एक मां… जिसकी दुनिया उसका बेटा राजा रघुवंशी था. लगभग 11 महीने पहले इसी घर में शादी की खुशियां गूंज रही थीं. ढोल-नगाड़े थे, मेहमानों की रौनक थी, नई बहू सोनम रघुवंशी का जोरदार स्वागत हुआ था. किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद यही घर सन्नाटे में डूब जाएगा. शादी के बाद बहू और बेटा हनीमून पर शिलांग गए, लेकिन वहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी. पहले खबर आई कि दोनों लापता हैं. फिर बेटे राजा की लाश मिली… और बहू सोनम का कोई सुराग नहीं.
कुछ दिन बाद अचानक सोनम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के पास एक ढाबे में मिली. इसके बाद जो खुलासे हुए, उन्होंने हर किसी को चौंका दिया. आरोप लगे कि सोनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति राजा की हत्या की और खुद गायब होने का नाटक रचा. अब उसी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है यानी वह जल्द ही जेल से बाहर आ सकती है. जैसे ही यह खबर घर पहुंची, राजा की मां उमा रघुवंशी खुद को संभाल नहीं पाईं. आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे और दर्द गुस्से में बदलता चला गया. भर्राई आवाज में उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं सोनम मेरे सामने आए… तो मैं उसे मार दूं…
मां का सवाल: आखिर कैसे मिली जमानत ?
उमा रघुवंशी का कहना है कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जमानत कैसे मिल गई. उनके शब्दों में, मुझे कानून पर पूरा भरोसा था, लेकिन अब लगता है कानून अंधा हो गया है. मां ने आरोप लगाए कि अंदर ही अंदर पैसों का खेल हुआ है. राजा की मां ने सिर्फ व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि पूरे मामले पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि सोनम के परिवार के लोग आपस में मिले हुए हैं और इस केस में पैसों का लेनदेन काफी दूर तक हुआ है यहां तक कि शिलांग तक इसकी पहुंच रही. हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
उमा रघुवंशी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि शुरुआत में पुलिस उनके साथ खड़ी दिखी, लेकिन बाद में उन्होंने परिवार का साथ छोड़ दिया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर आरोपी लड़की की जगह लड़का होता, तो शायद उसे इतनी आसानी से जमानत नहीं मिलती. उमा रघुवंशी ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले को यूं ही नहीं छोड़ेंगी. उनका कहना है कि वे हाईकोर्ट जाएंगी और अपने बेटे के लिए न्याय की हर संभव लड़ाई लड़ेंगी. उन्होंने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है और यहां तक कहा कि दोषी को फांसी मिलनी चाहिए.
पिता और भाई का भी फूटा गुस्सा
मृतक के पिता अशोक रघुवंशी ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि उन्हें कानून पर भरोसा था, लेकिन इस फैसले ने उनका विश्वास तोड़ दिया. वहीं भाई सचिन रघुवंशी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
हमने फिल्मों में सुना था कि कानून अंधा होता है, लेकिन अब यकीन हो गया है. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर किसी को जल्दी जमानत चाहिए, तो वह शिलांग चला जाए.
जमानत का कानूनी आधार क्या रहा?
जहां एक ओर परिवार भावनाओं में डूबा है, वहीं अदालत ने जमानत पूरी तरह कानूनी आधारों पर दी है. जमानत आदेश के अनुसार, आरोपी को गिरफ्तारी के समय उस धारा की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके तहत उस पर आरोप लगाया गया. दस्तावेजों में ऐसी धारा का उल्लेख था, जो अस्तित्व में ही नहीं है, जबकि हत्या से जुड़ी धारा का जिक्र ही नहीं किया गया. अदालत ने इसे गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी माना और कहा कि इससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा. साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं था कि पहली पेशी के दौरान आरोपी को वकील की सुविधा मिली या नहीं.
जमानत की शर्तें
अदालत ने जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं. गवाहों या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगी, हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहेगी, बिना अनुमति न्यायालय क्षेत्र से बाहर नहीं जाएगी, 50,000 का निजी मुचलका और दो जमानती देने होंगे.
पूरा मामला क्या है?
इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम से हुई थी. शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए. 23 मई को राजा लापता हो गए और 2 जून को उनका शव चेरापूंजी की एक खाई में मिला. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. बाद में सोनम ने 8 जून को गाजीपुर में आत्मसमर्पण किया और पुलिस ने अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया. तब से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.