ये कहानी है उर्दू के शायर दाग़ देहलेवी की जिन्हें कहा जाता है कि वो ख़ूबसूरती के आशिक़ थे और उनके कई औरतों से रिश्ते रहे. मुगल बादशाह के बेटे से उनकी मां की शादी हुई तो वो लाल क़िले में रहने लगे जिसके बाद उनके पास हर ऐश ओ आराम था. दाग़ देहेलवी ने बचपन में ज़िंदगी के बदसूरत यादों को आसपास फैली रंगीनियों से भरने की कोशिश की लेकिन उससे बड़ी हक़ीकत ये है कि उर्दू शायरी में जो उनका काम है उसने शायरी को नयी ज़मीन और नया आसमान दिया. सुनिये दाग़ के वालिद साहब को अंग्रेज़ी हुकूमत ने क्यों मारा था? और कहानी उस मर्डर मिस्ट्री की जिसका राज़ खुला एक फारसी में लिखे हुए ख़त से, देखिए पूरा एपिसोड STORYBOX में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी
उस शहर में कोई आंदोलन, कोई प्रोटेस्ट, कोई नारेबाजी नहीं होती थी... न ही किसी मंत्री का इस्तीफा मांगा जाता था... क्योंकि उस शहर में दफ्तर बहुत थे... रात को लोग जल्दी सो जाते थे कि सुबह दफ्तर जाना है... हर आदमी अपने काम से काम रखता था.... सड़क पर चलता हर आदमी या तो दफ्तर से आ रहा होता था... या दफ्तर जा रहा होता था... न शहर के लोग गुस्से में कहीं जमा होते थे और न ही कोई अनशन करता था... वो बहुत शांत... खामोश... एक तरतीब में चलने वाला शहर था... इसलिए नहीं कि वहां सब कुछ ठीक था... इसलिए कि लोगों को आदत हो गयी थी इसी तरह जीने की... लेकिन एक दिन... सब कुछ बदल गया... शहर में कुछ ऐसा हुआ कि हज़ारों लाखों की भीड़ गुस्से में हुक्मरानों की तरफ... चली जा रही थी... उनके हाथों में झंडे थे और ज़बान पर एक मांग थी... क्या थी वो मांग... और वो क्या था जिसने पूरे शहर के लोगों को अचानक क्रांति करने पर मजबूर कर दिया... सुनते हैं कहानी
अंसारी साहब के लालची रिश्तेदारों को वसीयत में क्या मिला? किसे मिली अंसारी साहब की पुरानी कार और किसको मिलेगा उनका मकान, नानी का पीतल वाला पानदान किसके पास जाएगा और किसकी झोली में जाएगा घर में रखा हुआ कैश? वसीयत अब पढ़ी जाएगी. सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'अंसारी साहब की अजीब वसीयत' का दूसरा और आख़िरी हिस्सा.
ये कहानी है कानपुर में रहने वाले एक चचा की जिनकी दौलत पर उनके लालची रिश्तेदारों की नज़र थी. लेकिन चचा के इंतकाल के बाद जब उनकी वसीयत पढ़ी गई तो रिश्तेदारों के होश उड़ गए. क्या लिखा था चचा ने अपनी वसीयत में, कौन थी हुमैरा जिसके दो आंसू उनकी असली दौलत बन गई. सुनिए जमशेद कमर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'कानपुर वाले चचा की वसीयत' स्टोरीबॉक्स में.
ये कहानी है सिनेमा के उस जीनियस की, जिसने अपने दौर से बहुत आगे की फिल्में बनाईं. ऐसी फिल्में, जिन्हें समझने के लिए शायद दुनिया तैयार नहीं थी. एक कामयाब अभिनेता, बेमिसाल निर्देशक... जो एक सुबह अपने कमरे में हमेशा के लिए खामोश हो गया. एक ऐसा शख्स जिसने टेलीफ़ोन ऑपरेटर की नौकरी से सफ़र शुरू किया और आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे करिश्माई फ़िल्मकारों में गिना जाने लगा - गुरु दत्त. इस बार स्टोरीबॉक्स में सुनिए गुरु दत्त की कहानी, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on a rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed and by his fellow writers that talk about the various colors of life conflicts from father-son relationships to love triangle. Stories that let you be someone else for some time to see this world from a different angle.
Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on a rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed and by his fellow writers that talk about the various colors of life conflicts from father-son relationships to love triangle. Stories that let you be someone else for some time to see this world from a different angle.
Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on a rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed and by his fellow writers that talk about the various colors of life conflicts from father-son relationships to love triangle. Stories that let you be someone else for some time to see this world from a different angle.
मुंशी प्रेमचंद की मौत के 90 साल बाद एक शख्स को मिली उनकी लिखी हुई एक डायरी. क्या था उस डायरी में जिसके बाद इलाके में मच गया हड़कंप, और कौन था वो ज़िला कलेक्टर जिसने हर कीमत पर उसे आम जनता से छिपाए रखने की कोशिश की? सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'प्रेमचंद की सीक्रेट डायरी' स्टोरीबॉक्स में.
लखनऊ में एक थे वकील साहब जो बड़े उर्दू दां थे। उन्हें उर्दू से इस क़दर इश्क़ था कि किसी को ग़लत उर्दू बोलते सुन लें तो फौरन टोक देते थे पर क्या हुआ जब उनकी इकलौती बेटी इरम को इश्क़ हो गया एक ऐसे रीलबाज़ लड़के से जो शक्कर को भी सक्कर बोलता था और लखनऊ को नखलऊ, सुनिये स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से उन्हीं की लिखी कहानी 'लखनऊ वाले वकील साहब'
कैसा हो अगर कभी कहीं घूमते हुए किसी सुनसान जगह पर आपको मिल जाए आपका एक 'हमशक्ल' जिसकी आवाज़ भी आपकी जैसी ही हो. बातचीत में पता चलता है कि उसका और आपका शहर भी एक ही है और उसकी जेब में उतने ही पैसे जितने आपके हैं. आप की पहली प्रेमिका के नाम से लेकर, कॉलेज में आए नंबर तक सब कुछ एक जैसा है... ऐसे में क्या आप जानना चाहेंगे कि ये अजनबी कौन है और आप दोनों के बीच इतनी समानताएं क्यों हैं? कहीं ये कोई साज़िश तो नहीं, जो कहानी को क़त्ल तक ले जाती है… सुनिये सत्यजीत रे की लिखी थ्रिलर कहानी 'हमशक्ल' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
सिर्फ दस पैसे के लिए दादी से लड़ाई करके घर से भागा 'चक्कू' गुस्से में रेलवे स्टेशन पहुंच गया और चलती ट्रेन में बैठ गया लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद उसने देखी एक दूसरी दुनिया जहां गरीबी थी, दर्द था और थी एक लावारिस लाश - सुनिये गुलज़ार की लिखी कहानी 'दस पैसे और दादी' स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से
क्या 'नफ़ासत हसन' नाम का कैरेक्टर दरअसल सआदत हसन मंटो पर ही लिख गया था? क्या देवेंद्र सत्यार्थी ने शरारत करते हुए अपने दोस्त के बारे में दिखाया कि वो फ्रैंच राइटरों के मशहूर जुमलों को चुराकर अपनी कहानियों में डालता है? सुनिये मंटो की देवेंद्र पर लिखी कहानी के बाद देवेंद्र सत्यार्थी का जवाब, सुनिये स्टोरीबॉक्स के 'मंटो V/s सत्यार्थी' सीरीज़ की दूसरी और आख़िरी कहानी में, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से