मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए दर्दनाक बोट हादसे को लेकर अदालत ने बड़ा कदम उठाया है. इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब कोर्ट ने पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. यह मामला पिछले सप्ताह बर्गी डैम जलाशय में हुई क्रूज बोट दुर्घटना से जुड़ा है. यह आदेश मंगलवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास डीपी सुत्रकर ने दिया. कोर्ट ने कहा कि मामले में सामने आए तथ्यों और रिपोर्ट्स के आधार पर यह स्पष्ट है कि चालक और क्रूज बोट के अन्य कर्मचारियों ने डूब रहे यात्रियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया.
कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि यह कार्य भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक मानव वध के प्रयास के दायरे में आता है. कोर्ट ने बर्गी पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया है कि दो दिनों के भीतर FIR दर्ज की जाए. यह हादसा 30 अप्रैल को हुआ था, जब राज्य पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक क्रूज बोट बर्गी डैम में पलट गई थी. इस घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. वहीं 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था.
बर्गी डैम क्रूज दुर्घटना मामले में FIR दर्ज करने का आदेश
घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे. अब अदालत ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विभिन्न अखबारों और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह सामने आया है कि बोट का संचालन लापरवाही से किया जा रहा था. कोर्ट के अनुसार, बोट का चालक घटना के बाद सुरक्षित बच निकलने में सफल रहा, जबकि यात्रियों को डूबने के लिए छोड़ दिया गया. अदालत ने कहा कि यह व्यवहार गंभीर लापरवाही और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में FIR दर्ज नहीं की जाती है और जांच नहीं होती है, तो भविष्य में बोट या क्रूज ऑपरेटर इसी तरह की लापरवाही कर सकते हैं, जिससे लोगों की जान को खतरा बना रहेगा. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है. इसलिए चालक और उस समय मौजूद अन्य कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करना आवश्यक है.
कोर्ट ने इसे आपराधिक मानव वध के प्रयास की श्रेणी में माना
इस आदेश में कोर्ट ने उन लोगों की भी सराहना की है जिन्होंने डूबते यात्रियों को बचाने में मदद की. कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों का योगदान सराहनीय है और समाज के लिए प्रेरणादायक है. कोर्ट ने बर्गी पुलिस स्टेशन के प्रभारी को निर्देश दिया है कि FIR दर्ज होने की जानकारी दो दिनों के भीतर अदालत को दी जाए. अब इस मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है. यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कितनी गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं.