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साहित्य तक टॉप 10- कविताः विद्रोही स्वर के बीच बना रहा प्रेम राग

साहित्य तक की टॉप 10 पुस्तकों की कड़ी में जो काव्य संकलन दर्ज हुए वे हैं...

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साल 2021 में जिन काव्य संकलनों ने छुआ दिल साल 2021 में जिन काव्य संकलनों ने छुआ दिल

ओ सूर्य!
कुछ करो, कुछ ऐसा करो
कि एक और पृथ्वी बनाओ
जिसे मुल्कों में तक़्सीम न किया जा सके!
जो हर बेवतन का वतन हो
जहां हर गणतंत्र से निष्कासित कवि के लिए
अपना एक घर हो!...कवि राजेश जोशी के कविता संकलन 'उल्लंघन' में शामिल 'एक अलग पृथ्वी' की ये आखिरी पंक्तियां हैं, और साहित्य तक की टॉप 10 पुस्तकों की कड़ी में वह संकलन भी शामिल है. आज साल 2021 का आखिरी दिन है, और शुक्रवार भी. साहित्य तक के बुक कैफे में हर शुक्रवार किसी एक काव्य संकलन की चर्चा होती है. 'बुक कैफे' के टॉप 10 काव्य संकलनों में जो दर्ज हुए, उनकी अपनी वजहें हैं. यहां विद्रोह, हमारा समय और मानवीय स्वप्न के बीच बाज़ार तो था ही इश्क भी पूरी शिद्दत से मौजूद रहा. कुछ कविताएं कांटों की तरह चुभी, तो कुछ हमेशा साथ बनी रहीं और कई-कई दिनों तक पीछा नहीं छोड़ा. जाहिर है इन सभी कवियों का उद्देश्य यही था कि दिनोंदिन जड़ होते समाज के बीच मानव और उसकी मानवीयता बची रहें.

साहित्य आजतक के साहित्य को समर्पित डिजिटल चैनल 'साहित्य तक' पर 'बुक कैफे' के तहत पुस्तक चर्चा की एक कड़ी इसी साल जनवरी में शुरू हुई थी. तब हमने कहा था- एक ही जगह बाजार में आई नई किताबों की जानकारी मिल जाए, तो किताबें पढ़ने के शौकीनों के लिए इससे लाजवाब बात क्या हो सकती है? अगर आपको भी है किताबें पढ़ने का शौक, और उनके बारे में है जानने की चाहत, तो आपके लिए सबसे अच्छी जगह है साहित्य तक का 'बुक कैफे', जहां आपको हर बार नई पुस्तकों की जानकारी मिलेगी. इस शुरुआत के पीछे इंडिया टुडे समूह की सोच थी कि कोरोना महामारी के चलते अवरुद्ध हो गई पुस्तक संस्कृति के विकास को बढ़ावा दिया जाए.

हमारा लक्ष्य इन शब्दों में साफ दिख रहा था- "आखर जो छपकर हो जाते हैं अमर... जो पहुंचते हैं आपके पास किताबों की शक्ल में...जिन्हें पढ़ आप हमेशा कुछ न कुछ पाते हैं, गुजरते हैं नए कथा लोक में. पढ़ते हैं, कविता, नज़्म, ग़ज़ल, निबंध, राजनीति, इतिहास या फिर उपन्यास...जिनसे पाते हैं जानकारी दुनिया-जहान की और करते हैं छपे आखरों के साथ ही एक यात्रा अपने अंदर की. साहित्य तक के द्वारा 'बुक कैफे' में हम आपकी इसी रुचि में सहायता करने की एक कोशिश कर रहे हैं."

आरंभ में इस कार्यक्रम के तहत किताबों पर साप्ताहिक राय रखी गई पर बाद में पुस्तक प्रेमियों के अनुरोध पर इसे 'एक दिन एक किताब' के नाम से दैनिक कर दिया गया. अब जब साल 2021 बीत रहा, तब उन्हीं किताबों में से टॉप 10 पुस्तकें चुनी गई हैं. साहित्य तक किसी भी रूप में इन्हें कोई रैंकिंग करार नहीं दे रहा. संभव है कुछ बेहतरीन पुस्तकें हम तक पहुंची ही न हों, या कुछ पुस्तकों की चर्चा रह गई हो. फिर भी पूरी पारदर्शिता से साहित्य तक ने अनुवाद, कथेतर, कथा, उपन्यास और कविता के क्षेत्र से साल 2021 की टॉप 10 पुस्तकों का चयन किया और आपके सामने वह सूची रखी. यह इस साल की यह आखिरी सूची है, जिसमें हम टॉप 10 काव्य-संकलन की सूची के साथ आपके समक्ष उपस्थित हैं-

