेना के महत्वपूर्ण विभागों में तैनात लगभग 25 हजार सिविलियन कर्मचारियों ने एक घंटे की सांकेतिक हड़ताल कर अपना विरोध दर्ज कराया.  यह दिन भर की हड़ताल केंद्र सरकार की उन नीतियों के विरोध में की जा रही है, जिन्हें यूनियनों ने मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और देश-विरोधी, कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियां बताया है.

AIDEF के प्रेसिडेंट एस एन पाठक ने एक न्यूज एजेंसी को फोन पर बताया कि राज्य की 6 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप, सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज में तैनात 25,000 से ज्यादा सिविलियन कर्मचारी विरोध में एक घंटा देर से ड्यूटी पर आए.

ऑल-इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने कहा, "हम पूरे दिन की हड़ताल नहीं कर सके क्योंकि डिफेंस प्रोडक्शन और उससे जुड़े काम ज़रूरी सेवाओं की कैटेगरी में आते हैं."  

पाठक ने आगे कहा कि सुबह 8 बजे रिपोर्ट करने के बजाय, कर्मचारियों ने सुबह 9 बजे ड्यूटी शुरू कर दी. पूरे मध्य प्रदेश में कुछ जगहों पर अलग-अलग यूनियनों से जुड़े कर्मचारी विरोध करते और सरकार के खिलाफ नारे लगाते देखे गए. हड़ताल का आह्वान करने वाले सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम ने दावा किया है कि आंदोलन के लिए करीब 30 करोड़ श्रमिक इकट्ठा हुए हैं.

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उनकी तुरंत मांगों में चार लेबर कोड और नियमों को खत्म करना, ड्राफ्ट सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को वापस लेना और सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) एक्ट शामिल हैं.

यूनियन MGNREGA को फिर से शुरू करने और विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 को खत्म करने की भी मांग कर रहे हैं. इस हड़ताल को INTUC, AITUC, HMS, CITU सहित देश के लगभग सभी बड़े ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त है. 

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