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Sahitya Aajtak Lucknow: 'मैं शायर हूं... मुंह की बजाय कलम से चीखता हूं', साहित्य आजतक के मंच पर बोले साइको शायर

साहित्य आजतक लखनऊ 2026 के पहले दिन स्टेज -2 पर 'साइको शायर' के सत्र में कवि और परफॉर्मर अभि मुंडे ने अपनी चिर-परिचित अतरंगी शैली में लोगों को अपनी लिखी मजेदार कविताएं सुनाई.

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साहित्य आजतक लखनऊ में साइको शायर अभि मुंडे ने अपनी कविताओं से गुदगुदाया
साहित्य आजतक लखनऊ में साइको शायर अभि मुंडे ने अपनी कविताओं से गुदगुदाया

लखनऊ में हो रहे साहित्य आजतक 2026 के पहले दिन शनिवार को स्टेज टू पर 'साइको शायर लाइव' सत्र काफी मजेदार रहा. खुद को कवि और परफॉर्मर बताने वाले अभि मुंडे ने अपने अंदाज में लोगों को खुद गुदगुदाया. अभि मुंडे ने मंच पर आते ही पूछा कि यहां कितने लोग हैं जो मुझे नहीं जानते हैं.

आगे उन्होंने कहा कि मैंने ये सवाल इसलिए पूछा क्योंकि महफिल शुरू करने से पहले खुद के बारे में बताना जरूरी है. फिर उन्होंने अपने जाने-पहचाने अंदाज में अपना परिचय दिया.

मैं शायर हूं, थोड़ा बहुत मुंह के बजाय कलम से चीख लेता हूं.
उसी चीख की चिंगार से रूह को सेंक लेता हूं...
जुबां से अंधा हूं... दिल की आंखों से देख लेता हूं.

इन चंद लाइनों के बाद फिर से अपने अलहदा अंदाज में अभि मुंडे ने लोगों को गुदगुदाते हुए अपना दूसरा परिचय दिया - या फिर यूं कहो कि मैं कवि हूं लोग कवि समझते हैं. जब लोग इकट्ठा होते हैं और तालियां-सीटियां बजती है. उसे कहते हैं कार्यक्रम और जिसमें तालियां सीटियां नहीं बजती है उसे कहते हैं क्रिया-कर्म. ये तो कार्यक्रम है. 

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उन्होंने कहा कि मैं हूं मराठी हूं और यूपी की धरती पर आया हूं. वो भी हिंदी पढ़ने के लिए. हिंदुस्तान में हम नहीं रहते हैं. हिंदुस्तान को खुद में समाकर हर जगह जाते हैं. कविताएं पढ़ते हैं. लोगों को सुनाते हैं लोगों को पसंद भी आती है. यहां जितने लोग हैं- कुछ मुझे जानते हैं कुछ नहीं भी जानते हैं. ऐसे में एक कविता से आगाज करें तो थोड़ी सी घंटी बज सकती है अंदर.

हाथ काटकर रख दूंगा, ये नाम समझ आ जाए तो..
कितनी दिक्कत होगी अगर राम समझ आ जाए तो
भाई राम-राम तो कह लोगे, पर राम सा दुख भी सहना होगा
पहली चुनौती तो ये होगी कि मर्यादा में रहना होगा...

कविता के बीच में अभि ने लोगों के कहा कि कोई भी राम बन सकते हैं. बस कुछ सिंपल मैथड को फॉलो करना होगा. इसके बाद उन्होंने भगवान राम पर अपनी लिखी कविता का पाठ किया. आगे उन्होंने दूसरी कविता सुनाने के पहले लोगों से पूछा कि क्या सभी यहां कविता सुनने के लिए ही बैठे हैं या फिर स्टैंड अप कॉमेडी देखने आए हैं. 

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उन्होंने कॉलेज के दिनों की बात करते हुए बताया कि सिगरेट कोई जानकर पीता नहीं है कि ठेले के पास गए और सिगरेट लेकर कश खींच लिया. पहली बार कोई दोस्त लेकर आता है और हम दो कश मारकर देखते हैं. मैंने भी ऐसा ही किया था और मुझे ये हैरी पॉटर की जादू की छड़ी जैसी लगी. ऐसे घुमाओ और टेंशन गायब. तब मुझे लगा कि इस सिगरेट में जान नहीं है, लेकिन इसने मुझमें जान फूंक दी. तब मुझे लगा कि अगर ये सिगरेट बोल पाती तो कितने मजे आते. इसके बाद उन्होंने बताया कि क्या आप सुनेंगे सिगरेट अगर बोल पाती तो क्या बोलती. फिर उन्होंने सिगरेट पर लिखी अपनी कविता लोगों को सुनाई.

शायरी कर मुझपे एक सुट्टे ने फरमाया था...
बुरा नहीं मैं इतना.. हंस-हंसकर वो झूम उठा
सुलगते होठों से मेरी रूह को वो चूम बैठा..

इसी तरह की कई हंसती-गुदगुदाती और व्यंग्यात्म शैली की कविताओं से उन्होंने साहित्य आजतक की इस महफिल में जमा हुए लोगों को हंसने और सोचने पर मजबूर कर दिया. उनके इस अतरंगी परफॉरमेंस पर जमकर तालियां बजी. 

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