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भोपाल में फिर गरजा बुलडोजर! बड़े तालाब के 50 मीटर दायरे में अवैध निर्माण जमींदोज

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर प्रशासन सख्त मोड में नजर आ रहा है. बड़े तालाब के 50 मीटर दायरे में बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुए इस अभियान में सैकड़ों अतिक्रमण हटाए जाने हैं.

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350 से अधिक अवैध निर्माण हटेंगे. (Photo: Screengrab)
350 से अधिक अवैध निर्माण हटेंगे. (Photo: Screengrab)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर प्रशासन का बुलडोजर एक्शन तेज हो गया है. शहर के बड़े तालाब के आसपास 50 मीटर के दायरे में बने अवैध अतिक्रमणों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है. यह पूरी मुहिम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू की गई है, जिसके तहत तालाब के इको-सेंसिटिव जोन को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है.

जिला प्रशासन ने इसको लेकर 15 दिनों का विशेष अभियान शुरू किया है. इस अभियान की शुरुआत 6 अप्रैल से हुई है, जो 21 अप्रैल तक चलता रहेगा. इस दौरान 350 से अधिक अवैध निर्माणों को हटाने का लक्ष्य तय किया गया है.

आज शुक्रवार को हलालपुर इलाके में कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने अवैध रूप से बने फार्महाउस पर बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया. इस दौरान 4 से 5 अतिक्रमणों को हटाया गया. इस मौके पर भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. टीम की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से कार्रवाई पूरी हुई.

Bhopal Bulldozer Action Illegal Constructions Lake Radius Demolish

यह भी पढ़ें: मेरठ में करीब डेढ़ हजार दुकानों पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी! सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत; व्यापारियों का प्रदर्शन

कुछ संपत्ति मालिकों ने नगर निगम में अपनी बात रखने के लिए आवेदन किया है. ऐसे मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन का कहना है कि तालाब के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया जा रहा है. अभियान के तहत किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा.

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तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के अनुसार, मार्च 2022 के बाद बड़े तालाब के 50 मीटर दायरे में किए गए सभी निर्माण अवैध माने जा रहे हैं. इसी आधार पर इन पर कार्रवाई की जा रही है. हालांकि, कुछ संपत्ति मालिकों ने नगर निगम में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. ऐसे मामलों में सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद शहर के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना है.

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