मध्य प्रदेश के जिला मंदसौर के भानपुरा क्षेत्र के रहने वाले भवानी सिंह और उल्फत सिंह के बैलों की जोड़ी का दो दिन के अंतराल के बीच मौत हो गई. जिसके बाद दोनों किसानों ने अपने बैलों का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से किया. बैलों की जोड़ी का निधन 14 और 16 दिसंबर को हुआ था. भवानी सिंह के परिवार ने इन दोनों बैलों को बचपन से पाला था.
किसान भवानी सिंह ने बताया कि दिवंगत होने वाले परिजनों की अस्थियों का विसर्जन यहां हरिपदी गंगा में होता है, इसलिए वह अपने बैलों की अस्थियों का विसर्जन करने भी यहां आए. अपने तीर्थपुरोहित पं. उमेश पाठक के माध्यम से वह बैलों का श्राद्धकर्म भी करा रहे हैं. इसके बाद घर लौटकर 26 दिसंबर को त्रयोदशी संस्कार भी करेंगे. इसके लिए उन्होंने निमंत्रण पत्र छपवाए हैं और आसपास के गांवों में न्योता भेज रहे हैं.
बैलों का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से किया गया
जिले के भानपुरा क्षेत्र के गांव बाग के रहने वाले भवानी सिंह और उल्फत सिंह 30 साल पहले दो बैलों की जोड़ी लाए थे. इन बैलों से पूरे परिवार को काफी लगाव था. त्योहार पर इन बैलों खूब सजाया जाता था. इनका नाम श्यामा और माना था. 16 दिसंबर को एक दुर्घटना में दोनों बैलों की मौत हो गई. श्यामा और माना एक कच्चे कुएं में गिर गए जहां उनकी मौत हो गई. पहले शमा की मौत हुई और दो दिन बाद माना भी दुनिया छोड़कर चला गया.
कुएं में गिरने से हुआ दोनों बैलों की मौत
उल्फत सिंह ने बताया कि वह भी बैलों के साथ घर लौट रहे थे. अंधेरा ज्यादा हो जाने के कारण उन्हें कच्चा कुआं दिखाई नहीं दिया और वो दोनों बैलों के साथ कुएं में गिर गए. वो किसी तरह से बच गए लेकिन श्यामा और माना की मौत हो गई. मंगलवार को बैलों की तेरंवी है जिसमें करीब तीन हजार लोगों का मृत्युभोज रखा गया है.
गंगा में बैलों की अस्थियां प्रवाहित की गईं
इस घटना से आहत होकर परिवार के सभी सदस्यों ने निर्णय लिया कि दोनों बैल उनके पिता समान थे. पिछले 30 सालों से हर दम उनके साथ थे. इसलिए उनका क्रिया कर्म पूरे विधि विधान से किया गया. बैलों का अस्थि विसर्जन उत्तर प्रदेश के सोरो में पूरे विधि विधान के साथ किया गया.