उल्लंघन, राजेश जोशी.  हुक्म-उदूली की अपनी प्राकृतिक इच्छा से आरम्भ करते हुए मौजूदा दौर की विवशताओं से अपनी असहमति और विरोध जताती कविताएं. इन रचनाओं में कवि का दावा है कि इस दौर में न स्मृतियां बची हैं, न स्वप्न. लोकतंत्र एक प्रहसन में बदल गया है. प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन

* सड़क पर रोटी, डॉ व्यास मणि त्रिपाठी, इच्छाओं के परिष्कार और परिमार्जन की कविताएं, जो विसंगतियों और विडम्बनाओं को केवल मानव कल्याण की कामना से उजागर करती हैं. प्रकाशक- सर्व भाषा ट्रस्ट.  

* किसी और बहाने से, अरुणाभ सौरभ, जीवन-जगत के एक-एक कतरे का दुःख समझने-बांटने का उमगन से भरा संकलन, जिसकी कविताओं की मिठास कई पीढ़ियों को प्रभावित करती है. प्रकाशक- भारतीय ज्ञानपीठ  

* दुनिया के बाज़ार में, जयप्रकाश कर्दम. मानव मन की कोमल संवेदनाओं से लेकर दलित, शोषित व्यक्ति की पीड़ा और संघर्ष की सार्थक अभिव्यक्ति वाली कविताएं. कवि का मानना है कि आज के समय में वस्तु से लेकर विचार और व्यक्ति तक सब बिकता है. प्रकाशक- अमन प्रकाशन

* यही तो इश्क है, पंकज सुबीर. विशुद्ध प्रेम की रूमानी और अपने समय से प्रतिरोध दर्ज कराने वाली मिली-जुली ग़ज़लों का संकलन. कवि का भाव संसार शब्दों में प्रभावी और भावप्रवण रूप में दिखता है. प्रकाशक- शिवना प्रकाशन

* 'अर्थात्', अमिताभ चौधरी. जीवन की आपाधापी में भूलती संवेदनाओं को जिंदा करने की कोशिश करती कविताएं, जो सुख-दुःख के नाना भावों को बड़ी मार्मिकता से उजागर करती हैं. प्रकाशक- रजा फाउंडेशन के सहयोग से वाणी प्रकाशन

* विस्थापन और यादें, अंजु रंजन. जन्मभूमि से अलगाव की पीड़ा को उकेरती नॉस्टेल्जिक यादों भरी कविताएं, जो बताती है कि गांव छूटने के चलते हम अपने देश में ही विस्थापित हो गए. फिर इस माटी से दूर बचपन की यादें और पीछे छूट गया संसार और भी लुभाता है. प्रकाशक- वाणी प्रकाशन.

* खिल गया जवाकुसुम, चयन और संपादन, सुमन, 92 कवियों का संचयन,  आज के युवा प्रेम को किस दृष्टि से देखते हैं, और कैसी उम्दा प्रेम कविताएं इनदिनों लिखी जा रही हैं को उजागर करता संकलन. प्रकाशक- सर्वभाषा ट्रस्ट  

* मुरकियां शब्दों की... उपमा डागा पार्थ. आंसुओं से रुंधे, जिंदगी से भरे, खिलखिलाते, चहचहाते, खामोश या फिर अनकहे लफ्ज़ में बोई कविताएं, जिनमें कुछ कैक्टस की तरह तीखी हैं कि अंदर तक छलनी कर दें, तो कुछ मखमली अहसासों से भरी हुई हैं. प्रकाशक- राजमंगल प्रकाशन

* प्रतिनिधि बाल कविता-संचयन, दिविक रमेश. वरिष्ठ रचनाकारों से लेकर समकालीन युवा कवियों तक, कुल 195 कवियों की प्रतिनिधि बाल कविताओं का चयन और संचयन. एक बड़ी और श्रमसाध्य कोशिश, जिसके अपने मायने हैं. प्रकाशक- साहित्य अकादमी

 

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