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धूप के बाद 'बर्फबारी' का मंजर... ग्वालियर में दोपहर बाद पलटा मौसम, ओलों के प्रहार से कांप उठा शहर, बाइक-कारों के शीशे टूटे

Gwalior Rain Hailstorm: ग्वालियर में शनिवार का दिन किसी प्राकृतिक आपदा जैसा महसूस हुआ. सुबह की तीखी धूप के बाद दोपहर को अचानक मौसम ने ऐसी करवट ली कि पूरे शहर में हाहाकार मच गया. भारी बारिश और बड़े आकार के ओलों ने शहर की सूरत बिगाड़ दी है, जिससे जनजीवन और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है.

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ग्वालियर में भयानक बारिश और ओलावृष्टि ने मचाई तबाही.(Photo:Screengrab)
ग्वालियर में भयानक बारिश और ओलावृष्टि ने मचाई तबाही.(Photo:Screengrab)

MP News: ग्वालियर में शनिवार का सूरज तीखे तेवर लेकर निकला था, लेकिन दोपहर होते-होते कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया. अचानक आए घने बादलों के बाद ऐसी भयानक ओलावृष्टि हुई कि शहर के पॉश इलाके सिटी सेंटर की सड़कें सफेद चादर से ढक गईं. यह नजारा देखने में जितना सुंदर था, शहर के लिए उतना ही नुकसानदेह साबित हुआ.

ओलों का आकार इतना बड़ा था कि ग्वालियर की शान महाराजा बाड़ा स्थित म्यूजियम के ऊपर लगी ऐतिहासिक घड़ी ओलों की चोट से टूट गई है.

शहर के एक निजी अस्पताल की बाउंड्री वॉल गिरने से उसके नीचे खड़ी कई कारें दब गईं. यही नहीं, ओलों के सीधे प्रहार से सड़कों के किनारे और पार्किंग में खड़े बाइक और कारों के शीशे तक चकनाचूर हो गए. पद्मा स्कूल में बाइक के कांच फूटे:- देखें VIDEO:- 

हालात कुछ ऐसे हो गए कि शहर के मुरार, आनंद नगर, बहोड़ापुर, विनय नगर समेत सिटी सेंटर इलाकों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि वहां सफेद चादर पसर गई. कश्मीर जैसा मंजर दिखाई देने लगा. पद्मा राजे कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल का दृश्य देखें:- 

किसानों पर मार
एक तरफ शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली, तो दूसरी तरफ अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गईं. खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी थी, जिसे इस ओलावृष्टि ने जमीन पर बिछा दिया है. फसल खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है. देखें VIDEO:- 

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सटीक निकली IMD की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को ही पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की चेतावनी दी थी. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर से उठी इन हवाओं ने जेट स्ट्रीम के सहारे भारत पहुंचकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में असर दिखाना शुरू कर दिया है. 

विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 7 अप्रैल तक गरज-चमक और ओलावृष्टि का यह सिलसिला जारी रह सकता है. इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है.  पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं. 

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