
इंदौर में होली के चौथे दिन आयोजित होने वाले बजरबट्टू सम्मेलन को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया. सम्मेलन के आयोजक के मुताबिक, बजरबट्टू पहाड़ी गधे को कहा जाता है और ये परम्परा 25 सालों निभाई जा रही है. इस दौरान सेठ चुन्नीलाल धर्मशाला खूजरी बाजरा से एक शोभायात्रा निकाली गई. इसमें भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय चाचा चौधरी के रूप में नजर आए जबकि उनके खास सहयोगी और भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती साबू के वेश में नजर आए.
लोगों में देखा गया जबरदस्त उत्साह
कैलाश विजयवर्गीय इस आयोजन के दौरान हर बार किसी ना किसी प्रमुख प्रसिद्ध हस्ती का रूप धारण करते हैं और रथ में सवार होकर लोगों का मनोरंजन करते हैं. इस आयोजन में हर साल घोड़े, ऊंट, बग्घी, रथ में सवार होकर कई लोग बजरबट्टू बनकर निकलते हैं. चाचा चौधरी बने कैलाश विजयवर्गीय और साबू बने जीतू जिराती भी इन्हीं के साथ राजबाड़ा से मल्हारगंज क्षेत्र तक गए, जहां कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस आयोजन को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह रहता है.

कैलाश विजयवर्गीय ने कही ये बात
इस आयोजन को देखने के लिए हजारों लोग शनिवार रात सड़कों पर मौजूद रहे, जहां लोगों ने आतिशबाजी और बैंड की धुन का का लोगों ने लुत्फ लिया. चाचा चौधरी बने कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मुझे चाचा चौधरी बनाया गया है. चाचा चौधरी गांव के प्रसिद्ध किरदार थे और उन्हें सुपर कंप्यूटर कहते हैं. मैं चाचा चौधरी की भूमिका अदा कर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सम्मान दे रहा हूं. मेरे साथ साबू के रूप में जीतू जिराती है. गांव के लोगों में आज भी टैलेंट हैं, भारतीय क्रिकेट टीम में आज भी आधे युवा खिलाड़ी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं. हर क्षेत्र में गांव के नौजवानों ने अपनी बुद्धिमत्ता को सिद्ध किया है. कंप्यूटर बहुत तकनीकी रूप से सक्षम हो लेकिन अनुभव चाचा चौधरी के पास ही है.'
हर साल होता है आयोजन
चुनाव को लेकर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ये टेलेंट कमाल दिखाएगा. कार्यक्रम के आयोजक अशोक चौहान चांदू ने कहा, 'बजरबट्टू पहाड़ी गधे को कहा जाता है जो बड़ी मेहनती होते हैं. इसमें कैलाश विजयवर्गीय के अलावा और भी लोगों तथा पत्रकारों को भी बजरबट्टू बनाया जाता है. ये आयोजन हम 25 साल से करते रहे हैं, इसमें कैलाश विजयवर्गीय को हम हर बार अलग अलग भूमिका देते हैं. वह हर साल कभी भगवान शंकर, कभी तांत्रिक, कभी बाहुबली, कभी सचिन तेंदुलकर जैसी अलग-अलग भूमिका में नजर आते हैं.'
यह आयोजन रंग पंचमी से एक दिन पहले किया जाता है. इस दौरान घोड़े ऊंट बग्घी में शामिल होते हैं और डेढ़ सौ मंच बनाए जाते हैं जिसमें सभी को चॉकलेट बांटी जाती हैं.