इंदौर कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब एक गरीब व्यक्ति ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. पीड़ित का कहना है कि वह हर मंगलवार अपनी मजदूरी छोड़कर जनसुनवाई में आता है, लेकिन उसकी समस्या आज तक नहीं सुनी गई. गुस्से में आए व्यक्ति ने जनसुनवाई को दिखावा बताते हुए इसे बंद करने की मांग कर दी.
दरअसल, इंदौर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई उस समय हंगामे का केंद्र बन गई, जब एक गरीब मजदूर अपनी पीड़ा लेकर अधिकारियों के सामने फूट पड़ा.
पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया कि वह हर मंगलवार अपनी रोज की मजदूरी छोड़कर यहां आता है, जिससे उसका नुकसान भी होता है, लेकिन इसके बावजूद उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती.
पीड़ित का कहना है कि जनसुनवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर गरीबों की कोई सुनवाई नहीं हो रही. गुस्से में उसने प्रशासन से सवाल किया कि जब समस्याओं का समाधान ही नहीं करना है, तो हर मंगलवार होने वाली जनसुनवाई को बंद कर देना चाहिए और गरीबों के साथ दिखावा नहीं करना चाहिए. देखें VIDEO:-
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कलेक्टर कार्यालय में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया. पीड़ित गरीब दिनेश वर्मा की मजबूरी यह थी कि उसकी मां की पेंशन 1 साल से नहीं मिली है. उसका नाम भी वोटर लिस्ट से कट गया. यही फरियाद लेकर वह कलेक्टर ऑफिस पहुंचा था.
'आजतक' से बातचीत में पीड़ित ने बताया कि वह किराए के मकान में रहता है, कहां से लाए कागज? लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने तहसीलदार को पीड़ित के पास भेजा, उसकी आर्थिक मदद की और समस्या का हल करने की बात कही. देखें Video:-
क्या प्रशासन वास्तव में जनसुनवाई को प्रभावी बना पाएगा, या गरीबों की आवाज ऐसे ही अनसुनी रह जाएगी? या फिर सभी पीड़ितों को वही करना पड़ेगा जो दिनेश वर्मा ने किया है?