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'मां सरस्वती की प्रतिमा पुनः स्थापित हो और नमाज बंद कराएं', काशी-मथुरा के बाद अब इंदौर में विवाद!

भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. हिंदुओं और मुसलमानों द्वारा समान रूप से दावा किया गया है कि यह उनका एक धार्मिक स्थल है. जिसमें हिंदुओं के लिए यह देवी वागदेवी यानी सरस्वती का मंदिर है. तो वहीं मुसलमान इसे कमाल मौला मस्जिद मानते हैं.

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भोजशाला को लेकर एक विवाद लंबे समय से चल रहा है भोजशाला को लेकर एक विवाद लंबे समय से चल रहा है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इंदौर कोर्ट में याचिका दायर
  • वीडियोग्राफी और कलर फोटोग्राफी की मांग

इंदौर हाई कोर्ट बेंच में धार भोजशाला के मामले में बुधवार को याचिका दायर की गई है. जिसमें कहा गया है कि मां सरस्वती की प्रतिमा पुनः स्थापित की जाए और स्थान की पूरी वीडियोग्राफी और कलर फोटोग्राफी की जाए. इसको लेकर नवंबर से प्रयास किए जा रहे थे जो कि अब एडमिट की गई.  इसमें एडवोकेट हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और पार्थ असिस्टेंट के रूप में शामिल हुए.

याचिका में वाग देवी की प्रतिमा जोकि लंदन स्थित संग्रहालय में रखी हुई है, उसे वापस लाने की भी मांग की गई है. वहीं धार भोजशाला मामले में हिंदू संगठनों ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर परिसर पर कब्ज़ा देने और नमाज़ बंद कराने की मांग की जिसपर एएसआई, भारत सरकार और भोजशाला कमेटी को नोटिस जारी किया गया है.

आपको बता दें कि यहां मंगलवार और वसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा की अनुमति है तो वहीं शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त मिली हुई है. भोजशाला को लेकर दोनों समुदायों में विवाद न हो, इसलिए 12 मई 1997 को धार के तत्कालीन कलेक्टर ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद में जनसामान्य के प्रवेश पर रोक लगा दी थी. 

जिसके बाद साल 2003 में एएसआई की तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ने शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दे दी थी और हिंदुओं को हर मंगलवार और वसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी गई थी. ऐसे में मुसलमान इस जगह के मस्जिद होने का दावा करते हैं जबकि हिंदू इसे भोजशाला और मंदिर मानते हैं.
 

 

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