"मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प जाते हो। आज के जमाने में किसी का एतबार नहीं किया जा सकता. मैं ताले तो नहीं लगा सकती. यह दूसरा नौकर मथरा सात रोटियाँ सवेरे और सात रोटियाँ गिनकर शाम को खाता है और बहन, बीच में इसे दो बार चाय भी चाहिए... और घर में जो मिठाई हो वह भी इसे दो. लेकिन मैं कहती हूँ, “ठीक है, कम से कम टिका तो है, भई आजकल किसी नौकर का भरोसा थोड़ी है। कब कह दे - मैं जा रहा हूँ” ये भी मुझे यही कहते हैं,कुत्ते के मुँह में हड्डी दिए रहो तो नहीं भौंकेगा" - सुनिये भीष्म साहनी की मशहूर कहानी 'साग मीट' स्टोरीबॉक्स में @Jamshedhumd से
साल की आखिरी रात थी. पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था. लेकिन तभी पुलिस की तरफ से ऐलान हुआ कि कुछ संदिग्ध शहर में देखे गए हैं, सभी लोग होशियार रहें. उन दिनों मैं एक कैफे में सिक्योरिटी ऑफिसर के तौर पर काम था. मैं अपनी ड्यूटी कर रहा था कि तभी मेरी नज़र एक शख्स पर पड़ी जो जश्न मना रहे लोगों को घूर रहा था... कौन था वो आदमी? उसके इरादे क्या थे... सुनिये स्टोरीबॉक्स में कहानी 'एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
एक शायर था जिसकी तस्वीरें गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों की तकियों के नीचे मिलती थी... जो इश्क़ भी लिखता था और इंकलाब भी... लेकिन उसके हिस्से आई ज़िंदगी की मायूसी, अधूरी मुहब्बत और एक दर्दनाक मौत... सुनिये स्टोरीबॉक्स में इस हफ्ते कहानी उर्दू शायर मजाज़ लखनवी की जमशेद क़मर सिद्दीकी से
सुपरहीरो वो नहीं जो आसमान में उड़ते हैं, बिल्डिंग्स से लटकते हैं, विलेंस को मारते हैं -सुपरहीरो वो होते हैं जो ज़िंदगी की तकलीफों, दूरियों और ग़म के बीच कुछ ऐसा कर जाते हैं कि दुनिया उन्हें याद रखती है. ये कहानी है कारगिल के एक ऐसे ही हीरो की. जमशेद क़मर सिद्दीक़ी स्टोरीबॉक्स में सुना रहे हैं 'एक सुपरहीरो की सच्ची कहानी'
रात के ख़ामोश पहर में उस घर में जहां मैं अकेले रहता था, दूसरे कमरे से वो आवाज़ दरअसल कई दिनों से आ रही थी. रात की खामोशी को चीरती हुई वो आवाज़ हर रात मुझे परेशान करने लगी थी. किसकी थी वो आवाज़? और क्या थी उस आवाज़ की दर्दनाक कहानी - सुनिए स्टोरीबॉक्स विद जमशेद में कहानी 'आधी रात की ख़ामोशी'
पांच साल के बाद वो अचानक दिखी एक अस्पताल में. ये वही लड़की थी जो हमेशा ब्रैंडेड कपड़े पहनती थी. महंगे शौक रखती थी लेकिन आज उसकी हालत ख़राब थी. कपड़े औसत, बाल बिखरे, चप्पलें घिसी हुई, चेहरे का रंग उड़ा और हाथ में मेडिकल रिपोर्ट्स. ये वही लड़की थी जिसने कभी मेरा इश्क़ ठुकराया था. सुनिये जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'एक कागज़ का फूल' स्टोरीबॉक्स में